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ठाणे के सिंघानिया स्कूल ट्रिप में बड़ा हादसा सवाल: ट्रैवल एजेंसी की चूक या स्कूल का मिसमैनेजमेंट?
ठाणे: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के श्रीमती सुलोचनादेवी सिंघानिया स्कूल के शैक्षणिक विज्ञान दौरे के दौरान लगभग 55 से 60 छात्रों के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। छात्रों ने भोजन करने के कुछ समय बाद उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद कई बच्चों को ठाणे के अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। घटना के बाद अभिभावकों में चिंता और नाराज़गी बढ़ गई है, जबकि प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। फिलहाल अधिकारियों ने इसे कथित फूड पॉइजनिंग का मामला मानते हुए जांच शुरू कर दी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
Anshuman Mishra14 जुल. 2026, 01:05 PM IST

क्या है पूरा मामला?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वर्तक नगर स्थित एक निजी स्कूल के लगभग 160 छात्र 1 और 2 जुलाई को मुंबई के लोअर परेल में आयोजित एक विज्ञान कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। यात्रा के दौरान छात्रों के लिए नाश्ते और भोजन की व्यवस्था एक ट्रैवल्स कंपनी के माध्यम से की गई थी। बताया जा रहा है कि भोजन करने के कुछ समय बाद बड़ी संख्या में बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत शुरू हो गई। तबीयत बिगड़ने पर कई छात्रों को तत्काल ठाणे के विभिन्न निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार किया गया।
फूड पॉइजनिंग की पुष्टि अभी नहीं
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बीमारी का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती स्तर पर भोजन की गुणवत्ता, खाद्य पदार्थ के दूषित होने या भोजन की हैंडलिंग में लापरवाही जैसी संभावनाओं की जांच की जा रही है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यदि खाद्य विषाक्तता हुई है तो वह भोजन तैयार करने, पैकिंग, परिवहन या परोसने के किस चरण में हुई। खाद्य पदार्थों के नमूने और अन्य आवश्यक साक्ष्य जांच के लिए एकत्र किए जा रहे हैं। अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
उपमहापौर ने निष्पक्ष जांच की मांग की
ठाणे के उपमहापौर कृष्णा दादू पाटिल ने जिला प्रशासन, नगर निगम आयुक्त और स्कूल प्रबंधन को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का एक साथ बीमार होना बेहद गंभीर मामला है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय बच्चों की कम इम्युनिटी का हवाला देकर स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की, जबकि अभिभावक पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच चाहते हैं।
स्कूल प्रशासन और पुलिस का क्या रुख?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, पुलिस की ओर से भी फिलहाल किसी एफआईआर या विस्तृत कार्रवाई की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सेफ्टी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर स्कूलों द्वारा आयोजित शैक्षणिक यात्राओं में फूड सेफ्टी प्रोटोकॉल, कैटरिंग एजेंसियों की जवाबदेही और बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता की पूर्व जांच, सुरक्षित भंडारण, तापमान नियंत्रण, स्वच्छ परिवहन और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और फूड पॉइजनिंग के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच पूरी होने और प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रों की तबीयत बिगड़ने के पीछे भोजन की गुणवत्ता जिम्मेदार थी या कोई अन्य कारण। हमारे सावंदता ने बच्चों के हाल चाल के लिए स्कूल से जानकारी लेनी चाही लेकिन स्कूल ने साफ़ मना कर दिया ऐ कहते हुए की हम बच्चो से जुडी कोई जानकारी सजा नहीं कर सकते। तब तक इस घटना को कथित फूड पॉइजनिंग के रूप में ही देखा जा रहा है।
