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"हमें किडनी दो या इच्छामृत्यु": कोटा की 5 प्रसूता महिलाओं की राष्ट्रपति से मार्मिक गुहार, सी-सेक्शन के बाद जिंदगी बन गई डायलिसिस के सहारे

राजस्थान के कोटा में पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर या तो तत्काल किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) कराने या फिर इच्छामृत्यु (Mercy Killing) की अनुमति देने की मांग की है। इन महिलाओं का आरोप है कि सी-सेक्शन (Cesarean Delivery) के बाद उनकी किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई और अब वे लगातार डायलिसिस पर निर्भर हैं। मामला अब पूरे देश में स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Kalpana Gautam16 जुल. 2026, 01:38 PM IST
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"हमें किडनी दो या इच्छामृत्यु": कोटा की 5 प्रसूता महिलाओं की राष्ट्रपति से मार्मिक गुहार, सी-सेक्शन के बाद जिंदगी बन गई डायलिसिस के सहारे
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में प्रसव के लिए भर्ती हुई पांच महिलाओं की सामान्य सी-सेक्शन डिलीवरी हुई थी। परिजनों और पीड़िताओं के अनुसार, ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और बाद में उनकी किडनियों ने गंभीर रूप से काम करना बंद कर दिया। इसके चलते सभी महिलाओं को नियमित डायलिसिस कराना पड़ रहा है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें इलाज, आर्थिक सहायता और समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिल रही है। इसी वजह से उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि यदि उनका समुचित इलाज और किडनी प्रत्यारोपण संभव नहीं है, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

महिलाओं की प्रमुख मांगें
  • तत्काल उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
  • जरूरत पड़ने पर किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए।
  • इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
  • कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
  • यदि उपचार संभव नहीं है, तो इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह मामला केवल पांच महिलाओं की पीड़ा तक सीमित नहीं है। यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही या अस्पताल की प्रणालीगत कमी सामने आती है, तो यह मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, प्रसवोत्तर देखभाल और सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सी-सेक्शन के बाद किडनी फेल होना सामान्य स्थिति नहीं है। यदि ऐसा होता है तो इसके पीछे संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव, सेप्सिस, गंभीर रक्तचाप संबंधी जटिलताएं या अन्य चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में विस्तृत मेडिकल जांच के बाद ही वास्तविक कारण की पुष्टि की जा सकती है।

निष्कर्ष
कोटा की इन पांच महिलाओं की गुहार केवल इलाज की मांग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था से न्याय की अपील भी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्र और राजस्थान सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।