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कल्याण लोकसभा का 'स्वास्थ्य भेदभाव': उल्हासनगर को मिली हाईटेक संजीवनी, तो कल्याण-डोंबिवली के जख्मों पर कब लगेगा मरहम?
एक ही लोकसभा क्षेत्र, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं में जमीन-आसमान का अंतर! कल्याण लोकसभा क्षेत्र के दो प्रमुख शहरों—उल्हासनगर और कल्याण-डोंबिवली की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीरें अब जनता के बीच बहस का केंद्र बन गई हैं। जहाँ एक ओर उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल को 'हाईटेक मल्टी-स्पेशलिटी' बनाने का बिगुल बज चुका है, वहीं कल्याण-डोंबिवली के निवासी आज भी बदहाल सरकारी अस्पतालों और असुरक्षा के साये में इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
Vindhya Dubey15 जुल. 2026, 06:42 PM IST

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और स्थानीय सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल को 500 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक केंद्र में बदलने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए। अत्याधुनिक सुविधाएं: नए अस्पताल में हाईटेक ऑपरेशन थिएटर, एडवांस आईसीयू (ICU) और आधुनिक डायग्नोस्टिक लैब जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
बड़ी राहत: उल्हासनगर के निवासियों के लिए यह निर्णय चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रकाश आबिटकर
कल्याण-डोंबिवली: सुधारेगा कौन?
उल्हासनगर में सुविधाओं की नई किरण के बीच, कल्याण-डोंबिवली के नागरिक एक कड़वा सवाल पूछ रहे हैं—"हमारे शहर के स्वास्थ्य ढांचे की सुध कब ली जाएगी?" यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कुछ समय पहले डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में जो हुआ, उसने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी थी।
क्या थी घटना: एनआईसीयू (NICU) बेड की कमी के कारण एक गर्भवती महिला के मामले में अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा और हिंसा हुई थी।
शास्त्री नगर अस्पताल, डोंबिवली
डॉ. श्रीकांत शिंदे
असुरक्षा का माहौल: इस घटना में डॉक्टरों के साथ मारपीट की गई, जिसने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा और संसाधनों के अभाव को पूरी तरह उजागर कर दिया।
निराशा का आलम: हिंसा के आरोपियों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन उस घटना के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने या सुरक्षा बढ़ाने के लिए कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए।
सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में लोग इस 'सौतेले व्यवहार' पर सवाल उठा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि विकास की गति समान होनी चाहिए। एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण और दूसरी तरफ अस्पतालों की बदहाली और डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटनाएं, यह विरोधाभास जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं पर सवालिया निशान लगा रहा है।
कल्याण-डोंबिवली की जनता अब सरकार से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। क्या प्रशासन कल्याण-डोंबिवली के जर्जर स्वास्थ्य ढांचे का कायाकल्प करेगा, या फिर यह शहर उपेक्षा की भेंट चढ़ता रहेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
