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नन्हे कदमों को मिलेगा सीखने का नया साथी: KDMC की 34 बालवाड़ियों में वितरित होगी ‘जादुई पिटारा’ किट

KDMC ने 2026-27 के लिए 34 बालवाड़ियों में ‘जादुई पिटारा’ किट वितरित करने की पहल की है, जिससे बच्चों को खेल-आधारित और रोचक तरीके से सीखने का मौका मिलेगा। यह किट बच्चों के भाषा, रचनात्मकता और सामाजिक विकास को मजबूत करते हुए प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

Neha Sharma17 जुल. 2026, 03:51 PM IST
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नन्हे कदमों को मिलेगा सीखने का नया साथी: KDMC की 34 बालवाड़ियों में वितरित होगी ‘जादुई पिटारा’ किट
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) ने प्रारंभिक शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 के लिए महानगरपालिका शिक्षा विभाग की 34 बालवाड़ियों (प्री-स्कूल) के विद्यार्थियों को महिला एवं बाल कल्याण विभाग के माध्यम से ‘जादुई पिटारा’ (Jadui Pitara) किट उपलब्ध कराई जाएगी।

 क्या है ‘जादुई पिटारा’ किट?
‘जादुई पिटारा’ बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक शैक्षणिक किट है। इसमें खेल-आधारित शिक्षण सामग्री, चित्र कार्ड, कहानियां, पहेलियां, गतिविधि सामग्री और अन्य शिक्षण संसाधन शामिल होते हैं, जो बच्चों की रचनात्मकता, भाषा, संज्ञानात्मक क्षमता और सामाजिक कौशल को विकसित करने में सहायक होते हैं।

 परियोजना का उद्देश्य 
इस पहल का उद्देश्य बालवाड़ी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और आनंददायक शिक्षा को बढ़ावा देना है। खेल-खेल में सीखने की अवधारणा के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करना और उन्हें स्कूल के शुरुआती वर्षों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।

 बच्चों को होंगे ये लाभ
  • खेल-आधारित और रुचिकर शिक्षण।
  • भाषा और संचार कौशल का विकास।
  • रचनात्मक और तार्किक सोच को बढ़ावा।
  • सामाजिक और भावनात्मक विकास में सहायता।
  • प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

 शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
महानगरपालिका का मानना है कि आधुनिक शिक्षण सामग्री के उपयोग से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ेगी और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

34 बालवाड़ियों में ‘जादुई पिटारा’ किट उपलब्ध कराने की यह पहल न केवल बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाएगी, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।