
नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले के लिए महाराष्ट्र सरकार ने जारी किए ₹1800 करोड़
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राखी के धागे में सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वादा बंधा होता है। भाई-बहन के इसी अटूट रिश्ते के पर्व रक्षाबंधन पर आज देशभर में उत्साह है। इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेशों में सभी ने प्रेम और विश्वास के इस पर्व के साथ महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण का संकल्प लेने का संदेश भी दिया।

इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। पंचांग के अनुसार 28 अगस्त की सुबह भद्रा समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा। दिल्ली के अनुसार राखी बांधने का प्रमुख शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक है। इस दिन आयुष्मान योग के बाद सौभाग्य योग का संयोग भी बन रहा है।

बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन पुलिस ने लग्जरी कार चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी आधुनिक उपकरणों की मदद से महंगी कारों की डुप्लीकेट चाबी तैयार कर उन्हें चोरी करते थे और बाद में राजस्थान में अपने संपर्कों के जरिए बेच देते थे। पुलिस ने करीब ₹35 लाख की टोयोटा फॉर्च्यूनर बरामद की है। जांच में आरोपियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कुल 21 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को देशभर में नागपंचमी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नाग देवता की पूजा, भगवान शिव के साथ नागों का धार्मिक संबंध, श्रीकृष्ण और कालियानाग की कथा तथा महाराष्ट्र की विभिन्न लोकपरंपराओं के कारण इस पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागपंचमी का संबंध खेती और प्रकृति से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, आधुनिक समय में इस पर्व को मनाते हुए नागों को नुकसान न पहुंचाना, वन्यजीवों की रक्षा करना और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले आगामी कुंभमेले को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस कुंभमेले को ‘महासिंहस्थ’ के नाम से नई पहचान देने की तैयारी चल रही है। केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से करीब 34 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाने की योजना है। इसमें सड़क, हाईवे, रेलवे, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

श्रावण मास का नाम आते ही भक्ति, श्रद्धा और व्रत-वैकल्य का समय सामने आ जाता है। बारिश से हरा-भरा हुआ प्रकृति का नजारा, मंदिरों में उमड़ती भीड़ और भगवान महादेव की आराधना से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रावण को मन में नई ऊर्जा और आत्मसंयम की भावना पैदा करने वाला महीना माना जाता है। हालांकि बदलते समय के साथ पारंपरिक व्रत-वैकल्य के साथ कुछ आधुनिक व्रतों का भी संकल्प लिया जा सकता है। मोबाइल का कम इस्तेमाल करना, सोशल मीडिया से कुछ समय दूर रहना, टीवी से दूरी बनाना, घर की साफ-सफाई करना, व्यसनों से दूर रहना और परिवार के लिए समय निकालना जैसे छोटे-छोटे संकल्पों के जरिए श्रावण की भक्ति को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ा जा सकता है।

गौरी-गणपति उत्सव के लिए कोकण जाने वाले यात्रियों के लिए इस साल एसटी बस का ग्रुप में सफर महंगा होने की संभावना है। एसटी महामंडल द्वारा ग्रुप बुकिंग से यात्रा करने वाले यात्रियों पर 30 फीसदी अधिभार लगाने के फैसले पर यात्री संगठन ने आपत्ति जताई है। पहले से लागू 13.90 फीसदी स्थायी किराया वृद्धि के बाद अब अतिरिक्त 30 फीसदी अधिभार लगाए जाने से गणेशभक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है। यात्री संगठन ने एसटी महामंडल से इस फैसले पर पुनर्विचार कर राहत देने की मांग की है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम से उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को ‘हर घर तिरंगा बाइक रैली 2026’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई। इस देशभक्ति से भरी रैली में कई केंद्रीय मंत्री, सांसद, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के 350 से अधिक बाइकर्स, 50 से ज्यादा विशेष बाइक समूह और महिला बाइकर्स ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के शब्दों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों के भीतर राष्ट्रभक्ति की ऐसी भावना जगाई, जिसने पूरे देश को आजादी की लड़ाई के लिए एकजुट किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि तिरंगे और ‘वंदे मातरम्’ की भावना को केवल रैली तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने घरों, सड़कों और समाज तक पहुंचाएं।

भारत की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने के लिए इंडियन कल्चर पोर्टल का अपग्रेडेड संस्करण 2.0 मार्च 2026 में शुरू किया गया। इसमें 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन, एआई चैटबॉट ‘भारती’, बेहतर सर्च और फिल्टर, मोबाइल-अनुकूल सुविधा तथा देशभर के सांस्कृतिक संस्थानों के डिजिटल संसाधनों को एक मंच पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

केंद्र सरकार भारत की सांस्कृतिक विरासत, विविधता और रचनात्मक परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के लिए वैश्विक सहभागिता योजना के तहत विभिन्न पहल चला रही है। इस योजना के अंतर्गत 98 देशों के साथ वैध सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम हैं। भारत महोत्सव, कलाकारों को विदेश भेजना, विरासत संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों में भागीदारी इसके प्रमुख हिस्से हैं।

केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्यों को बढ़ावा दे रही है। संस्कृति मंत्रालय के तहत सीसीआरटी द्वारा शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं 10 से 14 वर्ष के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना के तहत आर्थिक सहायता दी जाती है। पिछले पांच वर्षों में देशभर में भारतीय शास्त्रीय नृत्य के लिए 1,274 छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं।
हिंदू पंचांग के आषाढ़ और श्रावण ये दोनों महीने भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं। आषाढ़ का महीना आषाढ़ी एकादशी और पंढरपुर की वारी के लिए प्रसिद्ध है, जबकि श्रावण भगवान शिव की आराधना, विभिन्न व्रत-परंपराओं और त्योहारों के लिए जाना जाता है। खास बात यह है कि इन दोनों महीनों का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि बारिश, खेती, प्रकृति और सामाजिक जीवन से भी जुड़ा हुआ है।

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित अक्कलकोट, श्री स्वामी समर्थ महाराज के पवित्र प्रवास और लंबे समय तक रहे निवास के कारण देश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है। पवित्र वटवृक्ष, समाधि मंदिर, स्वामी समर्थ की पादुकाएं और अन्नछत्र यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वामी समर्थ के दर्शन और आशीर्वाद के लिए अक्कलकोट पहुंचते हैं।

अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वहीं 12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण भी भारत से दिखाई नहीं देगा।

महाराष्ट्र सरकार ने गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार के चयन के लिए नई समिति का पुनर्गठन किया है। संस्कृति कार्य मंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में अनुराधा पौडवाल, उदित नारायण, कुमार सानू, सोनू निगम, सुरेश वाडकर और कमलेश भडकमकर जैसे संगीत जगत के दिग्गजों को शामिल किया गया है। समिति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। श्री चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज द्वारा 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कारसेवा की घोषणा के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। इसी बीच राजस्थान के भरतपुर जिले स्थित बंसी पहाड़पुर से करीब 5 हजार टन गुलाबी पत्थर मंगवाए जाने की खबर सामने आने से पुलिस और खुफिया विभाग सक्रिय हो गए हैं। प्रशासन ने आश्रम पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

सावन के पवित्र महीने में राजधानी लखनऊ आस्था, भक्ति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम बनने जा रही है। राजेंद्र नगर स्थित श्री महाकाल मंदिर में पहली बार उज्जैन की तर्ज पर भव्य भस्म आरती का आयोजन होगा, जबकि बाबा महाकाल की पालकी यात्रा पूरे शहर में शिवभक्ति का संदेश देगी। वहीं, मनकामेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए AI आधारित कैमरों और हाईटेक निगरानी व्यवस्था का इंतजाम किया गया है। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच इस बार सावन में लखनऊ पूरी तरह शिवमय नजर आएगा।

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने दहीहंडी उत्सव (Dahi Handi Festival) 2026 के दौरान मानव पिरामिड (Human Pyramid) बनाने वाले गोविंदा (Govinda) प्रतिभागियों के लिए बीमा सुरक्षा (Insurance Protection) प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत लगभग 1,60,000 गोविंदाओं को दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें मृत्यु, अपंगता और इलाज के खर्च तक का कवरेज शामिल है। इस कदम का उद्देश्य उत्सव के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जोखिम को कम करना है।

सावन की फुहारों के बीच रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और परंपरा के रंग में रंग गई है। प्राचीन रंगमहल मंदिर में करीब 200 वर्ष पुरानी झूलनोत्सव परंपरा पूरे वैभव के साथ जीवंत हो उठी है। भगवान श्रीराम और माता सीता दिव्य झूले पर विराजमान हैं, मंदिर परिसर भजन-कीर्तन से गुंजायमान है और हजारों श्रद्धालु झूला दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। विशेष बात यह है कि इस ऐतिहासिक परंपरा में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन सांस्कृतिक एवं संगीतमय कार्यक्रम, संकीर्तन, रामभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां और पारंपरिक झांकियां भी आयोजित की जा रही हैं। आगामी सावन कृष्ण एकादशी को सजने वाली 'गलबहियां झांकी' को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है, जिसे झूलनोत्सव का सबसे भव्य और आकर्षक आयोजन माना जाता है।

ठाणे जिले के खिडकाली गांव स्थित खिडकालीश्वर महादेव मंदिर जिले के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। काले पत्थरों से निर्मित यह मंदिर हेमाडपंथी स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर पांडवों को दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने यहां मंदिर का निर्माण कराया। महाशिवरात्रि पर काशी, अयोध्या और उत्तराखंड से सैकड़ों साधु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर के देवळोली गांव में स्थित चाबी के आकार की प्राचीन बावड़ी अपनी अनोखी बनावट, ऐतिहासिक महत्व और सालभर पानी से भरे रहने की विशेषता के कारण पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित कर रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिवकालीन यह बावड़ी भीषण सूखे के दौरान भी कभी नहीं सूखती।

महाराष्ट्र के धाराशिव (पूर्व नाम उस्मानाबाद) जिले के तुलजापुर में स्थित श्री तुलजा भवानी मंदिर राज्य के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है और देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। आदिशक्ति तुलजा भवानी को अनेक मराठी परिवारों की कुलदेवी माना जाता है। प्राचीन इतिहास, हेमाड़पंथी स्थापत्य शैली, पौराणिक महत्व और छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों के कारण यह मंदिर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डोंबिवली (पूर्व) के नांदिवली पाड़ा (सागाव) स्थित श्री पीपलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र का एक प्रसिद्ध जागृत देवस्थान माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ विराजमान भगवान शिव सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं। मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2012 में इसे तीर्थक्षेत्र का 'क' दर्जा प्रदान किया।

ठाणे जिले के बदलापुर के समीप मुलगांव की पहाड़ी पर स्थित श्री खंडोबा मंदिर महाराष्ट्र के प्राचीन और अत्यंत श्रद्धेय मंदिरों में से एक माना जाता है। भगवान शिव के मार्तंड भैरव स्वरूप श्री खंडोबा के दर्शन के लिए वर्षभर हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता, शिवकालीन परंपरा, धार्मिक उत्सव और बारवी बांध का मनमोहक दृश्य इस मंदिर को धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित वज्रेश्वरी देवी मंदिर राज्य के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक आस्था, मराठा इतिहास, पौराणिक कथाओं और प्राकृतिक गर्म जलकुंडों के कारण यह मंदिर देश-विदेश में प्रसिद्ध है। चिमाजी अप्पा की वसई विजय से जुड़ा इतिहास, आदिशक्ति वज्रेश्वरी का प्राचीन मंदिर, गणेशपुरी का आध्यात्मिक महत्व, संत परंपरा तथा धरती की गहराइयों से निकलने वाले गर्म जलस्रोत इस स्थान को धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।

कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) जिले में स्थित श्री क्षेत्र गाणगापुर दत्त संप्रदाय के सबसे पवित्र और जागृत तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। भगवान दत्तात्रेय के द्वितीय अवतार माने जाने वाले श्री नृसिंह सरस्वती ने यहां लगभग 23 वर्षों तक निवास कर धर्म, अध्यात्म, सेवा और समाज जागरण का संदेश दिया। श्री गुरुचरित्र में वर्णित इस पवित्र धाम की निर्गुण पादुकाएं, भीमा-अमरजा संगम, अष्टतीर्थ और माधुकरी परंपरा आज भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र हैं।

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के मालवण तालुका में स्थित देवबाग बीच राज्य के सबसे खूबसूरत समुद्र तटों में से एक माना जाता है। अरब सागर और करली नदी का संगम, स्वच्छ सफेद रेत, नीला समुद्र, रोमांचक वॉटर स्पोर्ट्स, डॉल्फिन सफारी और शांत वातावरण के कारण देवबाग देश-विदेश के पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटन स्थल बन चुका है।

सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित कोयना वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले संरक्षित वन क्षेत्रों में से एक है। घने सदाबहार वन, कोयना नदी, शिवसागर जलाशय, दुर्लभ वनस्पतियां, बाघ, तेंदुआ और भारतीय गौर जैसे वन्यजीवों के साथ-साथ पश्चिमी घाट के विश्व प्राकृतिक धरोहर क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण यह अभयारण्य विशेष महत्व रखता है। इतिहास, पर्यावरण, स्थानीय जनजीवन और सह्याद्रि की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए यह अभयारण्य आज महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन एवं पर्यावरणीय स्थलों में गिना जाता है।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी तालुका के मराडेपाडा (पोस्ट – दुगाड) में स्थित श्री छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर राज्य के सबसे अनोखे और प्रेरणादायी मंदिरों में से एक माना जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, हिंदवी स्वराज्य की स्थापना और राष्ट्रभक्ति को समर्पित यह मंदिर इतिहास, संस्कृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। भव्य प्रतिमा, आकर्षक वास्तुकला और प्रेरणादायी वातावरण के कारण राज्यभर से शिवभक्त, इतिहास प्रेमी और पर्यटक बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए आते हैं।
भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा और पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission-GBM) तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्नत तकनीक के माध्यम से पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और संरक्षण किया जा रहा है। अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की पहचान हो चुकी है, जबकि 8 लाख से अधिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है।

गणेशोत्सव में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन महाराष्ट्र में एक बार फिर पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) और शाडू मिट्टी से बनने वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर विवाद गहरा गया है। कल्याण-डोंबिवली समेत राज्य के कई हिस्सों में मूर्तिकारों का कहना है कि पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव के लिए शाडू मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन मिट्टी की बढ़ती कीमत, सीमित उपलब्धता और सरकारी नीति में स्पष्टता की कमी के कारण हजारों कारीगर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञ जल प्रदूषण को रोकने के लिए पीओपी के बजाय शाडू मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग पर जोर दे रहे हैं।

गणेशोत्सव में अब कुछ ही दिन शेष हैं और उल्हासनगर समेत आसपास के क्षेत्रों में मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज़ी से चल रहा है। लेकिन इस वर्ष शाडू मिट्टी की बढ़ी हुई कीमतों ने मूर्तिकारों की चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरण-अनुकूल शाडू मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है, वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं की मांग भी बनी हुई है। ऐसे में बढ़ती लागत और बाजार की प्रतिस्पर्धा, दोनों ही मूर्तिकारों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

लोणावला के पास कार्ला स्थित प्रसिद्ध एकवीरा देवी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) ने मंदिर तक फ्यूनिक्युलर रेलवे बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा है। इस सुविधा के शुरू होने से श्रद्धालु कुछ ही मिनटों में मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के सुधागढ़ तहसील स्थित पाली गांव में विराजमान श्री बल्लालेश्वर गणपति मंदिर अष्टविनायकों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जागृत तीर्थस्थल माना जाता है। भगवान श्री गणेश के आठ स्वयंभू स्वरूपों में से यह एक स्वरूप है। विशेष बात यह है कि अष्टविनायकों में यह एकमात्र मंदिर है, जिसका नाम भगवान के बजाय उनके परम भक्त ‘बल्लाल’ के नाम पर रखा गया है। श्रद्धा, भक्ति, इतिहास, पौराणिक कथाओं और प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम यह मंदिर हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड तालुका में स्थित काशीद बीच राज्य के सबसे खूबसूरत और स्वच्छ समुद्र तटों में से एक माना जाता है। सफेद मुलायम रेत, अरब सागर का नीला पानी, नारियल और सुरू के पेड़ों की कतारें तथा शांत वातावरण इसे देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों, नवविवाहित जोड़ों और वॉटर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए काशीद बीच एक आदर्श पर्यटन स्थल है।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित पन्हाला किला राज्य के सबसे विशाल और ऐतिहासिक किलों में से एक है। सह्याद्री पर्वतमाला में समुद्र तल से लगभग 845 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दुर्ग मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास का साक्षी रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज, सिद्दी जौहर की घेराबंदी, बाजी प्रभु देशपांडे का अद्वितीय बलिदान और पावनखिंड का ऐतिहासिक युद्ध इस किले को भारतीय इतिहास में विशेष स्थान दिलाते हैं।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर से इस वर्ष भी बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाओं का निर्यात अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, यूरोप, दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में किया गया। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, समुद्री परिवहन में आई बाधाएं, कंटेनरों की कमी और बढ़ती शिपिंग लागत जैसी चुनौतियों के बावजूद करीब 1.60 लाख गणेश प्रतिमाएं समय पर विदेश भेजी गईं। मूर्तिकारों और निर्यातकों ने कठिन परिस्थितियों के बीच भी विदेशों में रहने वाले भारतीय श्रद्धालुओं तक बप्पा को समय पर पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत की।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित गणपतिपुले राज्य के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है। अरब सागर के नीले तट पर बसे स्वयंभू श्री गणेश मंदिर, सफेद रेतीले समुद्र तट और मनमोहक प्राकृतिक वातावरण के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था और समुद्री पर्यटन का अनूठा संगम प्रस्तुत करने वाला गणपतिपुले कोंकण क्षेत्र का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है।

महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा का महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन गोपाळकाला उत्सव गुरुवार को पंढरपुर तालुका के गोपाळपुर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रीकृष्ण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, संतों की पालकियों के आगमन और सैकड़ों दिंडियों के साथ हजारों वारकरियों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। "ज्ञानबा-तुकाराम" और "विठ्ठल-विठ्ठल" के जयघोष से पूरा गोपाळपुर गूंज उठा। यह आयोजन वारकरी संप्रदाय की सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा, सामाजिक समरसता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

मुंबई के गोराई क्षेत्र में स्थित ग्लोबल विपश्यना पगोडा दुनिया के सबसे भव्य ध्यान केंद्रों में से एक है। भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित विपश्यना ध्यान परंपरा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से निर्मित यह स्मारक शांति, करुणा और मानवीय मूल्यों का प्रतीक माना जाता है। सुनहरे रंग का विशाल गुंबद, अद्भुत वास्तुकला और विशाल ध्यान सभागार देश-विदेश से लाखों पर्यटकों और साधकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

पुणे के मध्य स्थित शनिवार वाड़ा मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। वर्ष 1732 में प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा निर्मित यह भव्य महल मराठा शासन की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। विशाल द्वार, मजबूत किलेबंदी, अद्भुत वास्तुकला, ऐतिहासिक घटनाएं और रहस्यमयी कथाओं के कारण शनिवार वाड़ा आज महाराष्ट्र के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में मुरुड तट से अरब सागर के बीच स्थित मुरुड-जंजीरा किला भारत के सबसे अभेद्य समुद्री किलों में से एक माना जाता है। अनेक विदेशी शक्तियों और मराठा साम्राज्य ने इस किले पर कब्जा करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कोई भी इसे जीत नहीं सका। सिद्दी शासकों का वैभव, मजबूत किलेबंदी, मीठे पानी के तालाब और अद्भुत स्थापत्य कला आज भी इस किले को इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और समापन जिस पवित्र मंदिर से होता है, वह है पुणे जिले के मोरगांव स्थित श्री मोरेश्वर गणपति मंदिर। भगवान गणेश का यह स्वयंभू और जागृत धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं, प्राचीन इतिहास, अद्भुत वास्तुकला, संत मोरया गोसावी की तपस्या और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने इस मंदिर को महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख गणेश तीर्थों में विशेष स्थान दिलाया है।

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के अकोले तालुका में स्थित कलसुबाई शिखर समुद्र तल से लगभग 1,646 मीटर (5,400 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और इसे महाराष्ट्र की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है। सह्याद्री पर्वतमाला का यह प्रसिद्ध शिखर ट्रैकिंग प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। शिखर पर स्थित मां कलसुबाई के मंदिर के कारण यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

साईं बाबा की पावन नगरी शिरडी से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को गुरुस्थान के पवित्र नीम वृक्ष का प्रतीकात्मक पौधा "साईं प्रसाद" के रूप में देने का निर्णय लिया है। पहले चरण में लगभग एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें श्रद्धालुओं को प्रतीकात्मक शुल्क पर उपलब्ध कराया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य साईं बाबा की शिक्षाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए देशभर में हरित अभियान को नई दिशा देना है।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के खेड तालुका में सह्याद्री पर्वतमाला के बीच स्थित श्री भीमाशंकर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। घने जंगल, मनमोहक प्राकृतिक वातावरण, प्राचीन इतिहास और गहरी धार्मिक आस्था के कारण यह मंदिर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर, जिसे अंबाबाई मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। प्राचीन इतिहास, अद्भुत पत्थर की वास्तुकला, धार्मिक महत्व और अनूठी परंपराओं के कारण हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां महालक्ष्मी की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव का आगमन होता है।

भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास वर्ष 2026 में महाराष्ट्र सहित अमांत पंचांग का पालन करने वाले राज्यों में 13 अगस्त से शुरू होकर 11 सितंबर तक रहेगा। इस वर्ष श्रावण मास में कुल चार सावन सोमवार पड़ेंगे। पूरे महीने शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और व्रत-उपवास का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करेंगे।

देवशयनी आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर कल्याण में कल्याण मराठी चैरिटी ट्रस्ट, बी. के. बिर्ला कॉलेज, बी. के. बिर्ला पब्लिक स्कूल, सरला बिर्ला हाई स्कूल और सेंचुरी रेयॉन के संयुक्त तत्वावधान में भव्य ज्ञान दिंडी का आयोजन किया गया। बी. के. बिर्ला कॉलेज से शुरू हुई दिंडी शहाड स्थित विठोबा (बिर्ला) मंदिर पहुंची, जहां हरिनाम संकीर्तन के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।

आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार तड़के पत्नी अमृता फडणवीस के साथ पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में शासकीय महापूजा की। इस अवसर पर धाराशिव जिले के मानकरी वारकरी दंपती बाबासाहेब माने और प्रभावती माने को पूजा का विशेष सम्मान दिया गया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संपन्न इस महापूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में सुख-समृद्धि, किसानों की खुशहाली और अच्छी वर्षा की प्रार्थना की।

संत ज्ञानेश्वर की 'ज्ञानेश्वरी' और संत तुकाराम की 'अभंगगाथा' का प्रभाव अब दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है। फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और स्पेन सहित अनेक देशों के शोधकर्ताओं ने मराठी सीखकर वारकरी परंपरा का अध्ययन किया और अभंगों व ओवियों का अपनी-अपनी भाषाओं में अनुवाद किया। संत साहित्य में निहित मानवता, समानता और विश्वबंधुत्व का संदेश आज भी विदेशी विद्वानों को आकर्षित कर रहा है।

मुंबई के गिरगांव स्थित ठाकुरद्वार क्षेत्र में देवद ब्राह्मण समाज का श्री पंढरीनाथ (विठ्ठल-रुक्मिणी) मंदिर पिछले लगभग 160 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और वारकरी परंपरा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वर्ष के 365 दिनों तक चलने वाली अखंड कीर्तन परंपरा, प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक परंपराएं और समाजसेवा के विविध कार्य इस मंदिर को मुंबई की सांस्कृतिक धरोहरों में एक विशिष्ट स्थान दिलाते हैं।

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में चिपलून के पास सह्याद्री पर्वतमाला की गोद में स्थित श्री क्षेत्र परशुराम मंदिर कोकण के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम को समर्पित यह मंदिर आस्था, इतिहास, प्राचीन वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने वाला एक प्रेरणादायक अभियान रूस में संपन्न हुआ। कल्याण के पैराजंपर और स्काईडाइवर अजीत कारभारी ने करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइव करते हुए भगवान विठ्ठल की प्रतिमा के साथ "राम कृष्ण हरी" का जयघोष किया। साहसिक खेल और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के इस अनूठे संगम की हर ओर चर्चा हो रही है।

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल सरकारों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि कई पुजारी भी मंदिरों की संपत्तियों को बर्बाद कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने मामले में केंद्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि मंदिर की संपत्ति किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि देवता की होती है।

भगवान जगन्नाथ के चित्रण पर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए फिल्म रथ यात्रा समाप्त होने के बाद ही रिलीज की जाए

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान मची अफरातफरी में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और करीब सौ लोग घायल हो गए, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों जैसे मुंबई, लखनऊ और वाराणसी में यह महापर्व बेहद हर्षोल्लास और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर शुरू हुई इस नौ दिवसीय रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

वाराणसी के ज्ञानवापी, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े विवादों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से विशेष लोक अदालत के माध्यम से सुलह का रास्ता निकालने की पहल को बड़ा झटका लगा है। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे समझौते के बजाय अदालत के अंतिम फैसले को ही स्वीकार करेंगे।