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लोकल ट्रेन में सीट को लेकर झगड़ा, मारपीट में 3 यात्री घायल; क्रॉस FIR दर्ज l
मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में एक बार फिर सीट को लेकर विवाद हिंसक झगड़े में बदल गया। सेंट्रल रेलवे की ट्रेन में हुए इस विवाद में तीन यात्री घायल हो गए, जिनमें एक को सिर पर गंभीर चोट आई है। घटना के बाद रेलवे पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर क्रॉस FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने लोकल ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

मुंबई: देश की सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल सेवा, मुंबई लोकल ट्रेन में एक बार फिर सीट को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। यह घटना सेंट्रल रेलवे की उस लोकल ट्रेन में हुई, जो छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से अंबरनाथ की ओर जा रही थी। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय प्रितेश कनोज़िया, जो टिटवाला का निवासी है, घाटकोपर स्टेशन से ट्रेन में सवार हुआ था और कल्याण की ओर जा रहा था। ट्रेन जब दिवा स्टेशन के पास पहुंची, तब डिब्बा काफी हद तक खाली हो चुका था। इसी दौरान प्रितेश एक सीट पर लेटकर आराम करने लगा। इसी बीच डोंबिवली के रहने वाले दो युवक ट्रेन में चढ़े और उन्होंने सीट को लेकर आपत्ति जताई। पहले मामूली कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला गर्मागर्म बहस में बदल गया। कुछ ही पलों में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई।
पुलिस के अनुसार, झगड़े के दौरान एक युवक ने हाथ में पहने कड़े (धातु का ब्रेसलेट) से प्रितेश के सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अन्य यात्रियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन तब तक तीन लोग चोटिल हो चुके थे।
ट्रेन के कल्याण स्टेशन पहुंचने पर घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। रेलवे पुलिस को घटना की सूचना मिलते ही जांच शुरू कर दी गई।
शुरुआत में एक पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में दूसरे पक्ष की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने क्रॉस FIR दर्ज की। फिलहाल दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं मुंबई लोकल ट्रेन में यात्रियों के बीच बढ़ते तनाव और अनुशासनहीनता को दर्शाती हैं। यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
