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मुंबई में प्रदूषण पर हाई कोर्ट की सख्ती: निर्माण स्थलों पर लगे 3,000 AQI सेंसर्स की होगी 'थर्ड-पार्टी' जांच
बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद मुंबई के निर्माण स्थलों पर लगाए गए लगभग 3,000 एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) मॉनीटर्स के डेटा में विसंगतियां (discrepancies) सामने आने के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। BMC ने इन ऑन-साइट सेंसर्स की तकनीकी सटीकता, कैलिब्रेशन और रियल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन की जांच के लिए एक थर्ड-पार्टी ऑडिट निविदा (Tender) आमंत्रित की है। इसके साथ ही, BMC और IIT-कानपुर ने 'मानस' (MANAS) परियोजना के तहत मुंबई को 8 वर्ग किमी के बराबर ग्रिडों में विभाजित कर 75 कम लागत वाले हाइपरलोकल सेंसर्स लगाने का काम पूरा कर लिया है, जिसका डैशबोर्ड जल्द ही लाइव होने वाला है।

मुंबई: मुंबई शहर में बुनियादी ढांचे के विकास और धड़ल्ले से चल रहे निर्माण कार्यों (Construction activities) के कारण उड़ने वाली धूल हवा को जहरीली बना रही है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक सख्त निर्देश जारी किया था कि शहर के सभी निर्माण स्थलों पर सेंसर-आधारित एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग डिवाइस लगाए जाएं और उन्हें एक सेंट्रलाइज्ड मॉनीटरिंग सिस्टम (केंद्रीय निगरानी प्रणाली) से जोड़ा जाए। अदालत के आदेश के बाद बिल्डरों और निर्माण कंपनियों ने साइटों पर करीब 3,000 सेंसर्स तो लगा दिए, लेकिन इसके तुरंत बाद शिकायतें आने लगीं कि इन सेंसर्स द्वारा दिखाए जा रहे आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। डेटा में विसंगतियों और हेरफेर की इन शिकायतों के बाद अब बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) एक्शन मोड में आ गया है। BMC ने निर्माण स्थलों पर लगे इन सभी 3,000 ऑन-साइट सेंसर-आधारित AQI मॉनीटर्स के सत्यापन और तकनीकी परीक्षण के लिए आधिकारिक रूप से थर्ड-पार्टी ऑडिट की निविदाएं आमंत्रित की हैं।
मोबाइल ऑडिट वैन से होगी डेटा की 'त्रिकोणीय' जांच
BMC के अनुसार, यह ऑडिट सुनिश्चित करेगा कि निजी निर्माण स्थलों पर लगे सेंसर्स निर्धारित तकनीकी विशिष्टताओं (Technical Specifications) और कैलिब्रेशन मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इस काम के लिए जिस ठेकेदार को चुना जाएगा, वह शहर भर में विशेष 'मोबाइल ऑडिट वैन' तैनात करेगा। ये वैन कोई सामान्य गाड़ियां नहीं होंगी, बल्कि इनमें उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक 'संदर्भ-श्रेणी के उपकरण' लगे होंगे। यह वैन सीधे निर्माण स्थलों पर जाकर वहां के सेंसर्स के डेटा का 'त्रिकोणीय सत्यापन' करेंगी, जिससे किसी भी तरह के फर्जी आंकड़ों या तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।
ऑडिट के दौरान इन मुख्य मापदंडों की जांच होगी:
सेंसर्स स्वीकृत तकनीकी गाइडलाइंस के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं।
डेटा की शुद्धता/सटीकता (Data Accuracy) और उपकरणों का समय पर कैलिब्रेशन।
निर्माण स्थल से BMC के मुख्य सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड तक वास्तविक समय में डेटा का ट्रांसमिशन बिना किसी रुकावट के हो रहा है या नहीं।
IIT कानपुर और BMC का 'मानस' प्रोजेक्ट
एक तरफ जहां निर्माण स्थलों पर नकेल कसी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों को उनके इलाके की हवा का सटीक हाल बताने के लिए भी BMC ने एक बड़ा प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है। 'मानस' (Mumbai Air Network for Advanced Sciences) परियोजना के तहत BMC और IIT-कानपुर ने मिलकर काम किया है।
इस प्रोजेक्ट की खास बातें निम्नलिखित हैं:
75 हाइपरलोकल सेंसर्स इंस्टॉल: मुंबई के विभिन्न प्रशासनिक भवनों, वार्ड कार्यालयों,महानगर पालिका के अस्पतालों और स्कूलों की छतों पर 75 कम लागत वाले एयर क्वालिटी सेंसर्स सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं।
8 वर्ग किलोमीटर का ग्रिड सिस्टम: आधिकारिक रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत पूरी मुंबई को 8 वर्ग किलोमीटर (8 sq km) के समान आकार के ग्रिडों में बांटा गया है। हर एक ग्रिड के भीतर हवा की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखने के लिए ये मॉनीटरिंग यूनिट्स लगाई गई हैं।
जल्द लाइव होगा डैशबोर्ड: इस पूरे नेटवर्क से प्राप्त होने वाले बारीक वायु गुणवत्ता डेटा को एक विशेष डैशबोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा, जो बहुत जल्द चालू होने की उम्मीद है। इसके लाइव होते ही मुंबई के नागरिक अपने-अपने इलाकों का हाइपरलोकल प्रदूषण स्तर रीयल-टाइम में देख सकेंगे।
