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'एक पेड़ माँ के नाम' से हरित यूपी की ओर, 35 करोड़ पौधों का महाअभियान
बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने हरित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 'वृक्षारोपण महाअभियान-2026' के तहत 12 जुलाई को पूरे प्रदेश में एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से प्रेरित है और इसका उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।
Anshuman Mishra14 जुल. 2026, 11:19 AM IST

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा, नियमित निगरानी और संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में घने वृक्ष बन सकें। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने की भी अपील की।
इस महाअभियान में वन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके साथ ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, पंचायती राज, नगर विकास, शिक्षा विभाग, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम पंचायतों, स्कूल-कॉलेजों और आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि वृक्षारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का अभियान बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम करने, ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ने से हीट आइलैंड प्रभाव कम करने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को सीमित करने में भी मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की शुरुआत करते हुए नागरिकों से अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आह्वान किया था। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस अभियान को राज्यव्यापी जनभागीदारी से जोड़ने का निर्णय लिया है।
सरकार का कहना है कि अभियान की सफलता केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने की दर से तय होगी। इसी उद्देश्य से पौधों के संरक्षण, जियो-टैगिंग, नियमित निरीक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे, ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य चिन्हित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वृक्षारोपण के साथ संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, तो यह अभियान जलवायु परिवर्तन से मुकाबले, हरित आवरण बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
