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सूचना का अधिकार: सरकारी कर्मचारियों की पहचान छिपाना अब संभव नहीं, RTI में जानकारी देना अनिवार्य

सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों का नाम, पदनाम और आधिकारिक पहचान अब "व्यक्तिगत जानकारी" बताकर छिपाई नहीं जा सकेगी। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने रेलवे से जुड़े दो मामलों की सुनवाई के दौरान यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक सेवा से जुड़ी आधिकारिक पहचान पारदर्शिता और जवाबदेही का हिस्सा है।

Priyanka Gaikwad16 जुल. 2026, 04:48 PM IST
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सूचना का अधिकार: सरकारी कर्मचारियों की पहचान छिपाना अब संभव नहीं, RTI में जानकारी देना अनिवार्य
सरकारी कर्मचारियों की आधिकारिक पहचान को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जब कोई सरकारी कर्मचारी सार्वजनिक सेवा का निर्वहन कर रहा हो, तब उसका नाम, पदनाम और आधिकारिक पहचान व्यक्तिगत जानकारी नहीं मानी जाएगी। इसलिए सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत ऐसी जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला भारतीय रेलवे से जुड़े दो अलग-अलग आरटीआई आवेदनों का था। एक आवेदक ने उदयपुर एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) का नाम और पदनाम मांगा था, जबकि दूसरे मामले में अजमेर–जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में ड्यूटी कर रहे टीटीई की जानकारी मांगी गई थी।

हालांकि रेलवे प्रशासन ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया। विभाग का कहना था कि यह कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
इसके बाद मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने रेलवे के इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि सरकारी कर्मचारी जब जनता की सेवा से जुड़े कार्य कर रहा होता है, तब उसकी आधिकारिक पहचान निजी नहीं बल्कि सार्वजनिक दायित्व का हिस्सा होती है। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि टीटीई का नाम और पदनाम पहले से ही उनके आधिकारिक बैज और आरक्षण चार्ट पर यात्रियों के लिए प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस जानकारी को गोपनीय या व्यक्तिगत बताकर रोका नहीं जा सकता।

केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। यदि सरकारी कर्मचारियों की आधिकारिक पहचान जैसी बुनियादी जानकारी भी नागरिकों से छिपाई जाएगी, तो कानून की मूल भावना प्रभावित होगी। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का घर का पता, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण, मेडिकल रिकॉर्ड, पारिवारिक जानकारी या अन्य निजी जानकारी अब भी सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत सुरक्षित रहेगी। यह फैसला केवल सरकारी कर्तव्य से जुड़ी आधिकारिक पहचान तक ही सीमित है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सूचना देने से जुड़े अनावश्यक विवाद कम होंगे। साथ ही नागरिकों को सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, केंद्रीय सूचना आयोग का यह फैसला सूचना के अधिकार को और अधिक मजबूत बनाने वाला माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार को भी नई मजबूती देगा।