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मासूम चेहरे, शातिर दिमाग: भदोही में ₹10 करोड़ के ऑनलाइन घोटाले में दो नाबालिग गिरफ्तार।

उत्तर प्रदेश के भदोही (वाराणसी क्षेत्र) में पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ₹10 करोड़ से अधिक की ठगी की थी। इस मामले में पुलिस ने 15 और 16 वर्ष के दो किशोरों (Juveniles) को हिरासत में लिया है। मुख्य आरोपी अंशुल मिश्रा सहित गिरोह के तीन सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। यह गिरोह भोले-भाले ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनके पासबुक, एटीएम और सिम कार्ड अपने पास रख लेता था और उनका उपयोग निवेश, क्रेडिट कार्ड और मालवेयर एपीके (APK) घोटालों की काली कमाई को रूट करने के लिए करता था। पकड़े गए किशोरों के पास से 200 से अधिक बैंक खातों के विवरण मिले हैं, जिनसे जुड़ी 500 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज हैं।

Anshuman Mishra16 जुल. 2026, 05:45 PM IST
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मासूम चेहरे, शातिर दिमाग: भदोही में ₹10 करोड़ के ऑनलाइन घोटाले में दो नाबालिग गिरफ्तार।
वाराणसी/भदोही: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है जो सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और कम ब्याज पर लोन दिलाने के बहाने निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाता था। इस हाई-टेक घोटाले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पुलिस ने हरिहरनाथ मंदिर क्षेत्र और गोपीपुर गांव से 15 और 16 वर्ष के दो किशोरों को हिरासत में लिया । इन दोनों किशोरों को बाल न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

अंशुल मिश्रा है मुख्य सरगना, ऐसे खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब बालीपुर के रहने वाले अमन कुमार बिंद ने शिकायत दर्ज कराई। अमन ने आरोप लगाया कि गिरोह ने लोन दिलाने के बहाने उसके और उसकी बहन के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उनकी पासबुक, एटीएम कार्ड और लिंक मोबाइल सिम अपने पास रख लिए। जब अमन ने अपने दस्तावेज़ वापस मांगे, तो गिरोह ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिछले सप्ताह गिरोह के मुख्य सरगना अंशुल मिश्रा सहित तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया आथा। उनसे पूछताछ के बाद इन दो नाबालिगों की संलिप्तता सामने आई, जो तकनीकी रूप से गिरोह को संभाल रहे थे।
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मालवेयर APK और फेक इन्वेस्टमेंट से ठगी का मॉडस ऑपेरेंडी
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह ग्रामीणों के नाम पर फर्जी या डमी खाते (Mule Accounts) खुलवाता था। इन खातों का उपयोग ट्रेडिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और मालवेयर एपीके (Malware APK) घोटालों के जरिए लूटी गई रकम को छुपाने और ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

पुलिस ने जब इन किशोरों के मोबाइल फोन खंगाले, तो उनके होश उड़ गए। उनके पास से 200 से अधिक बैंक खातों के विवरण मिले। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इन खातों के खिलाफ पहले से ही 500 से अधिक शिकायतें दर्ज पाई गईं। ठगी के पैसों को पकड़ में आने से बचाने के लिए वे पेट्रोल पंप की पीओएस (POS) मशीनों, एटीएम, और क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के जरिए कैश कराकर आपस में बांट लेते थे।

 किशोरों और बच्चों से जुड़े साइबर अपराध के सांख्यिकीय आंकड़े 
भारत में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ ही किशोरों (Teenagers/Minors) का साइबर अपराध की दुनिया में प्रवेश और उनका शिकार होना दोनों तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और साइबर सुरक्षा अध्ययनों के अनुसार निम्नलिखित आंकड़े इस गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं:

  • साइबर अपराधों में भारी उछाल: एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल दर्ज साइबर अपराधों की संख्या 2021 में 52,974 से बढ़कर 2023 में 86,420 तक पहुंच गई है, जो डिजिटल फ्रॉड की तीव्र वृद्धि को दिखाती है।
  • नाबालिगों के खिलाफ और उनमें अपराध की दर: एनसीआरबी डेटा के अनुसार, बच्चों और किशोरों (18 वर्ष से कम) के खिलाफ या उनके द्वारा किए जाने वाले साइबर अपराधों में 32% से अधिक की सालाना वृद्धि देखी गई है।
  • अपराध के मुख्य प्रकार: किशोरों से जुड़े साइबर मामलों में  61% मामले वित्तीय धोखाधड़ी (जैसे गेमिंग फ्रॉड, मालवेयर लिंक शेयरिंग) से जुड़े होते हैं। इसके अलावा साइबर बुलिंग (Stalking/Bullying) और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले भी तेजी से बढ़े हैं (2018 में जहां साइबर स्टालिंग के 40 मामले थे, वहीं हालिया रिपोर्टों में यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है)।
  • म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का जाल: आई4सी (I4C - Indian Cyber Crime Coordination Centre) की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठगों द्वारा किशोरों को पॉकेट मनी या गेमिंग करेंसी का लालच देकर उनके या उनके दोस्तों के बैंक खातों का उपयोग 'म्यूल अकाउंट' के रूप में पैसे रूट करने के लिए किया जा रहा है। सरकार ने अब तक कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद से ऐसे लाखों संदिग्ध सिम कार्ड और बैंक खातों को ब्लॉक किया है।


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