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अमेरिकी पर्यटक दुष्कर्म केस: अवैध गिरफ्तारी पर कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, होमस्टे मालिक को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

15 जुलाई 2026 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एफआईआर या विदेशी दूतावास की शिकायत के आधार पर किसी भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर 5 लाख रुपये का संवैधानिक मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Sonali16 जुल. 2026, 03:21 PM IST
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अमेरिकी पर्यटक दुष्कर्म केस: अवैध गिरफ्तारी पर कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, होमस्टे मालिक को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
कर्नाटक हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कोडागु (कूर्ग) स्थित एक होमस्टे के मालिक की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने 15 जुलाई 2026 को दिए अपने फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर 5 लाख रुपये का संवैधानिक मुआवजा अदा करे। यह मामला Palecanda Ponnappa @ Vishal बनाम State of Karnataka एवं अन्य (क्रिमिनल पिटीशन संख्या 7712/2026,  (Kar) 248) से संबंधित है।
 एक 33 वर्षीय अमेरिकी महिला पर्यटक ने आरोप लगाया था कि कोडागु के एक होमस्टे में ठहरने के दौरान वहां के कर्मचारी ने उसके पेय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत अमेरिकी दूतावास के माध्यम से भारतीय एजेंसियों तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस ने 18 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज की। मुख्य आरोपी कर्मचारी के साथ-साथ होमस्टे मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गैर-संज्ञेय प्रकृति के थे और उसकी गिरफ्तारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS/BNS की लागू प्रक्रिया) के प्रावधानों का पालन किए बिना की गई। अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद माना कि पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया और पर्याप्त कानूनी आधार भी उपलब्ध नहीं था।
अपने फैसले में न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार किसी भी परिस्थिति में मनमाने ढंग से छीना नहीं जा सकता। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल इसलिए कि अमेरिकी दूतावास या किसी अन्य विदेशी दूतावास ने शिकायत भेजी है, भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का “सौदा” नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी कानून के अनुसार और पर्याप्त आधार पर ही की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि होमस्टे मालिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को इस स्तर पर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि कथित दुष्कर्म के मामले की जांच जारी रहना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि वास्तविक आरोपी के खिलाफ जांच पूरी होना जनहित और न्याय के लिए जरूरी है। इसलिए याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया गया और मुआवजा देने का आदेश पारित किया गया।
फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि 5 लाख रुपये का मुआवजा केवल संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की न्यायिक स्वीकारोक्ति है। यदि याचिकाकर्ता चाहे तो वह अलग से सक्षम सिविल अदालत में अतिरिक्त हर्जाने का दावा भी कर सकता है। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता को 14 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखा गया, जो अवैध गिरफ्तारी का परिणाम था।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला पुलिस की गिरफ्तारी की शक्तियों की न्यायिक समीक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण है। अदालत ने दोहराया कि गिरफ्तारी जांच का सामान्य साधन नहीं हो सकती और प्रत्येक गिरफ्तारी के पीछे ठोस कानूनी कारण, पर्याप्त साक्ष्य तथा वैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। यह निर्णय भविष्य में मनमानी गिरफ्तारी से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा सकता है।