politics
"देश के सबसे सुरक्षित ठिकाने में सेंध? डार्क वेब पर पहुँची न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की फाइलें, मचा हड़कंप!"
तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े हजारों दस्तावेज़ कथित तौर पर डार्क वेब पर लीक होने का मामला सामने आया है। हालांकि NPCIL ने साफ किया है कि परमाणु रिएक्टर की सुरक्षा और संचालन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी न्यूक्लियर सेफ्टी सिस्टम से समझौता नहीं हुआ।
Kalpana Gautam16 जुल. 2026, 01:37 PM IST

तमिलनाडु : देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (KKNPP) से जुड़ा एक बड़ा साइबर सुरक्षा मामला सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, World Leaks नामक रैनसमवेयर समूह ने दावा किया है कि उसने परियोजना से संबंधित करीब 19,000 फाइलें डार्क वेब पर सार्वजनिक कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि लीक हुए दस्तावेज़ों में यूनिट-3 और यूनिट-4 के निर्माण से जुड़ी इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के ब्लूप्रिंट, सप्लायर विवरण, बीमा दस्तावेज़ और विभिन्न बैठकों के रिकॉर्ड शामिल हैं। हालांकि इन दस्तावेज़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
इस पूरे मामले पर Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) ने बयान जारी कर कहा है कि संयंत्र के रिएक्टर कंट्रोल सिस्टम, न्यूक्लियर सेफ्टी सिस्टम और ऑपरेशनल नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित हैं। संस्था के अनुसार, लीक हुई सामग्री का संबंध परमाणु सुरक्षा या संयंत्र के संचालन से नहीं है।
वहीं, परियोजना से जुड़े ठेकेदार Reliance Infrastructure ने अपने सर्वर पर आंशिक साइबर सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि की है। इसके बाद CERT-In सहित कई एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है कि डेटा कैसे बाहर गया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रिएक्टर सिस्टम सुरक्षित हों, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े तकनीकी दस्तावेज़ों का सार्वजनिक होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। ऐसे दस्तावेज़ महत्वपूर्ण परियोजनाओं की संरचना और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम परियोजना साइबर सुरक्षा को लेकर चर्चा में आई हो। 2019 में भी संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क में मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी, हालांकि तब भी यह कहा गया था कि रिएक्टर संचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी।
महत्वपूर्ण तथ्य :
- कथित तौर पर लगभग 19,000 फाइलें डार्क वेब पर डाली गईं।
- रिएक्टर के कोर ऑपरेशन और न्यूक्लियर सेफ्टी सिस्टम सुरक्षित बताए गए हैं।
- CERT-In और अन्य एजेंसियां जांच कर रही हैं।
- विशेषज्ञ इसे राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।
