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बारिश के बावजूद नहीं थमी प्यास: महाराष्ट्र के 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अब भी टैंकरों पर निर्भर
महाराष्ट्र में हालिया बारिश के बावजूद 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अब भी टैंकरों के जरिए पेयजल प्राप्त कर रही हैं। राज्य के जलाशयों में पानी बढ़ा है, लेकिन कई क्षेत्रों में जल संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सबसे अधिक टैंकर नासिक संभाग में चलाए जा रहे हैं।
Neha Sharma16 जुल. 2026, 03:16 PM IST

महाराष्ट्र में मानसून ने रफ्तार जरूर पकड़ी है, लेकिन राज्य के कई हिस्सों में पेयजल संकट अब भी गंभीर बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश से जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है, फिर भी हजारों गांवों और बस्तियों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए प्रशासन को अभी भी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 2,675 गांव और 1,192 वाडियां अभी भी टैंकरों के माध्यम से पेयजल प्राप्त कर रही हैं। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में नासिक संभाग शामिल है, जहां बड़ी संख्या में पानी के टैंकर संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
हाल की बारिश के कारण राज्य के प्रमुख बांधों में जल संग्रह बढ़ा है, जिससे आने वाले महीनों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि जल विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अच्छी बारिश से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर पहले से काफी नीचे जा चुका है, जिसकी भरपाई होने में समय लगेगा। दूसरी ओर, मुंबई और ठाणे को पानी उपलब्ध कराने वाले जलाशयों में पानी बढ़ने से इन शहरों की जलापूर्ति को लेकर फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य बना रहता है, तो जल भंडारण में और सुधार होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को भविष्य में जल संकट से बचाने के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जल प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा। उनका कहना है कि हर साल टैंकरों पर निर्भर रहने की स्थिति से बाहर निकलने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।
हालांकि बारिश ने कई इलाकों को राहत दी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र के सभी हिस्सों में जल संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
