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जेल या बेल? सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया सस्पेंस, लालू यादव को राहत देकर सीबीआई की अर्जी की खारिज।

सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की सीबीआई की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने उनके खराब स्वास्थ्य और लंबे समय से बाहर होने का हवाला देते हुए उन्हें जेल भेजने से इनकार किया। हालांकि, झारखंड हाई कोर्ट को उनकी लंबित मुख्य अपील पर अगले 6 महीनों में अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया गया है।

Neha Sharma15 जुल. 2026, 12:07 AM IST
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जेल या बेल? सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया सस्पेंस, लालू यादव को राहत देकर सीबीआई की अर्जी की खारिज।
चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें लालू यादव की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इतने लंबे समय बाद किसी की स्वतंत्रता में खलल डालना उचित नहीं होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह लालू यादव की सजा के खिलाफ लंबित अपील पर तेजी से सुनवाई करे और 6 महीने के भीतर इसका निपटारा करे।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने झारखंड हाई कोर्ट द्वारा लालू यादव को दी गई जमानत को चुनौती दी थी। सीबीआई की ओर से दलील दी गई थी कि लालू यादव ने अपनी सजा का अपेक्षित हिस्सा पूरा नहीं किया है और अलग-अलग धाराओं के तहत मिली सजा को एक साथ (concurrently) चलने वाला नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि जमानत देते समय नियमों की अनदेखी की गई थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जमानत दिए हुए अब काफी समय बीत चुका है और मामले में अपील 2018 से लंबित है। पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में अब जमानत रद्द करके आरोपी को वापस जेल भेजना न्यायसंगत नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि लालू यादव स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं, जिनमें किडनी ट्रांसप्लांट भी शामिल है, से जूझ रहे हैं।
हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाई कोर्ट से कहा है कि वह इस मामले में लालू यादव की दोषसिद्धि (Conviction) के खिलाफ दायर मुख्य अपील पर सुनवाई में तेजी लाए। सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा तय करते हुए कहा कि हाई कोर्ट को प्रयास करना चाहिए कि अगले 6 महीनों में इस मामले का अंतिम फैसला आ जाए। देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में लालू यादव को दोषी ठहराया गया था। झारखंड हाई कोर्ट ने उन्हें खराब स्वास्थ्य और सजा की आधी अवधि पूरी करने के आधार पर जमानत दी थी, जिसे सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आज के फैसले से लालू यादव का जेल से बाहर रहना जारी रहेगा, जो आरजेडी और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत है।