पर्यावरण

“₹7,465 करोड़ की नदी जोड़ो परियोजना: 50 हजार हेक्टेयर खेतों को पानी, 939 हेक्टेयर वन भूमि पर सवाल”

“₹7,465 करोड़ की नदी जोड़ो परियोजना: 50 हजार हेक्टेयर खेतों को पानी, 939 हेक्टेयर वन भूमि पर सवाल”

₹7,465 करोड़ का Nar-Par-Girna River Link Project: 50 हजार हेक्टेयर खेतों को पानी, 939 हेक्टेयर वन भूमि पर भी असर, नाशिक से जलगांव तक बदलेगा पानी का नक्शा? 9 बांध, सुरंगें और नदी जोड़ने की योजना; पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया अभी जारी

पर्यावरण01 सित. 2026 IST
मराठवाड़ में मानसून की देरी और अनियमित बारिश: टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी, खरीफ फसलें संकट में

मराठवाड़ में मानसून की देरी और अनियमित बारिश: टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी, खरीफ फसलें संकट में

2026 के मानसून में मराठवाड़ को सामान्य से कम और अनियमित बारिश मिली; जून–अगस्त में कई जिलों में 18–23% तक की कमी दर्ज हुई और अगस्त में कुछ जिलों में 68% तक का भारी घाटा रहा। नतीजतन बांधों का स्टॉक गिरा, सैकड़ों गाँव टैंकर पर निर्भर हुए और सोयाबीन–कपास जैसी खरीफ फसलें सूखे के तनाव में आ गईं।

पर्यावरण01 सित. 2026 IST
1901 के बाद भारत का सबसे गर्म अगस्त, 125 साल का रिकॉर्ड टूटा

1901 के बाद भारत का सबसे गर्म अगस्त, 125 साल का रिकॉर्ड टूटा

भारत में अगस्त का महीना आमतौर पर बारिश, बादलों और ठंडक के लिए जाना जाता है। लेकिन अगस्त 2026 ने मौसम के इस सामान्य पैटर्न को ही बदल दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगस्त 2026 देश में 1901 के बाद सबसे गर्म अगस्त रहा।

पर्यावरण01 सित. 2026 IST
नेपाल सीमा पर नई आफत: बैरियर झील के टूटने का खतरा, चीन ने 3 दिन का अलर्ट जारी किया

नेपाल सीमा पर नई आफत: बैरियर झील के टूटने का खतरा, चीन ने 3 दिन का अलर्ट जारी किया

नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही के बीच एक नई चिंता सामने आई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में Chhochen Khola और Purepu Tsangpo नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बनी है। झील में फिलहाल करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा है और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। इसके चलते प्राकृतिक बांध के टूटने का जोखिम बढ़ गया है। हालांकि, चीन ने यह नहीं कहा है कि झील निश्चित रूप से तीन दिनों में टूट जाएगी।

पर्यावरण27 अग. 2026 IST
पूर्वांचल में बारिश का कहर: वाराणसी से गोरखपुर तक जलभराव, मकान ढहे और बांधों के फाटक खोले गए

पूर्वांचल में बारिश का कहर: वाराणसी से गोरखपुर तक जलभराव, मकान ढहे और बांधों के फाटक खोले गए

पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, आजमगढ़, भदोही, गाजीपुर, मऊ, बलिया और गोरखपुर समेत कई जिलों में बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। कहीं जलभराव तो कहीं मकान गिरने और बिजली से जुड़े हादसे सामने आए हैं। मिर्जापुर और सोनभद्र में जलाशयों का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी की निकासी के लिए गेट खोले गए। वहीं गोरखपुर-बस्ती मंडल में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी है और अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

पर्यावरण26 अग. 2026 IST
Grasslands Conservation: भारत ने UNCCD COP17 में पहली गाइड की लॉन्च

Grasslands Conservation: भारत ने UNCCD COP17 में पहली गाइड की लॉन्च

भारत ने मंगोलिया के उलानबटार में आयोजित UNCCD COP17 में घासभूमि और अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Open Natural Ecosystems) पर अपनी पहली गाइड लॉन्च की। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने घासभूमि को जैव विविधता, स्थानीय आजीविका और जलवायु लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इनके वैज्ञानिक संरक्षण पर जोर दिया। गाइड में भारत की घासभूमियों, सवाना, रेगिस्तानी क्षेत्रों, झाड़ियों, तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों की जानकारी शामिल है।

पर्यावरण19 अग. 2026 IST
MoEFCC में गूंजा वंदे मातरम्, हर घर तिरंगा अभियान में सामूहिक गायन

MoEFCC में गूंजा वंदे मातरम्, हर घर तिरंगा अभियान में सामूहिक गायन

MoEFCC ने ‘हर घर तिरंगा 2026’ और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इंदिरा पर्यावरण भवन में सामूहिक गायन और पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। सचिव तनमय कुमार के नेतृत्व में अधिकारियों-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। अभियान 9 से 17 अगस्त तक देशभर में चल रहा है।

पर्यावरण15 अग. 2026 IST
बादल फटने से भूस्खलन तक… हिमाचल की बढ़ती आपदाओं पर केंद्र की बड़ी पहल

बादल फटने से भूस्खलन तक… हिमाचल की बढ़ती आपदाओं पर केंद्र की बड़ी पहल

हिमाचल प्रदेश में बढ़ते क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और अत्यधिक बारिश की घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम का गठन किया है। NDMA, CBRI, IITM, IIT इंदौर समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ हिमाचल में चरम मौसम की बढ़ती घटनाओं के कारणों और संवेदनशील इलाकों का अध्ययन करेंगे। सरकार ने जलवायु परिवर्तन, बर्फ पिघलने, मोरेन अस्थिरता और मानवजनित गतिविधियों को बढ़ते जोखिम से जोड़ते हुए दीर्घकालिक समाधान सुझाने की बात कही है।

पर्यावरण12 अग. 2026 IST
फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाने की तैयारी, 4 रिफाइनरियों में Green Hydrogen प्रोजेक्ट

फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाने की तैयारी, 4 रिफाइनरियों में Green Hydrogen प्रोजेक्ट

भारत ने चार रिफाइनरियों के लिए कुल 30 KTPA Green Hydrogen capacity आवंटित की है। Panipat और Numaligarh को 10-10 KTPA, जबकि Bina और Vizag को 5-5 KTPA क्षमता मिली है। इसका उद्देश्य refining sector में clean hydrogen का इस्तेमाल बढ़ाना, fossil fuel dependence कम करना और भारत की green hydrogen economy को मजबूत करना है।

पर्यावरण11 अग. 2026 IST
भूजल का 87 प्रतिशत सिंचाई में खर्च, 9 राज्यों में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दोहन

भूजल का 87 प्रतिशत सिंचाई में खर्च, 9 राज्यों में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दोहन

भारत में भूजल पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में देश से 247.22 अरब घन मीटर भूजल निकाला गया, जिसमें करीब 87 प्रतिशत हिस्सा सिंचाई में इस्तेमाल हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर भूजल दोहन की अवस्था 60.63 प्रतिशत रही, लेकिन पंजाब, राजस्थान, हरियाणा समेत 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। देश के 281 जिलों में भी भूजल दोहन औसत से ज्यादा दर्ज किया गया। भूजल की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता भी चिंता का विषय है। सरकार जलभृत मानचित्रण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, अमृत सरोवर, जल जीवन मिशन और सूक्ष्म सिंचाई जैसी पहलों के जरिए जल सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

पर्यावरण11 अग. 2026 IST
World Lion Day: भारत में एशियाई शेरों की दहाड़ मजबूत, 10 साल में आबादी बढ़ी

World Lion Day: भारत में एशियाई शेरों की दहाड़ मजबूत, 10 साल में आबादी बढ़ी

विश्व शेर दिवस 2026 पर भारत के लिए बड़ी conservation success सामने आई है। एशियाई शेरों की आबादी 2015 में 523 से बढ़कर 2025 में 891 हो गई है। सरकार के अनुसार Project Lion के तहत habitat protection, disease monitoring, veterinary support, scientific tracking और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। शेरों का habitat range भी 2020 के करीब 30,000 वर्ग किमी से बढ़कर लगभग 35,000 वर्ग किमी हो गया है।

पर्यावरण11 अग. 2026 IST
नदी जोड़ो परियोजना पर बड़ा अपडेट, Ken-Betwa से बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल का लाभ

नदी जोड़ो परियोजना पर बड़ा अपडेट, Ken-Betwa से बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल का लाभ

केंद्र सरकार के National Perspective Plan के तहत 30 नदी जोड़ो परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें Ken-Betwa Link Project सबसे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना से लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल तथा 103 MW जलविद्युत और 27 MW सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। बुंदेलखंड में पानी की उपलब्धता और कृषि को मजबूत करने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्यावरण11 अग. 2026 IST
यूपी सरकार का बड़ा कदम, ऐतिहासिक हुलासखेड़ा को विकसित करने के लिए करोडो रुपये का एलान

यूपी सरकार का बड़ा कदम, ऐतिहासिक हुलासखेड़ा को विकसित करने के लिए करोडो रुपये का एलान

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के मोहनलालगंज स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व वाले हुलासखेड़ा के पर्यटन विकास के लिए 11.99 करोड़ रुपये की परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी दी है। परियोजना के पहले चरण में 6 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विकास कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की अनुमति, ई-टेंडरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा किए जाएंगे। इस पहल से क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पर्यावरण07 अग. 2026 IST
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए AI, ड्रोन और डिजिटल पोर्टल का होगा इस्तेमाल

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए AI, ड्रोन और डिजिटल पोर्टल का होगा इस्तेमाल

देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और इंसानों व वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार ने तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक प्रबंधन पर आधारित राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की बैठक हुई, जिसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई।

पर्यावरण06 अग. 2026 IST
दूध उत्पादन में यूपी नंबर-1, अब कॉन्क्लेव-2026 से डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई दिशा

दूध उत्पादन में यूपी नंबर-1, अब कॉन्क्लेव-2026 से डेयरी सेक्टर को मिलेगी नई दिशा

उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास विभाग अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2026 में 'कॉन्क्लेव-2026' आयोजित करेगा। देश के कुल लगभग 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध उत्पादन में 38.8 मिलियन मीट्रिक टन योगदान के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इस आयोजन का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, किसानों की आय, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक डेयरी अवसंरचना को बढ़ावा देना है।

पर्यावरण06 अग. 2026 IST
धरती का सबसे बड़ा युद्ध: जलवायु संकट पर दुनिया कब जागेगी?

धरती का सबसे बड़ा युद्ध: जलवायु संकट पर दुनिया कब जागेगी?

रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों के बीच दुनिया एक ऐसे संकट को नजरअंदाज कर रही है जो पूरी मानव सभ्यता को प्रभावित कर सकता है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण अब केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता का भी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र और वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर गहरा होगा।

पर्यावरण06 अग. 2026 IST
सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को दी नई रफ्तार, 36 हजार से अधिक नई डेयरी समितियां और 21 हजार रोजगार के अवसर

सरकार ने डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को दी नई रफ्तार, 36 हजार से अधिक नई डेयरी समितियां और 21 हजार रोजगार के अवसर

केंद्र सरकार ने डेयरी विकास, पशुधन अवसंरचना, नस्ल सुधार और पशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत 36,611 नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जबकि 168 लाख लीटर प्रतिदिन की दूध शीतकरण क्षमता विकसित की गई है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान, आधुनिक IVF लैब और नस्ल सुधार कार्यक्रमों से करोड़ों किसानों को लाभ मिला है। वहीं राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 4,291 परियोजनाओं को मंजूरी देकर लगभग 21 हजार प्रत्यक्ष रोजगार और 91 हजार किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार ने पशु रोग नियंत्रण और राष्ट्रीय स्तर पर आपदा तैयारी को भी मजबूत किया है, जिससे डेयरी क्षेत्र अधिक सुरक्षित, आधुनिक और लाभकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

पर्यावरण04 अग. 2026 IST
ग्रामीण स्वच्छता को नई रफ्तार, सरकार ने राज्यसभा में पेश किए SBM-G Phase II के आंकड़े

ग्रामीण स्वच्छता को नई रफ्तार, सरकार ने राज्यसभा में पेश किए SBM-G Phase II के आंकड़े

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के तहत पिछले पांच वर्षों में देशभर में 1.47 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए हैं। योजना के अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। सरकार का कहना है कि मिशन का उद्देश्य केवल शौचालय बनाना नहीं, बल्कि गांवों को ODF Plus बनाते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सबसे अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है।

पर्यावरण04 अग. 2026 IST
वधावन पोर्ट बनेगा भारत का नया ट्रेड हब, 298 MMTPA क्षमता से बढ़ेगा EXIM व्यापार

वधावन पोर्ट बनेगा भारत का नया ट्रेड हब, 298 MMTPA क्षमता से बढ़ेगा EXIM व्यापार

महाराष्ट्र के पालघर जिले में विकसित किया जा रहा वधावन पोर्ट भारत की सबसे बड़ी समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं में से एक बनने जा रहा है। 76,220 करोड़ रुपये की लागत वाली इस ग्रीनफील्ड डीप-ड्राफ्ट परियोजना की वार्षिक कार्गो क्षमता 298 मिलियन मीट्रिक टन होगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत के निर्यात-आयात व्यापार को गति मिलेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता घटेगी और महाराष्ट्र सहित पूरे देश में रोजगार एवं औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण04 अग. 2026 IST
उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ नियंत्रण को मिलेगी नई मजबूती, केंद्र ने बाढ़ प्रबंधन पर बढ़ाए प्रयास

उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ नियंत्रण को मिलेगी नई मजबूती, केंद्र ने बाढ़ प्रबंधन पर बढ़ाए प्रयास

केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ और नदी कटाव की समस्या से निपटने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP) के तहत मार्च 2026 तक 263 परियोजनाओं के लिए 2,536.96 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई है। केंद्रीय जल आयोग 360 बाढ़ पूर्वानुमान केंद्रों के माध्यम से 24 घंटे पहले चेतावनी जारी कर रहा है, जबकि नई प्रणाली के जरिए 7 दिन पहले तक बाढ़ की एडवाइजरी भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने फ्लड प्लेन जोनिंग, आधुनिक तकनीक, पड़ोसी देशों के साथ डेटा साझा करने और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के 52 मास्टर प्लान के जरिए उत्तर-पूर्व में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं।

पर्यावरण03 अग. 2026 IST
जल संरक्षण में तकनीक का बड़ा इस्तेमाल, भूजल बचाने के लिए सरकार का डिजिटल मिशन तेज

जल संरक्षण में तकनीक का बड़ा इस्तेमाल, भूजल बचाने के लिए सरकार का डिजिटल मिशन तेज

देश में बढ़ते जल संकट और गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक आधारित जल प्रबंधन प्रणाली को तेजी से मजबूत कर रही है। राज्यसभा में जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि अटल भूजल योजना के तहत सात राज्यों की 8,203 ग्राम पंचायतों में समुदाय आधारित भूजल संरक्षण मॉडल लागू किया गया, जिसके अनुभव अब अन्य राज्यों में भी अपनाए जाएंगे। सरकार ने देशभर में 24.2 लाख से अधिक जल निकायों को जियो-टैग किया है और 1.55 करोड़ से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कराया है। इसके अलावा रियल-टाइम भूजल मॉनिटरिंग, GIS मैपिंग, वेब आधारित प्लेटफॉर्म, फ्लड वॉच इंडिया ऐप, डिजिटल डैशबोर्ड और जल सूचना प्रबंधन प्रणाली जैसी तकनीकों के जरिए जल संसाधनों की निगरानी और वैज्ञानिक योजना को मजबूत किया जा रहा है। इन पहलों से जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, बाढ़ पूर्व चेतावनी, पारदर्शिता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पर्यावरण03 अग. 2026 IST
ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से बढ़ेगी हरित अर्थव्यवस्था की रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा अभियान

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम से बढ़ेगी हरित अर्थव्यवस्था की रफ्तार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार का बड़ा अभियान

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और मिशन LiFE के तहत टिकाऊ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया गया एक स्वैच्छिक प्रोत्साहन आधारित कार्यक्रम है। इसके तहत वृक्षारोपण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों के बदले ग्रीन क्रेडिट दिए जाते हैं। ग्रीन क्रेडिट नियम, 2023 के तहत संचालित इस योजना में कम से कम पांच वर्ष तक सफल पुनर्स्थापन कार्य और 40 प्रतिशत कैनोपी घनत्व प्राप्त होने के बाद ही ग्रीन क्रेडिट जारी किए जाते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य हरित आवरण बढ़ाना, कार्बन अवशोषण में वृद्धि करना, जैव विविधता का संरक्षण, स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाना और भारत के जलवायु एवं सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत करना है।

पर्यावरण03 अग. 2026 IST
वन संरक्षण में जनभागीदारी पर सरकार का बड़ा जोर, जंगल बचाने के लिए कई योजनाओं और समुदाय आधारित मॉडल को मिल रही मजबूती

वन संरक्षण में जनभागीदारी पर सरकार का बड़ा जोर, जंगल बचाने के लिए कई योजनाओं और समुदाय आधारित मॉडल को मिल रही मजबूती

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि वन संरक्षण और सतत वन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs), इको-डेवलपमेंट समितियों (EDCs) और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के माध्यम से ग्राम सभाओं को वन संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। सरकार Green India Mission, CAMPA, नगर वन योजना और MISHTI जैसी योजनाओं के जरिए वन एवं वृक्ष आच्छादन बढ़ाने और क्षतिग्रस्त जंगलों के पुनर्जीवन पर काम कर रही है। ISFR 2023 के अनुसार भारत का वन एवं वृक्ष आच्छादन बढ़कर 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर यानी कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17 प्रतिशत हो गया है। साथ ही वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

पर्यावरण03 अग. 2026 IST
असम समेत 33 राज्यों को मिला जैव विविधता संरक्षण के लिए फंड, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा लाभार्थी

असम समेत 33 राज्यों को मिला जैव विविधता संरक्षण के लिए फंड, उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा लाभार्थी

भारत के जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभों को समान रूप से साझा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने चावल अनुसंधान संस्थानों और चावल उत्पादक राज्यों के बीच 8.22 करोड़ रुपये का वितरण किया है।

पर्यावरण02 अग. 2026 IST
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की क्रांति: ईवी अपनाने से 17 लाख समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की क्रांति: ईवी अपनाने से 17 लाख समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है

भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। परिवहन क्षेत्र से निकलने वाला प्रदूषण देश के बड़े शहरों में जहरीली हवा का प्रमुख कारण बन रहा है।

पर्यावरण02 अग. 2026 IST
निर्माण और विध्वंस कचरे का संकट: भारत को प्रभावी रीसाइक्लिंग व्यवस्था की जरूरत

निर्माण और विध्वंस कचरे का संकट: भारत को प्रभावी रीसाइक्लिंग व्यवस्था की जरूरत

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, शहरीकरण और रियल एस्टेट क्षेत्र की तेज रफ्तार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। नए एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, आवासीय परियोजनाएं, औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के विस्तार के साथ निर्माण गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन इस विकास के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आई है—निर्माण एवं विध्वंस कचरा यानी Construction and Demolition (C&D) Waste।

पर्यावरण02 अग. 2026 IST
SBSTTA-28 में जैव विविधता संरक्षण पर वैश्विक मंथन, COP17 से पहले सहमति और चुनौतियों के बीच खत्म हुई नैरोबी बैठक

SBSTTA-28 में जैव विविधता संरक्षण पर वैश्विक मंथन, COP17 से पहले सहमति और चुनौतियों के बीच खत्म हुई नैरोबी बैठक

जैव विविधता संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक, तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करने वाली संयुक्त राष्ट्र समर्थित महत्वपूर्ण बैठक SBSTTA-28 (Subsidiary Body on Scientific, Technical and Technological Advice) का समापन केन्या की राजधानी नैरोबी में हुआ। बैठक में दुनिया भर के देशों ने जैव विविधता संकट से निपटने, वैज्ञानिक जानकारी को मजबूत करने और वैश्विक संरक्षण लक्ष्यों को लागू करने के तरीकों पर चर्चा की।

पर्यावरण02 अग. 2026 IST
मुंडक्कई-चूरलमाला त्रासदी के दो साल बाद: वायनाड और केरल फिर एक निर्णायक मोड़ पर

मुंडक्कई-चूरलमाला त्रासदी के दो साल बाद: वायनाड और केरल फिर एक निर्णायक मोड़ पर

केरल के वायनाड जिले में मुंडक्कई और चूरलमाला में आई विनाशकारी भूस्खलन त्रासदी को दो साल पूरे हो चुके हैं। 30 जुलाई 2024 की वह रात राज्य के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में शामिल हो गई, जब भारी बारिश के बाद हुए बड़े पैमाने के भूस्खलन ने पूरे गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था।

पर्यावरण02 अग. 2026 IST
पर्यावरण से समझौता नहीं! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बिना मंजूरी शुरू नहीं होंगी विकास परियोजनाएं

पर्यावरण से समझौता नहीं! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बिना मंजूरी शुरू नहीं होंगी विकास परियोजनाएं

देशभर की सड़क, रेलवे, खनन और औद्योगिक परियोजनाओं पर असर डालने वाले ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पर्यावरणीय मंजूरी के बिना कोई भी विकास परियोजना शुरू नहीं की जा सकती। अदालत ने केंद्र सरकार के 2021 के ऑफिस मेमोरेंडम को रद्द करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा।

पर्यावरण30 जुल. 2026 IST
भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार चिंताजनक, 54 में सामान्य से 80% या उससे कम स्टोरेज; दक्षिण भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार चिंताजनक, 54 में सामान्य से 80% या उससे कम स्टोरेज; दक्षिण भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण इस मानसून सीजन में चिंता का विषय बना हुआ है। 1 जून से 25 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि 54 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य भंडारण के 80 प्रतिशत या उससे कम रहा। इनमें 22 जलाशयों में सामान्य के मुकाबले आधा या उससे भी कम पानी है। दक्षिण भारत के कई जलाशयों की स्थिति विशेष रूप से कमजोर है। कम जल भंडारण का असर सिंचाई, खरीफ और रबी फसलों, पेयजल आपूर्ति तथा जलविद्युत उत्पादन पर पड़ सकता है। हालांकि मानसून अभी जारी है और अच्छी बारिश से स्थिति सुधर सकती है, लेकिन यह आंकड़े जल संरक्षण, बेहतर जलाशय प्रबंधन, वर्षा जल संचयन और कुशल सिंचाई की तत्काल जरूरत को रेखांकित करते हैं।

पर्यावरण29 जुल. 2026 IST
अगले 48 घंटे बेहद अहम: IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी

अगले 48 घंटे बेहद अहम: IMD ने कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी

देश के कई हिस्सों में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों के दौरान कई क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
छत्रपति संभाजीनगर में तेल्या रोग के कहर से परेशान किसान ने 400 अनार के पेड़ों पर चलाया जेसीबी

छत्रपति संभाजीनगर में तेल्या रोग के कहर से परेशान किसान ने 400 अनार के पेड़ों पर चलाया जेसीबी

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठन तालुका स्थित गेवराई मर्दा गांव में भारी आर्थिक नुकसान और भयंकर 'तेल्या' (जीवाणुजन्य करपा) बीमारी के प्रकोप के कारण बेबस होकर किसान ज्ञानदेव सांगले ने अपने 400 अनार के फलदार पेड़ों पर जेसीबी मशीन चलाकर पूरी बाग उखाड़ दी।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
हिमालयी झील को बचाने की अनोखी पहल, त्सोमगो में पर्यटन शुल्क से हो रहा पर्यावरण संरक्षण

हिमालयी झील को बचाने की अनोखी पहल, त्सोमगो में पर्यटन शुल्क से हो रहा पर्यावरण संरक्षण

सिक्किम की प्रसिद्ध त्सोमगो झील बढ़ते पर्यटन और कचरे के दबाव के बावजूद सामुदायिक संरक्षण की एक प्रभावी मिसाल पेश कर रही है। स्थानीय समुदाय, प्रशासन और संरक्षण समितियां मिलकर कचरा संग्रहण, छंटाई, सफाई और पर्यावरण जागरूकता पर काम कर रही हैं। पर्यटकों से मिलने वाले संरक्षण शुल्क का उपयोग भी झील की सफाई और संरक्षण गतिविधियों में किया जाता है। हालांकि, बढ़ता पर्यटन और जलवायु परिवर्तन भविष्य में बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं, इसलिए जिम्मेदार पर्यटन, बेहतर कचरा प्रबंधन और वैज्ञानिक निगरानी के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
महाराष्ट्र में मानसून हुआ उग्र, मुंबई-ठाणे समेत पूरे राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी

महाराष्ट्र में मानसून हुआ उग्र, मुंबई-ठाणे समेत पूरे राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी

अरब सागर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और राजस्थान से बनी शीयर ज़ोन प्रणाली के चलते इस पूरे सप्ताह महाराष्ट्र में आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहेगा।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
शाहपुर में बादल फटने से बारिश का कहर, झरने में बहे पर्यटक; एक की मौत, एक लापता

शाहपुर में बादल फटने से बारिश का कहर, झरने में बहे पर्यटक; एक की मौत, एक लापता

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के शाहपुर तालुका में रविवार को बादल फटने जैसी भारी बारिश के कारण चोंढे झरने में अचानक आई बाढ़ ने बड़ा हादसा कर दिया। कल्याण से घूमने आए पांच पर्यटक तेज बहाव में बह गए। इनमें से तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक युवक की मौत हो गई और एक अन्य अब भी लापता है। प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार राहत एवं खोज अभियान चला रहे हैं। लोगों से मानसून के दौरान झरनों और नदी-नालों से दूर रहने की अपील की गई है।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
Mining Water Crisis: दुनिया की 65.7% खनन इकाइयां जल जोखिम की चपेट में, भारत भी प्रभावित

Mining Water Crisis: दुनिया की 65.7% खनन इकाइयां जल जोखिम की चपेट में, भारत भी प्रभावित

दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इन खनिजों के उत्पादन से जुड़ा खनन उद्योग खुद गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब 65.7 प्रतिशत खनन और धातु उत्पादन सुविधाएं कम से कम एक महत्वपूर्ण जल जोखिम के संपर्क में हैं। 12,000 से अधिक खनन सुविधाओं के अध्ययन में जल तनाव, सूखा, बाढ़ और पानी की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव को प्रमुख खतरे के रूप में सामने रखा गया है। रिपोर्ट में मध्य भारत को भी ऐसे क्षेत्रों में शामिल किया गया है जहां खनन गतिविधियां कई तरह के जल जोखिमों का सामना कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को नजरअंदाज किया गया तो इसका असर न केवल खनन उद्योग बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
भारत के जंगलों सिर्फ पेड़ों की संख्या नहीं, इंसान और प्रकृति के बदलते रिश्ते की भी कहानी

भारत के जंगलों सिर्फ पेड़ों की संख्या नहीं, इंसान और प्रकृति के बदलते रिश्ते की भी कहानी

भारत के जंगलों की कहानी केवल वन क्षेत्र बढ़ने या घटने के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, मानव समाज, आदिवासी समुदायों, आर्थिक विकास और बदलती पर्यावरणीय नीतियों के बीच लंबे रिश्ते को दर्शाती है। देश में वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि के सकारात्मक संकेत जरूर हैं, लेकिन प्राकृतिक जंगलों की गुणवत्ता, जैव विविधता, वन्यजीवों के आवास, जल सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को भी समान महत्व देना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन के दौर में भारत के लिए ऐसी वन नीति की जरूरत है जो संरक्षण, विकास और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाए और केवल पेड़ लगाने के बजाय स्वस्थ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राथमिकता दे।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन का कहर, 13 लोगों की मौत; अब आपदा प्रबंधन पर नजर

हिमाचल में भारी बारिश और भूस्खलन का कहर, 13 लोगों की मौत; अब आपदा प्रबंधन पर नजर

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन ने एक बार फिर राज्य में बढ़ते आपदा जोखिम को उजागर किया है। लाहौल-स्पीति के उदयपुर क्षेत्र में कधु नाला के पास पहाड़ी से गिरे मलबे और चट्टानों की चपेट में आने से 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हुए। यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब हिमाचल में भारी बारिश के कारण सड़कें बंद होने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से जुड़े मौसम के बदलते पैटर्न, कम समय में अत्यधिक बारिश, पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता और संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ता निर्माण आपदा के जोखिम को और गंभीर बना सकते हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने हिमाचल के विकास मॉडल, सड़क निर्माण और पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की योजना पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब जरूरत केवल आपदा के बाद राहत और पुनर्निर्माण की नहीं, बल्कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान, मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित सड़क निर्माण और जलवायु-संवेदनशील विकास नीति अपनाने की है।

पर्यावरण27 जुल. 2026 IST
हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag रीसाइक्लिंग को बना रहा आसान, घर से उठ रहा सूखा कचरा

हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag रीसाइक्लिंग को बना रहा आसान, घर से उठ रहा सूखा कचरा

हैदराबाद का स्टार्टअप Goodeebag लोगों को घर से सूखा कचरा उठाने और उसे रीसाइक्लिंग तक पहुंचाने की सुविधा दे रहा है। ऐप के जरिए पिकअप बुक करने पर उपयोगकर्ताओं को रिवॉर्ड पॉइंट भी मिलते हैं। यह मॉडल स्रोत पर कचरा अलग करने को बढ़ावा देकर लैंडफिल पर दबाव कम करने, रीसाइक्लिंग बढ़ाने और लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
हिमाचल में चट्टान गिरने से गंभीर हादसा

हिमाचल में चट्टान गिरने से गंभीर हादसा

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां पहाड़ से गिरे बड़े बोल्डरों ने एक टैक्सी को कुचल दिया। इस घटना में कम से कम 13 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। हादसा खराब मौसम और भूस्खलन के कारण हुआ, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। प्रशासन और बचाव दल मौके पर राहत कार्य में जुटे हैं, जबकि मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि अभी बाकी है।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
मौसम की मार से कृषि क्षेत्र बेहाल, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर बढ़ा खतरा

मौसम की मार से कृषि क्षेत्र बेहाल, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर बढ़ा खतरा

भारत में बाढ़, अत्यधिक बारिश, सूखा, चक्रवात और गर्मी जैसी हाइड्रो-मौसम विज्ञान संबंधी आपदाओं का कृषि क्षेत्र पर असर लगातार बढ़ रहा है। संसद में सामने आए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग वर्षों में लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि ऐसी आपदाओं से प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। बदलते जलवायु पैटर्न के बीच भारत को अब केवल आपदा के बाद मुआवजा देने के बजाय पहले से तैयारी पर जोर देना होगा। बेहतर मौसम पूर्वानुमान, शुरुआती चेतावनी, जलवायु-सहिष्णु फसलें, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, मजबूत फसल बीमा और तकनीक आधारित नुकसान आकलन किसानों को भविष्य के मौसमीय जोखिमों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद अब क्या? इथेनॉल के लिए स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स मजबूत करने की जरूरत

E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद अब क्या? इथेनॉल के लिए स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स मजबूत करने की जरूरत

भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 का लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन अब इथेनॉल मिशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादन बढ़ाने के बजाय मजबूत सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की है। डिस्टिलरी से तेल कंपनियों के डिपो और पेट्रोल पंप तक इथेनॉल पहुंचाने के लिए पर्याप्त स्टोरेज, परिवहन, ब्लेंडिंग सुविधाओं और गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत होगी। साथ ही गन्ने के साथ मक्का जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक को बढ़ावा देने, किसानों के लिए स्थिर बाजार सुनिश्चित करने और जल सुरक्षा व खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की भी आवश्यकता है। मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर नीति के साथ इथेनॉल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा बचत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
BMC के HMIS पर खर्च हुए 100 करोड़, अब नए सॉफ्टवेयर से अस्पतालों को डिजिटल बनाने की तैयारी।

BMC के HMIS पर खर्च हुए 100 करोड़, अब नए सॉफ्टवेयर से अस्पतालों को डिजिटल बनाने की तैयारी।

मुंबई: BMC के अस्पतालों में हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब नौ वर्षों में इस सिस्टम पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद अब इसे नए सिरे से लागू करने की कोशिश की जा रही है। HMIS का उद्देश्य मरीजों के रिकॉर्ड, अपॉइंटमेंट, जांच रिपोर्ट, बेड प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन को डिजिटल और एकीकृत बनाना है। यदि नया सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो मरीजों को तेज सेवाएं, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड और बेहतर बेड उपलब्धता जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। साथ ही BMC अस्पतालों में संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन भी अधिक कुशल हो सकता है। हालांकि, नई व्यवस्था की सफलता के लिए पुराने सिस्टम की कमियों की समीक्षा, डेटा सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होगी।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
गन्ने की खेती ने पकड़ी रफ्तार, पर सूखा और घटता भूजल बना बड़ा खतरा

गन्ने की खेती ने पकड़ी रफ्तार, पर सूखा और घटता भूजल बना बड़ा खतरा

महाराष्ट्र और कर्नाटक के अर्ध-शुष्क इलाकों में पिछले दो दशकों के दौरान गन्ने की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बेहतर सिंचाई, उन्नत किस्मों और कृषि तकनीकों ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, सूखा, बढ़ता तापमान और भूजल पर दबाव इस प्रगति की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में गन्ने की खेती की सफलता केवल अधिक उत्पादन से नहीं, बल्कि कम पानी में बेहतर उपज, ड्रिप सिंचाई, जल संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से तय होगी। महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए स्थानीय जल उपलब्धता के आधार पर फसल योजना और जल प्रबंधन को प्राथमिकता देना जरूरी है।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
अगले 48 घंटे भारी! IMD ने कई राज्यों के लिए जारी की बारिश की चेतावनी

अगले 48 घंटे भारी! IMD ने कई राज्यों के लिए जारी की बारिश की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों में अगले 24–48 घंटों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के लिए रेड एवं ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

पर्यावरण24 जुल. 2026 IST
वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है बच्चों में मस्तिष्क कैंसर का खतरा, क्या कहती है नई रिसर्च!

वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है बच्चों में मस्तिष्क कैंसर का खतरा, क्या कहती है नई रिसर्च!

महानगरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार डीजल, पेट्रोल और कोयले के धुएं से निकलने वाले पीएम2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) जैसे प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से बच्चों में मस्तिष्क कैंसर सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक यह संबंध पूरी तरह निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन उपलब्ध शोध सतर्क रहने की आवश्यकता बताते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ हवा, प्रदूषण नियंत्रण और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नीतियां भविष्य में गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

पर्यावरण23 जुल. 2026 IST
भूजल, नदियां और तालाबो की सुरक्षा पर NGT सख्त, जारी किये कई अहम् दिशा-निर्देश ।

भूजल, नदियां और तालाबो की सुरक्षा पर NGT सख्त, जारी किये कई अहम् दिशा-निर्देश ।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े तीन अहम मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली में अनियंत्रित भूजल दोहन पर एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और बिना निगरानी भूजल निकाल रहे होटल व गेस्ट हाउसों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आदेश दिया। वहीं मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी में हजारों लीटर दूध अर्पित किए जाने के मामले में न्यायाधिकरण ने धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए बड़े आयोजनों में प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए। इसके अलावा अशोकनगर के तालाब में सीवेज प्रदूषण और अतिक्रमण के मामले में अतिक्रमण हटाने, सीवेज प्रबंधन और जलाशय संरक्षण के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। एनजीटी के इन आदेशों से स्पष्ट संदेश है कि जल संसाधनों का संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संपत्तियों की सुरक्षा सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।

पर्यावरण23 जुल. 2026 IST
ई-रिक्शा बदल रहे हैं भारत की सवारी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिला नया इंजन।

ई-रिक्शा बदल रहे हैं भारत की सवारी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मिला नया इंजन।

डाउन टू अर्थ के विश्लेषण के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की सबसे तेज वृद्धि ई-रिक्शा क्षेत्र में हो रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और कई अन्य राज्यों में ई-रिक्शा अंतिम मील कनेक्टिविटी, रोजगार और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि चार्जिंग अवसंरचना, बैटरी प्रबंधन और सुरक्षा मानकों जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा भारत की स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं।

पर्यावरण22 जुल. 2026 IST
क्या कचरा जलाने से खत्म होगा भारत का वेस्ट संकट? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

क्या कचरा जलाने से खत्म होगा भारत का वेस्ट संकट? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

भारत में बढ़ते कचरा संकट के बीच वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों को समाधान के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कचरे के पृथक्करण के उसे जलाना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। उनका मानना है कि भारत को पहले स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और कम्पोस्टिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए और केवल अवशिष्ट कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना चाहिए। यही मॉडल पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के लिए सबसे प्रभावी माना जा रहा है।

पर्यावरण22 जुल. 2026 IST
जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई, 'चिता आंदोलन' पर प्रशासन की कार्रवाई।

जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई, 'चिता आंदोलन' पर प्रशासन की कार्रवाई।

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे 'चिता आंदोलन' को पुलिस और प्रशासन ने समाप्त करा दिया। प्रदर्शनकारी उचित मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर विरोध कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि उन्हें सुरक्षा कारणों से हटाया गया। यह विवाद देश की सबसे बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं में विकास और विस्थापन के बीच संतुलन की चुनौती को एक बार फिर सामने लाता है।

पर्यावरण22 जुल. 2026 IST
बीएमसी का दावा या छलावा: कागजों पर सुधरी सड़कें, जमीन पर गड्ढों का राज।

बीएमसी का दावा या छलावा: कागजों पर सुधरी सड़कें, जमीन पर गड्ढों का राज।

मुंबई में मानसून के दौरान सड़कों की बदहाली और गड्ढों की समस्या फिर से गंभीर रूप में सामने आई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने शहर की 2050 किलोमीटर लंबी सड़कों में से 1700 किलोमीटर सड़कों का कॉंक्रीटीकरण पूरा करने का दावा किया है और शेष कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि नवभारत टाइम्स की धरातली पड़ताल में कुर्ला ईस्ट, एलबीएस रोड, सीएसएमटी और फोर्ट जैसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सड़कों पर भारी गड्ढे दिखे। बीएमसी के पॉटहोल फिक्स पोर्टल के अनुसार 3,114 गड्ढों की शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 3,018 गड्ढों को भरने का दावा बीएमसी ने किया है। गड्ढों की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

पर्यावरण21 जुल. 2026 IST
मानसून के बावजूद नहीं भर पाए देश के बांध: खरीफ सीजन के बीच जलाशयों में पानी पिछले साल से कम, खेती और पेयजल पर बढ़ा संकट।

मानसून के बावजूद नहीं भर पाए देश के बांध: खरीफ सीजन के बीच जलाशयों में पानी पिछले साल से कम, खेती और पेयजल पर बढ़ा संकट।

केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 16 जुलाई 2026 तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण कुल क्षमता का केवल 34.46 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, बिहार और कर्नाटक सहित कई राज्यों में जलाशयों का स्तर सामान्य से नीचे है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल भंडारण में जल्द सुधार नहीं हुआ तो खरीफ फसलों, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर असर पड़ सकता है। यह रिपोर्ट देश में जल संरक्षण और वैज्ञानिक जल प्रबंधन की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करती है।

पर्यावरण20 जुल. 2026 IST
दिल्ली: परिवेश भवन में बनेगी सीपीसीबी की आधुनिक इमारत, सुरक्षा और तकनीकी पात्रता के नए नियम लागू।

दिल्ली: परिवेश भवन में बनेगी सीपीसीबी की आधुनिक इमारत, सुरक्षा और तकनीकी पात्रता के नए नियम लागू।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिल्ली स्थित परिवेश भवन परिसर में नई बहुमंजिला इमारत के निर्माण हेतु पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एक महत्वपूर्ण शुद्धिपत्र (Corrigendum) जारी किया गया है। इस संशोधन के जरिए निर्माण कार्य की तकनीकी पात्रता और अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) मानकों को अपग्रेड किया गया है।

पर्यावरण20 जुल. 2026 IST
रीसाइक्लिंग लक्ष्य पूरा नहीं तो भारी जुर्माना: कंपनियों पर ₹7,900 प्रति टन तक पेनल्टी।

रीसाइक्लिंग लक्ष्य पूरा नहीं तो भारी जुर्माना: कंपनियों पर ₹7,900 प्रति टन तक पेनल्टी।

भारत सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और EPR (Extended Producer Responsibility) नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। रीसाइक्लिंग लक्ष्य पूरा न करने वाली कंपनियों पर ₹2,900 से ₹7,900 प्रति टन तक का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। फर्जी EPR सर्टिफिकेट खरीदने, रजिस्ट्रेशन न कराने और समय पर रिटर्न फाइल न करने वाली कंपनियों पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। साथ ही, 2026 से प्लास्टिक की अलग-अलग श्रेणियों के लिए रीसाइक्लिंग लक्ष्य बढ़ाए जाएंगे। महाराष्ट्र के डोंबिवली MIDC में केमिकल, पैकेजिंग और टेक्सटाइल यूनिट्स पर विशेष कार्रवाई की जा रही है, जहां कई इकाइयों को नोटिस, सस्पेंशन और बिजली-पानी कटौती जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।

पर्यावरण20 जुल. 2026 IST
काकीनाडा का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट: स्वच्छ ऊर्जा की बड़ी छलांग या हजारों मछुआरों के भविष्य पर संकट?

काकीनाडा का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट: स्वच्छ ऊर्जा की बड़ी छलांग या हजारों मछुआरों के भविष्य पर संकट?

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में शुरू हुई ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया परियोजना भारत की स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन फ्यूल निर्यात रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इस परियोजना से भारत को वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में मजबूत पहचान मिलने, रोजगार सृजन, विदेशी निवेश और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय मछुआरा समुदायों ने आशंका जताई है कि समुद्री जल के विलवणीकरण (डीसैलिनेशन), अत्यधिक खारे पानी (ब्राइन) के संभावित निस्तारण और औद्योगिक गतिविधियों से समुद्री पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है, जिससे मछलियों की संख्या घटने और हजारों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ने का खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षा को सफल बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच संतुलन बनाना बेहद आवश्यक होगा।

पर्यावरण20 जुल. 2026 IST
हरित बदलापुर की दिशा में ऐतिहासिक पहल, पर्यावरण संरक्षण के लिए नगर परिषद ने कृषि विश्वविद्यालय से किया समझौता

हरित बदलापुर की दिशा में ऐतिहासिक पहल, पर्यावरण संरक्षण के लिए नगर परिषद ने कृषि विश्वविद्यालय से किया समझौता

बदलापुर को पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगर परिषद ने डॉ. बाळासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ के साथ सामंजस्य करार (MoU) किया है। इस समझौते के तहत शहर के वैज्ञानिक हरित विकास, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए आगामी दस वर्षों का व्यापक विकास खाका तैयार किया जाएगा।

पर्यावरण20 जुल. 2026 IST
तेलंगाना में अल नीनो का कहर: 40% कम बारिश से फसलों पर संकट, रेवंत सरकार ने केंद्र से मांगी विशेष सहायता।

तेलंगाना में अल नीनो का कहर: 40% कम बारिश से फसलों पर संकट, रेवंत सरकार ने केंद्र से मांगी विशेष सहायता।

अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण तेलंगाना में इस साल (2026) मानसून के दौरान 40% कम बारिश दर्ज की गई है। इस गंभीर सूखे जैसी स्थिति (Drought-like situation) से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने एक आपातकालीन बैठक की। सरकार ने केंद्र सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता (Central Assistance) की मांग करने और जमीनी नुकसान का आकलन करने के लिए एक विशेष केंद्रीय टीम भेजने का अनुरोध करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने पेयजल, बिजली और कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों के लिए 'वानकलम (शीतकालीन) आकस्मिक कार्य योजना' लागू कर दी है।

पर्यावरण19 जुल. 2026 IST
डोंबिवली से पंढरपुर तक निकली साइकिल वारी, प्रदूषण मुक्त जीवन का दिया संदेश

डोंबिवली से पंढरपुर तक निकली साइकिल वारी, प्रदूषण मुक्त जीवन का दिया संदेश

आषाढ़ी वारी के अवसर पर डोंबिवली के 'एक्स्ट्रीम सायकलप्रेमी' समूह के 31 साइकिल चालकों ने डोंबिवली से पंढरपुर तक की साइकिल वारी सफलतापूर्वक पूरी की। 11 वर्ष के बच्चे से लेकर 68 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक तक इस अभियान में शामिल हुए। लगभग 10 दिनों तक चले इस सफर के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण मुक्त जीवनशैली, ईंधन बचत और साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।

पर्यावरण19 जुल. 2026 IST
चेंबूर हादसे से हिला प्रशासन: अब 29 लाख पेड़ों का होगा डिजिटल एक्स-रे

चेंबूर हादसे से हिला प्रशासन: अब 29 लाख पेड़ों का होगा डिजिटल एक्स-रे

मुंबई महानगरपालिका ने शहर में लगातार हो रही पेड़ गिरने की दुखद घटनाओं और मासूमों की जान जाने के बाद एक बड़ा और सुधारात्मक कदम उठाया है। मुंबई में अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकने की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में महानगर के सभी 29 लाख पेड़ों का व्यापक हेल्थ चेकअप यानी स्वास्थ्य परीक्षण कराने का आधिकारिक निर्णय लिया गया है।

पर्यावरण18 जुल. 2026 IST
वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक संपर्क से हो सकता है डिमेंशिया, WHO की नई गाइडलाइंस में बड़ी चेतावनी।

वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक संपर्क से हो सकता है डिमेंशिया, WHO की नई गाइडलाइंस में बड़ी चेतावनी।

नया जोखिम कारक: WHO ने वर्ष 2019 के बाद पहली बार डिमेंशिया रोकथाम गाइडलाइंस में बड़ा संशोधन करते हुए वायु प्रदूषण को मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खतरे के रूप में शामिल किया है। रोकथाम की उम्मीद: रिपोर्ट के अनुसार, यदि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान और वायु प्रदूषण जैसे 14 दैनिक व पर्यावरणीय कारकों को समय रहते नियंत्रित किया जाए, तो डिमेंशिया के 45% मामलों को रोका या टाला जा सकता है। सप्लीमेंट्स पर रोक: बिना किसी डॉक्टरी जांच या शरीर में कमी (Deficiency) के, डिमेंशिया से बचने के लिए ओमेगा-3 या विटामिन सप्लीमेंट्स के नियमित सेवन को WHO ने गैर-जरूरी बताया है।

पर्यावरण17 जुल. 2026 IST
पेड़ों का 'हेल्थ ऑडिट': ठाणे को हादसों से बचाने के लिए विधायक निरंजन डावखरे की बड़ी मांग ।

पेड़ों का 'हेल्थ ऑडिट': ठाणे को हादसों से बचाने के लिए विधायक निरंजन डावखरे की बड़ी मांग ।

ठाणे में भारी बारिश के कारण पेड़ों के गिरने से हो रहे जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए विधायक निरंजन डावखरे ने ठाणे नगर आयुक्त से मुलाकात की। उन्होंने मांग की है कि शहर के सभी पेड़ों की जड़ों, तनों और बीमारी की वैज्ञानिक जांच (हेल्थ ऑडिट) की जाए, विशेषकर भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर। यह प्रक्रिया हर साल मानसून से पहले अपनाई जानी चाहिए ताकि भविष्य की दुर्घटनाओं को टाला जा सके।

पर्यावरण16 जुल. 2026 IST
​उल्हासनगर की प्यास बुझेगी: जल आपूर्ति और शुद्धिकरण के लिए 211 करोड़ की योजनाओं को मिली मंजूरी ।

​उल्हासनगर की प्यास बुझेगी: जल आपूर्ति और शुद्धिकरण के लिए 211 करोड़ की योजनाओं को मिली मंजूरी ।

केंद्र सरकार के अमृत 2.0 अभियान के तहत उल्हासनगर महानगरपालिका की 211 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति और जलशुद्धीकरण परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना से आने वाले समय में उल्हासनगरवासियों को नियमित, शुद्ध और सुचारू जलापूर्ति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कल्याण लोकसभा के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के प्रयासों से इस परियोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी कल्याण जिला प्रमुख गोपाल लांडगे ने दी है।

पर्यावरण16 जुल. 2026 IST
बारिश के बावजूद नहीं थमी प्यास: महाराष्ट्र के 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अब भी टैंकरों पर निर्भर

बारिश के बावजूद नहीं थमी प्यास: महाराष्ट्र के 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अब भी टैंकरों पर निर्भर

महाराष्ट्र में हालिया बारिश के बावजूद 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अब भी टैंकरों के जरिए पेयजल प्राप्त कर रही हैं। राज्य के जलाशयों में पानी बढ़ा है, लेकिन कई क्षेत्रों में जल संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सबसे अधिक टैंकर नासिक संभाग में चलाए जा रहे हैं।

पर्यावरण16 जुल. 2026 IST
चेंबूर बस हादसा: पेड़ गिरने के मामले में बीएमसी की जाँच रिपोर्ट या 'बलि का बकरा' ढूँढने की कवायद?

चेंबूर बस हादसा: पेड़ गिरने के मामले में बीएमसी की जाँच रिपोर्ट या 'बलि का बकरा' ढूँढने की कवायद?

मुंबई | विशेष संवाददाता चेंबूर (पश्चिम) में डायमंड गार्डन के पास स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने की घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह थी। इस मामले में बीएमसी द्वारा गठित जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट तो सौंप दी है, लेकिन यह रिपोर्ट सुरक्षा मानकों से अधिक 'जवाबदेही से बचने' की दिशा में कदम बढ़ाती नजर आ रही है।

पर्यावरण14 जुल. 2026 IST
'एक पेड़ माँ के नाम' से हरित यूपी की ओर, 35 करोड़ पौधों का महाअभियान

'एक पेड़ माँ के नाम' से हरित यूपी की ओर, 35 करोड़ पौधों का महाअभियान

बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने हरित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 'वृक्षारोपण महाअभियान-2026' के तहत 12 जुलाई को पूरे प्रदेश में एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से प्रेरित है और इसका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।

पर्यावरण14 जुल. 2026 IST
मुंबई में बारिश और बीमारियों का दोतरफा वार

मुंबई में बारिश और बीमारियों का दोतरफा वार

मुंबई में मानसून केवल राहत की फुहारें ही नहीं लाता, बल्कि अपने साथ कई चुनौतियां भी लेकर आता है। एक ओर मूसलाधार बारिश से जलभराव, ट्रैफिक जाम और जनजीवन प्रभावित होता है, तो दूसरी ओर मौसमी बीमारियां लोगों की परेशानी बढ़ा देती हैं। इस बार भी शहर में बारिश के साथ वायरल संक्रमण, श्वसन संबंधी बीमारियों और पेट के संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे में मुंबईकरों के सामने बारिश और बीमारियों का दोतरफा संकट खड़ा हो गया है।

पर्यावरण14 जुल. 2026 IST
विकास के बदले पेड़ मुंबई क्यों गिर रहे हैं पेड़ ?

विकास के बदले पेड़ मुंबई क्यों गिर रहे हैं पेड़ ?

चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में अब जांच ने नया मोड़ ले लिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि पेड़ की जड़ों को पहले हुए यूटिलिटी कार्यों के दौरान नुकसान पहुंचा था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा था या फिर निर्माण कार्यों में बरती गई लापरवाही का नतीजा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिस स्थान पर पेड़ खड़ा था, वहां पहले विभिन्न यूटिलिटी कार्यों के लिए खुदाई और कंक्रीटीकरण किया गया था।

पर्यावरण13 जुल. 2026 IST