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डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, मासूम के लिए लिखी 12 दवाएं, सरकारी मेडिकल काउंटर पर एक भी नहीं मिली
महाराष्ट्र के डोंबिवली में स्थित कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (KDMC) के शास्त्रीनगर अस्पताल में बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। डॉक्टरों द्वारा त्वचा रोग से पीड़ित दो साल के बच्चे के लिए लिखी गई 12 दवाओं में से एक भी दवा सरकारी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिली, जिसके चलते पीड़ित पिता को मजबूरन बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं।

यह घटना सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाओं के दावों की पोल खोलती है। कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका के अंतर्गत आने वाले इस मुख्य अस्पताल में दवाओं का यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब गरीब मरीज निजी अस्पतालों की महंगी फीस से बचने के लिए सरकारी इलाज पर निर्भर रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टिटवाला के रहने वाले जगदीश राठौड़ अपने दो साल के बेटे को त्वचा में खुजली और चकत्ते की गंभीर समस्या के इलाज के लिए डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। एक दोस्त की सलाह पर वह यहां आए थे क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी अस्पताल में बच्चे का अच्छा और मुफ्त इलाज हो जाएगा।
डॉक्टर ने बच्चे की जांच की और मलहम तथा सिरप सहित कुल 12 अलग-अलग दवाएं पर्चे पर लिख दीं। डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल परिसर में बने महानगर पालिका के मुफ्त मेडिकल काउंटर से ये दवाएं लेने को कहा। हालांकि, जब पीड़ित पिता पर्चा लेकर काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें बड़ा झटका लगा। वहां मौजूद कर्मचारियों ने पर्चा देखकर साफ कह दिया कि उनके पास इनमें से एक भी दवा उपलब्ध नहीं है और उन्होंने सभी दवाएं बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने की सलाह दी। इसके बाद राठौड़ को मजबूरी में बाहर से लगभग 850 रुपये खर्च कर वे दवाएं खरीदनी पड़ीं। परेशान होकर जगदीश राठौड़ ने KDMC महापौर हर्षाली थविल-चौधरी से मोबाइल पर संपर्क किया। पूर्व महापौर के निर्देश पर उन्होंने अस्पताल की चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात की और घटना की शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित पिता जगदीश राठौड़ ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा, अगर मुझे पता होता कि सरकारी अस्पताल में दवाएं नहीं मिलेंगी, तो मैं अपना समय बर्बाद करने यहां क्यों आता? जब पैसे खर्च करके ही इलाज कराना था, तो मैं सीधे किसी निजी अस्पताल में ही चला जाता। मामले पर सफाई देते हुए शास्त्रीनगर अस्पताल की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सादिया पिंजारी ने कहा, अस्पताल में पिछले कुछ महीनों से त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। इस वजह से यहां की त्वचा रोग से संबंधित दवाओं के स्टॉक को महानगर पालिका के दूसरे अस्पतालों में भेज दिया गया था। अब जब हमारे पास विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हो गए हैं, तो हमने चार महीने पहले ही मुख्यालय को पत्र लिखकर दवाओं के नए स्टॉक की मांग की थी। हालांकि, मुख्य कार्यालय से अभी तक दवाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। हम जल्द से जल्द इन्हें मंगाने का प्रयास कर रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब शास्त्रीनगर अस्पताल अपनी बदहाली के कारण विवादों में घिरा है। इससे पहले भी अस्पताल में श्वान दंश (कुत्ते के काटने) के इंजेक्शन और अन्य बुनियादी दवाओं की भारी कमी की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों में महानगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।
