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ISRO से 120 वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद सरकार ने सख्त किए नियम l

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से बढ़ते इस्तीफों के बीच केंद्र सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं। अब ‘ग्रुप A’ वैज्ञानिकों के इस्तीफे सीधे स्वीकार नहीं होंगे और इसके लिए इसरो मुख्यालय की मंजूरी जरूरी होगी। यह फैसला गगनयान और चंद्रयान जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए लिया गया है।

Kashish Rai17 जुल. 2026, 04:00 PM IST
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ISRO से 120 वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद सरकार ने सख्त किए नियम l

नई दिल्ली: देश के प्रमुख अंतरिक्ष संगठन ISRO से बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के इस्तीफे सामने आने के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। पिछले एक साल में करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों द्वारा संगठन छोड़ने की घटनाओं ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर चिंता बढ़ाई है, बल्कि इससे कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं की निरंतरता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतरिक्ष विभाग (Department of Space - DOS) ने 14 जुलाई को एक अहम आंतरिक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें इस्तीफे से जुड़े नियमों को सख्त किया गया है। नए निर्देशों के अनुसार, अब ‘ग्रुप A’ श्रेणी के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हर इस्तीफे को इसरो मुख्यालय की समीक्षा और मंजूरी के बाद ही स्वीकार किया जाएगा।


सरकार का यह फैसला खासतौर पर उन वैज्ञानिकों पर लागू होगा जो देश की महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े हैं, जैसे गगनयान मिशन, चंद्रयान-3 और अन्य भविष्य की अंतरिक्ष योजनाएं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वैज्ञानिक का इस्तीफा तब तक स्वीकार न किया जाए, जब तक वह संबंधित मिशन या परियोजना पूरी न कर ले। साथ ही, सभी मामलों को विभाग को विस्तृत सिफारिश के साथ भेजना अनिवार्य किया गया है।


इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने भी इस्तीफों की बढ़ती संख्या को स्वीकार किया है, हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि इससे संगठन के कामकाज में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि देश की अहम अंतरिक्ष परियोजनाएं बिना किसी रुकावट के समय पर पूरी हो सकें।


गौरतलब है कि हाल के महीनों में एलवीएम-3 (LVM-3), स्पाडेक्स  और चंद्रयान-3 जैसे मिशनों से जुड़े कई अनुभवी और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफे सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर, वेतन और वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री का बढ़ता आकर्षण भी इन इस्तीफों की एक बड़ी वजह हो सकता है।


सरकार के इस नए फैसले को एक संतुलित कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जहां एक ओर वैज्ञानिकों के अधिकारों को बनाए रखने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को सुरक्षित रखने पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है।