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भारत में ही मिलेगी विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री! UGC ने खोले ग्लोबल एजुकेशन के दरवाज़े
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और UGC के 2023 नियमों के तहत कई प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस शुरू करने जा रहे हैं। इससे छात्रों को विदेश जाए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और मूल विश्वविद्यालय के समान डिग्री भारत में ही मिल सकेगी। इस पहल का उद्देश्य भारत को Global Education Hub बनाना, विदेशी मुद्रा का बहिर्गमन कम करना और छात्रों के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा को अधिक सुलभ बनाना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि फीस और गुणवत्ता बनाए रखना भविष्य की बड़ी चुनौतियां होंगी।
Anshuman Mishra15 जुल. 2026, 11:19 AM IST

नई दिल्ली: विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब कई प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालय भारत में ही अपने कैंपस शुरू करने जा रहे हैं। इससे छात्रों को विदेश जाए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, आधुनिक लैब, वैश्विक फैकल्टी और मूल विश्वविद्यालय के समान डिग्री भारत में ही मिल सकेगी। यह पहल केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और UGC (Setting up and Operation of Campuses of Foreign Higher Educational Institutions in India) Regulations, 2023 के तहत लागू की जा रही है। भारत से हर साल बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं, जिससे परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है और अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है। इसी स्थिति को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने स्वतंत्र कैंपस स्थापित करने की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य भारत को Global Education Hub बनाना और विश्वस्तरीय शिक्षा देश में ही उपलब्ध कराना है।
विदेशी विश्वविद्यालय कैसे खोलेंगे कैंपस?
UGC के नियमों के अनुसार, किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय को भारत में कैंपस स्थापित करने के लिए पहले Letter of Intent (LoI) और उसके बाद Letter of Approval (LoA) प्राप्त करना होगा। प्रारंभिक अनुमति निश्चित अवधि के लिए दी जाएगी और बाद में गुणवत्ता मूल्यांकन के आधार पर इसका नवीनीकरण होगा। केवल विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित और उच्च रैंकिंग वाले विश्वविद्यालय या विशेष क्षेत्रों में उत्कृष्ट संस्थान ही आवेदन कर सकेंगे।
किन विदेशी विश्वविद्यालयों को मिली मंजूरी?
- University of Liverpool (UK)
- Illinois Institute of Technology (USA)
- Victoria University (Australia)
- Western Sydney University (Australia)
- Istituto Europeo di Design (Italy)
इसके अलावा University of York, University of Aberdeen, University of Bristol, La Trobe University, Lancaster University और अन्य संस्थानों को भी विभिन्न चरणों में अनुमति या LoI मिल चुका है।छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?
छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?
- विदेश जाने की जरूरत कम होगी।
- वीजा, यात्रा और रहने का खर्च बचेगा।
- मूल विश्वविद्यालय के समान डिग्री और पाठ्यक्रम मिलेगा।
- अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और रिसर्च सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
- ग्लोबल प्लेसमेंट और करियर के बेहतर अवसर मिलेंगे।
- विदेशी और भारतीय छात्रों के साथ पढ़ने का अवसर मिलेगा।
किन विषयों की होगी पढ़ाई?
इन कैंपसों में इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिजनेस मैनेजमेंट, फाइनेंस, डिजाइन, डेटा साइंस और अन्य आधुनिक विषयों के पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की संभावना है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस भारतीय सरकारी संस्थानों की तुलना में अधिक हो सकती है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि भारत स्थित कैंपसों की गुणवत्ता, फैकल्टी और डिग्री का स्तर मूल विश्वविद्यालय के समान बना रहे। UGC ने स्पष्ट किया है कि भारत में दिए जाने वाले पाठ्यक्रम और डिग्री मूल कैंपस के बराबर होने चाहिए।
