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पुरी से मुंबई-लखनऊ तक गूंजा जगन्नाथ का जयघोष।
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान मची अफरातफरी में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और करीब सौ लोग घायल हो गए, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों जैसे मुंबई, लखनऊ और वाराणसी में यह महापर्व बेहद हर्षोल्लास और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर शुरू हुई इस नौ दिवसीय रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

पुरी में भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा का आयोजन हुआ जहां सबसे पहले भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ को खींचा गया, जिसके बाद देवी सुभद्रा के दर्पदलन और अंत में भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ की यात्रा शुरू हुई। इसी दौरान मरीचिकोट चौक के पास एक एम्बुलेंस को रास्ता देने के प्रयास में भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया और श्रद्धालु एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, जिससे अफरातफरी मच गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार मृतकों में ३५ वर्षीय अनिल दास शामिल हैं। थकान, निर्जलीकरण और दम घुटने के कारण करीब सौ लोग बीमार हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भारी भीड़ और देरी के कारण रथों को गंतव्य से पहले ही बीच रास्ते में रोकना पड़ा, जिन्हें अगले दिन दोबारा खींचना शुरू किया गया।
दूसरी ओर, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों जैसे मीरा रोड, मलाड, सायन और नवी मुंबई में रथयात्राओं ने भक्तिमय माहौल बना दिया। मीरा रोड स्थित इस्कॉन मंदिर से निकली भव्य रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने हरे कृष्ण के महामंत्र के साथ नृत्य किया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग, अलीगंज और ठाकुरगंज इलाकों में भी पारंपरिक काष्ठ और मयूर रथों पर सवार होकर भगवान नगर भ्रमण पर निकले। वाराणसी और बाराबंकी में भी अष्टकोणीय और सुसज्जित रथों पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु सड़कों पर उतरे।
ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा है कि उत्सव का समग्र संचालन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा, तथा भीड़ प्रबंधन में कोई प्रणालीगत नाकामी नहीं थी। सरकारी बयानों के अनुसार दो श्रद्धालुओं की मौत हुई है जो दिल का दौरा पड़ने और अत्यधिक उमस के कारण असहज महसूस करने से हुई। वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि ग्रैंड रोड (बडदंडा) पर हुई यह घटना दुखद है और सरकार को भविष्य के लिए बेहतर भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करना चाहिए। मुंबई में मुंबादेवी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधकों के अनुसार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुचारू दर्शन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
