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अंबरनाथ में विकास कार्यों पर 'ब्रेक': टेंडर प्रक्रिया को लेकर मचा सियासी घमासान ।
अंबरनाथ: तेजी से विकसित होते अंबरनाथ शहर की विकास यात्रा पर फिलहाल ग्रहण लगता हुआ नजर आ रहा है। नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया को लेकर छिड़े विवाद और सत्ताधारी गुटों के बीच मचे आपसी घमासान ने शहर की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को अधर में लटका दिया है। हालांकि विकास कार्यों के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित की जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान के चलते धरातल पर काम शुरू न होने से आम नागरिक ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
Priyanka Gaikwad16 जुल. 2026, 01:08 PM IST

निविदाओं में 'कमी' का पेंच, गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
मिली जानकारी के अनुसार, अंबरनाथ नगर पालिका द्वारा मंजूर किए गए कई विकास कार्यों के लिए जब निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित की गईं, तो कुछ ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से 30 से 40 प्रतिशत कम दरें भरी हैं। टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदारों के बीच मची इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा ने न केवल प्रक्रिया को जटिल बना दिया है, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इतनी कम दरों पर काम पूरा करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, जिसे लेकर प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
राजनीतिक रस्साकशी का शिकार हुआ विकास
नगर पालिका में चल रहे राजनीतिक मतभेदों का सीधा असर शहर की आधारभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि टेंडर हासिल करने को लेकर विभिन्न गुटों के बीच चल रही खींचतान ने पूरी प्रक्रिया को एक 'राजनीतिक अखाड़ा' बना दिया है। चुनाव आचार संहिता के ठीक पहले जिन सड़क, जल निकासी (ड्रेनेज), जलापूर्ति और अन्य जनहित कार्यों को हरी झंडी मिली थी, वे अब फाइलों के बोझ तले दब गए हैं। ठेकेदारों की लॉबिंग और राजनीतिक हस्तक्षेप ने काम की गति को पूरी तरह थाम दिया है।
प्रशासन का दावा- प्रक्रिया पारदर्शी
इस पूरे प्रकरण पर नगर पालिका प्रशासन का अपना तर्क है। अधिकारियों का कहना है कि वे हर कदम नियमों के दायरे में उठा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, निविदाओं की तांत्रिक (Technical) जांच और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र ठेकेदारों को कार्यादेश (Work Order) जारी कर दिए जाएंगे।
