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नायर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था: मरीजों को दवाओं से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक के लिए जूझना पड़ रहा
मुंबई: देश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार नायर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि उन्हें दवाओं की कमी, जर्जर इमारत, गंदगी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई हिस्सों में दीवारों और छत का प्लास्टर उखड़ा हुआ दिखाई देता है। जगह-जगह मरम्मत की आवश्यकता महसूस होती है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। मानसून के दौरान कई स्थानों पर पानी भरने की भी शिकायतें सामने आई हैं, जिससे फिसलने का खतरा बढ़ जाता है।
Vindhya Dubey13 जुल. 2026, 05:17 PM IST

मरीजों का कहना है कि अस्पताल की फार्मेसी में कई बार डॉक्टर द्वारा लिखी गई सभी दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे में उन्हें बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन जाता है। परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनके ठहरने या आराम करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई लोग फर्श या खुले स्थानों पर बैठकर और रात गुजारने को मजबूर हो जाते हैं। अस्पताल परिसर में कपड़े सुखाने जैसी तस्वीरें भी देखने को मिलीं, जो अव्यवस्था की ओर इशारा करती हैं। कुछ मरीजों ने यह भी दावा किया कि इलाज के दौरान उन्हें चक्कर आने या असहज महसूस होने की शिकायत पर डॉक्टरों ने अगले दिन ओपीडी में आने की सलाह दी। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी अस्पताल में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सुरक्षित भवन, पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छ वातावरण और मरीजों के परिजनों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। बढ़ती मरीजों की संख्या के बीच नायर अस्पताल में सामने आई इन समस्याओं ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मरीजों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
