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पुलिस थानों के CCTV पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, पूरे महाराष्ट्र में जांच के आदेश; DGP से तलब की विस्तृत रिपोर्ट
घाटकोपर पुलिस स्टेशन की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और फुटेज संरक्षण व्यवस्था की तथ्यात्मक जांच कराने का निर्देश दिया।
Sonali17 जुल. 2026, 02:47 PM IST

पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली और फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी पुलिस थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, उनके सुचारु संचालन और फुटेज कितने समय तक सुरक्षित रखी जाती है, इस संबंध में तथ्यात्मक जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
यह निर्देश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने 15 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने यह आदेश घाटकोपर निवासी प्रशांत कोकणे की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता प्रशांत कोकणे ने अदालत से डीसीपी (जोन-7) कार्यालय और घाटकोपर पुलिस स्टेशन की 17 से 20 मार्च 2025 के बीच की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि 17 मार्च 2025 को उन्होंने राशन विभाग में एक कथित फर्जी राशन कार्ड की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके तीन दिन बाद, 20 मार्च 2025 को उनके खिलाफ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर निवारक कार्रवाई (Preventive Proceedings) शुरू कर दी गई।
कोकणे का आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए दबाव में लाने के उद्देश्य से की गई थी।
राज्य सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता मंकुंवर देशमुख ने अदालत को बताया कि अप्रैल 2025 में इन निवारक कार्यवाहियों को वापस लेने का निर्णय लिया गया था और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिए गए थे।
सरकारी पक्ष ने यह भी बताया कि वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के जुलाई 2025 के पत्र के अनुसार संबंधित पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज केवल छह महीने तक सुरक्षित रखी जाती है।
हाईकोर्ट ने पुराने आदेश की याद दिलाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने मार्च 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि पुलिस थानों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग का बैकअप 18 महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाएगी। अदालत ने तब भी राज्य में कई पुलिस थानों के सीसीटीवी कैमरे खराब होने और रिकॉर्डिंग व्यवस्था में खामियों पर गंभीर चिंता जताई थी।
अदालत की चिंता
खंडपीठ ने कहा कि यह जानना आवश्यक है कि राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे वास्तव में कार्यरत हैं या नहीं तथा रिकॉर्डिंग कितने समय तक संरक्षित रखी जा रही है। इसी उद्देश्य से डीजीपी को पूरे राज्य में तथ्यात्मक जांच (Fact-Finding Exercise) कर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्यों है यह आदेश महत्वपूर्ण?
पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे हिरासत में पारदर्शिता, मानवाधिकारों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय भी सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के संबंध में पहले दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। ऐसे में बॉम्बे हाईकोर्ट का यह आदेश पूरे महाराष्ट्र में इन निर्देशों के पालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा और पुलिस थानों में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
