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'बैन के बावजूद मौत का कारोबार!' चाइनीज मांझे की ऑनलाइन बिक्री पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
चाइनीज मांझे से लगातार हो रही मौतों और गंभीर हादसों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कड़ा जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को यह भी जांचने का निर्देश दिया कि प्रतिबंध के बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री कैसे जारी है। हाईकोर्ट ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
Sonali15 जुल. 2026, 04:29 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने 15 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह यह जांच करे कि प्रतिबंधित चाइनीज मांझा कहीं ई-कॉमर्स और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से तो नहीं बेचा जा रहा है। यदि ऐसा पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
यह मामला वर्ष 2018 में दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। यह याचिका मोतीलाल यादव द्वारा स्वयं तथा रज्जन खान द्वारा दायर अन्य जनहित याचिकाओं के साथ दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद राज्य में चाइनीज मांझे का निर्माण, बिक्री और उपयोग लगातार जारी है। इससे दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों, बच्चों और पक्षियों की जान जा रही है तथा गंभीर हादसे हो रहे हैं। इसलिए अदालत से प्रतिबंध को सख्ती से लागू कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई।
याचिका में कहा गया है कि चाइनीज मांझा नायलॉन, प्लास्टिक, धातु और कांच के महीन कणों से तैयार किया जाता है। इसकी धार इतनी तेज होती है कि यह गले और शरीर के अन्य हिस्सों को गंभीर रूप से काट देती है। इसके कारण हर वर्ष कई लोगों की मौत होती है और बड़ी संख्या में लोग घायल होते हैं। पक्षियों के लिए भी यह मांझा जानलेवा साबित हो रहा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए "उत्तर प्रदेश डेडली मांझा (निर्माण, बिक्री एवं उपयोग निषेध) अधिनियम" लाने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने यह भी बताया कि इसके लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई है और पीड़ितों को मुआवजा देने के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने या कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अवैध निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रतिबंधित मांझा बाजार और ऑनलाइन माध्यमों से उपलब्ध न हो।
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 19 नवंबर 2015 को दिए गए अपने आदेश में चाइनीज मांझे को जन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए राज्य सरकार को इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सरकार ने कई सरकारी आदेश जारी किए, लेकिन हादसे लगातार जारी रहने के कारण वर्तमान जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है।
इसके बाद 11 फरवरी 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि प्रशासन तब जागता है जब किसी की मौत या गंभीर दुर्घटना सुर्खियां बन जाती है। अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ितों को मुआवजा देने के संबंध में भी आवश्यक आदेश पारित किए जा सकते हैं।
20 मई 2026 की सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि चाइनीज मांझे पर सख्त कानून लाने का मसौदा तैयार किया जा रहा है। वहीं 15 जुलाई 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने विशेष रूप से ऑनलाइन बिक्री की जांच करने, प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन और अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की सुनवाई जारी है।
