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शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बढ़ता बोझ, हाईकोर्ट ने पूछा- "आखिर पढ़ाएंगे कब?"
मुंबई: महाराष्ट्र में शिक्षकों पर लगातार बढ़ रहे गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इस मुद्दे पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी गंभीर टिप्पणी करते हुए सरकार से सवाल किया कि यदि शिक्षक लगातार प्रशासनिक और सरकारी कार्यों में लगे रहेंगे, तो वे विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे कब? अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राज्यभर के शिक्षक संगठन लंबे समय से गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से राहत की मांग कर रहे हैं।
Anshuman Mishra15 जुल. 2026, 12:09 AM IST

जानकारी के अनुसार, राज्य के कई सरकारी और अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा स्वच्छता अभियान, विभिन्न सरकारी सर्वेक्षण, गरीबी रेखा से जुड़े आंकड़े जुटाना, ऑनलाइन डेटा एंट्री, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, रिपोर्ट तैयार करना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता है। इसके अलावा जनगणना, मतदाता सूची पुनरीक्षण (BLO ड्यूटी) और चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां भी शिक्षकों को सौंपी जाती हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण कक्षा में पढ़ाने का समय लगातार कम हो रहा है। इससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना कठिन हो रहा है और विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। हाल ही में महाराष्ट्र के कई शिक्षक संगठनों ने BLO ड्यूटी और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत की मांग को लेकर आंदोलन और राज्यव्यापी स्कूल बंद का आह्वान भी किया था। मुख्याध्यापकों की स्थिति भी अलग नहीं है। स्कूल प्रशासन, वित्तीय कार्य, सरकारी पत्राचार, निरीक्षण, बैठकों और विभिन्न विभागों को रिपोर्ट भेजने जैसी जिम्मेदारियों में उनका अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्कूलों के शैक्षणिक नेतृत्व और गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिक्षकों का अधिकांश समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में खर्च होगा, तो इस उद्देश्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इसी बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने निजी गैर-अनुदानित और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य में अनिवार्य रूप से लगाने पर अंतरिम रोक भी लगाई है और कहा कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने विधान परिषद में यह आश्वासन दिया है कि चुनाव संबंधी BLO ड्यूटी इस तरह आयोजित की जाएगी कि नियमित कक्षाओं पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। सरकार ने इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाने और समाधान निकालने की भी बात कही है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है और क्या विद्यार्थियों की पढ़ाई को फिर से सर्वोच्च प्राथमिकता मिल पाएगी।
