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स्कूलों में यौन शिक्षा शामिल करने की केंद्र सरकार की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दी

नई दिल्ली: बच्चों की सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के प्रति एक बड़ा कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में 'व्यापक यौन शिक्षा' को अनिवार्य करने के सरकार के प्रस्ताव पर अपनी सहमति व्यक्त की है। केंद्र सरकार द्वारा गठित एक 26-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि यौन शोषण से सुरक्षा और यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाया जाए।

Vinod Tiwari14 जुल. 2026, 01:32 PM IST
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स्कूलों में यौन शिक्षा शामिल करने की केंद्र सरकार की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दी

केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति का उद्देश्य विशेष रूप से पोक्सो (POCSO) अधिनियम के दायरे में किशोरों के निजता के अधिकार और उनसे जुड़े यौन स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की जांच करना था।

​रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं:

  • ​समिति ने सिफारिश की है कि बच्चों को मूलभूत स्तर से ही 'सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श' और शारीरिक सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए।
  • ​किशोर शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूलों और कॉलेजों में लागू करने का सुझाव दिया गया है।
  • ​इस पाठ्यक्रम में केवल यौन शिक्षा ही नहीं, बल्कि लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा, भावनात्मक कल्याण और स्वास्थ्य-स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी शामिल होंगे।
  • ​कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से इस शिक्षा को शुरू करने की योजना है, ताकि छात्र अपनी आयु के अनुसार इन संवेदनशील विषयों को समझ सकें।

​क्रियान्वयन और संवेदनशीलता:

समिति ने स्पष्ट किया है कि पाठ्यक्रम को वैज्ञानिक और आयु के अनुरूप बनाने के लिए एनसीईआरटी (NCERT) से मदद ली जाएगी। छोटे बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में 'सहमति' (consent) जैसे जटिल विषयों को शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन माध्यमिक स्तर पर इन्हें अत्यंत संवेदनशील और कानूनी ढांचे के भीतर पढ़ाया जाएगा।

​इसके अलावा, इस मुहिम को सफल बनाने के लिए माता-पिता के साथ नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी और समुदाय स्तर पर 'सामुदायिक राजदूत' तैयार किए जाएंगे जो इस शिक्षा का प्रसार करेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान और लिज मैथ्यू ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस रिपोर्ट की पैरवी की, जिसे अदालत ने सराहा और इसे भविष्य की आवश्यकता बताते हुए आगे बढ़ाने पर सहमति दी।