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"स्मार्ट मीटर या 'स्मार्ट' लूट? बिजली बिलों ने उड़ाई महाराष्ट्रवासियों की नींद!

महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिलों में अचानक कई गुना वृद्धि हुई है। इस मुद्दे पर कल्याण-डोंबिवली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। हालांकि, महावितरण ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह प्रमाणित हैं और बिलों में बढ़ोतरी का कारण वास्तविक बिजली खपत हो सकती है।

Kalpana Gautam14 जुल. 2026, 01:35 PM IST
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"स्मार्ट मीटर या 'स्मार्ट' लूट? बिजली बिलों ने उड़ाई महाराष्ट्रवासियों की नींद!
महाराष्ट्र में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ा विवाद, बढ़े बिजली बिलों के आरोपों से उपभोक्ताओं में नाराज़गी।

मुंबई/कल्यााण: महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की मुहिम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के कई शहरों, विशेषकर कल्याण-डोंबिवली, पुणे, नागपुर और मुंबई में उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गए हैं। इन शिकायतों के बाद विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी स्मार्ट मीटर परियोजना का विरोध तेज कर दिया है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिना बिजली खपत में किसी बड़े बदलाव के भी बिल तीन से पांच गुना तक बढ़कर आ रहे हैं। कई लोगों ने मीटर की कार्यप्रणाली और बिलिंग प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हाल के दिनों में कल्याण-डोंबिवली में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब महावितरण (MSEDCL) ने लाखों उपभोक्ताओं को संदेश भेजकर 48 घंटे के भीतर पुराने मीटर की जगह स्मार्ट मीटर लगाने की सूचना दी। कई उपभोक्ताओं ने इसे "जबरन मीटर बदलने" की कोशिश बताते हुए आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें पर्याप्त जानकारी या सहमति का अवसर नहीं दिया गया।

हालांकि, महावितरण ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर प्रमाणित तकनीक पर आधारित हैं और वे गलत रीडिंग या अतिरिक्त यूनिट दर्ज नहीं करते। कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी मिलती है, बिलिंग अधिक पारदर्शी होती है और बिजली चोरी पर भी नियंत्रण लगाया जा सकता है। महावितरण ने यह भी कहा है कि वर्तमान में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर पोस्टपेड हैं तथा प्रीपेड सुविधा अनिवार्य नहीं है।

इधर, स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने भी उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना, प्रीपेड सुविधा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं।

फिलहाल राज्य सरकार और महावितरण स्मार्ट मीटर परियोजना को जारी रखने के पक्ष में हैं, जबकि उपभोक्ता संगठन पारदर्शिता, स्वतंत्र तकनीकी जांच और उपभोक्ताओं की सहमति सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट मीटर का मुद्दा महाराष्ट्र में बिजली व्यवस्था और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा बड़ा सार्वजनिक विषय बनता जा रहा है।