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BMC ने ताज महल पैलेस होटल को थमाया 22 करोड़ का नोटिस l

मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल को BMC ने सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर लगाए गए सुरक्षा बैरियर और बोलार्ड्स के लिए ₹22 करोड़ का नोटिस जारी किया है। होटल प्रबंधन का कहना है कि ये सुरक्षा इंतजाम 26/11 आतंकी हमलों के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए थे, इसलिए उन्होंने शुल्क में छूट की मांग की है। मामले पर BMC जल्द अंतिम निर्णय ले सकती है।

Kashish Rai16 जुल. 2026, 05:33 PM IST
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BMC ने ताज महल पैलेस होटल को थमाया 22 करोड़ का नोटिस l

मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के बीच सुरक्षा अवसंरचना को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। BMC ने होटल को सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर लगाए गए सुरक्षा बोलार्ड्स और बैरिकेड्स के लिए करीब ₹22 करोड़ का नोटिस जारी किया है। दरअसल, वर्ष 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद होटल की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से उसके चारों ओर बोलार्ड्स और बैरिकेड्स लगाए गए थे।


 इनका मकसद होटल तक वाहनों की सीधी पहुंच को रोकना और संभावित सुरक्षा खतरों से बचाव करना था।

BMC अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की संरचनाएं लगाने के लिए नगर निगम के नियमों के तहत शुल्क लिया जाता है। वर्ष 2008 से इन शुल्कों का बकाया बढ़ते-बढ़ते करीब ₹22 करोड़ तक पहुंच गया है। अधिकारियों का कहना है कि होटल ने कुछ भुगतान किया है, लेकिन अब भी बड़ी राशि बकाया है।


वहीं, होटल प्रबंधन का तर्क है कि ये सुरक्षा इंतजाम केवल होटल के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए गए थे। इसी आधार पर होटल ने BMC से शुल्क में छूट देने की मांग की है। BMC के अधिकारियों ने बताया कि होटल की ओर से मिली छूट की मांग पर फिलहाल विचार किया जा रहा है और इस संबंध में जल्द अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, इस विषय पर चर्चा अंतिम चरण में है।


गौरतलब है कि यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2020 में तत्कालीन शिवसेना-नीत स्थायी समिति ने होटल को लगभग ₹10 करोड़ की रियायत देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि बाद में प्रशासनिक स्तर पर यह प्रस्ताव वापस ले लिया गया था। अब एक बार फिर यह मामला चर्चा में है और BMC के अंतिम फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह निर्णय भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा ढांचे और उससे जुड़े शुल्कों को लेकर नीति निर्धारण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।