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छात्रों की मानसिक सेहत पर बड़ा फोकस, IIT मद्रास में शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय पहल।
आईआईटी मद्रास में शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर के शिक्षकों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत बनाना और छात्रों के लिए बेहतर काउंसलिंग एवं सहयोगी वातावरण तैयार करना है। विशेषज्ञों ने इसे छात्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
Kalpana Gautam14 जुल. 2026, 01:38 PM IST

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की राष्ट्रीय पहल, IIT मद्रास में शिक्षा मंत्रालय की बड़ी कार्यशाला।
चेन्नई: देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल वेलनेस) को बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। "Celebrating Minds: From Academic Excellence to Sustainable Wellness" शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों और छात्र सहायता से जुड़े पेशेवरों ने भाग लिया।
यह कार्यशाला मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Malaviya Mission Teacher Training Programme) के तहत आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करना और छात्रों के लिए सुरक्षित एवं सहयोगी शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।
कार्यक्रम में IIT मद्रास, शिक्षा मंत्रालय, IIT तिरुपति, NIT तिरुचिरापल्ली, AIIMS जोधपुर, Krea University, YourDOST, Kauvery Hospital सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रतिभागियों ने तनाव, अवसाद, परीक्षा के दबाव, भावनात्मक संतुलन और समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने कहा कि केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों की भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने छात्र कल्याण को प्राथमिकता देते हुए अपने वेलनेस सिस्टम को और सशक्त बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और मानसिक तनाव के दौर में ऐसी पहल देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में प्रभावी काउंसलिंग, जागरूकता कार्यक्रम और समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि छात्र बिना किसी झिझक के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर मदद ले सकें।
