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ठाणे: बीमारियों के बीच बीएलओ काम का विरोध, आशा वर्करों का मनपा पर हल्ला बोल
ठाणे महानगरपालिका प्रशासन के एक फैसले ने शहर में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर शहर में बारिश के चलते डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, तो वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने इन चुनौतियों के बीच 'आशा' (ASHA) कार्यकर्ताओं को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की जिम्मेदारी सौंपने का फरमान जारी कर दिया है। इस दोहरी मार के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं ने ठाणे महानगरपालिका पर जोरदार मोर्चा निकाला।
Priyanka Gaikwad16 जुल. 2026, 03:13 PM IST

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की चिंता
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में बरसात के कारण संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे समय में घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करना, दवाएं पहुंचाना और मरीजों की निगरानी करना उनकी प्राथमिकता है। उनका तर्क है कि यदि उन्हें मतदाता सूची सुधारने और बीएलओ का काम सौंपा जाता है, तो स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
'हम स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, चुनावी मोहरे नहीं'
प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नियुक्त की गई हैं, न कि चुनावी कार्यों के लिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बीएलओ की जिम्मेदारी शिक्षकों या अन्य सरकारी कर्मचारियों को दी जानी चाहिए। आंदोलनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य विभाग के काम को नजरअंदाज कर उन पर चुनावी बोझ डालना जनहित में नहीं है।
मानदेय और बढ़ता कार्यभार भी मुद्दा
मोर्चे के दौरान कार्यकर्ताओं ने केवल बीएलओ की नियुक्ति का ही विरोध नहीं किया, बल्कि लंबित मानदेय का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
* आशा वर्करों पर लादा गया अतिरिक्त कार्यभार तुरंत वापस लिया जाए।
* घोषित मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित हो।
* स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाए, न कि चुनावी कार्यों में उलझाकर।
प्रशासन के रुख पर टिकी नजरें
इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब ठाणे महानगरपालिका प्रशासन के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। क्या प्रशासन जनस्वास्थ्य के हित में अपना निर्णय बदलेगा या फिर चुनावी प्रक्रिया को प्राथमिकता देगा? फिलहाल, आशा कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक यह फैसला वापस नहीं लिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
