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लखनऊ के सीमैप वैज्ञानिकों ने खोजा बीपी का नेचुरल इलाज, साइलेंट किलर हाइपरटेंशन पर हल्दी का तगड़ा प्रहार।
लखनऊ के सीएसआईआर-सीमैप संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक शोध में यह खुलासा किया है कि घरेलू मसाले हल्दी का मानकीकृत अर्क उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के इलाज में नया मार्ग प्रशस्त कर सकता है। चूहों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि हल्दी में मौजूद विशेष तत्व रक्त संचार को सुचारू बनाने और संबंधित हार्मोन्स को संतुलित करने में बेहद प्रभावी हैं।

इस महत्वपूर्ण खोज से जुड़े विस्तृत शोध पत्र को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल 'फिटोथेरेपिया' (Fitoterapia) के जून 2026 के संस्करण (वॉल्यूम 193) में स्थान दिया गया है। सीएसआईआर-सीमैप लखनऊ के आणविक बायो-प्रोस्पेक्टिंग विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. देबब्रत चंदा के मार्गदर्शन में शोधकर्ता दिव्य मिश्रा, हिना इकबाल, पंकज यादव और उनकी टीम ने इस पर गहन अध्ययन किया है। शोध के परिणामों के अनुसार, हल्दी (हरिद्रा) के कंद से तैयार कर्क्युमिनॉइड्स (Curcuminoids) से समृद्ध मानकीकृत अर्क ने हाइपरटेंशन से पीड़ित चूहों में डीएचईए (DHEA यानी डीहाइड्रोएपिएंड्रोस्टेरोन) नामक खास स्टेरॉयड हार्मोन के स्तर को सामान्य बनाने का कार्य किया। वैज्ञानिक भाषा में डीएचईए रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने और उन्हें लचीला बनाए रखने में मदद करता है। इस अर्क के उपयोग से चूहों की हेमोडायनामिक्स (रक्त प्रवाह की गतिशीलता) से जुड़े विभिन्न शारीरिक मानकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह परिणाम बेहद आशाजनक हैं, लेकिन अभी यह परीक्षण केवल पशु मॉडल (चूहों) पर ही संपन्न हुआ है। इंसानों के लिए इसकी सुरक्षित और प्रभावी खुराक का निर्धारण करने तथा इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करने हेतु आने वाले समय में व्यापक क्लिनिकल ट्रायल (नैदानिक परीक्षणों) की आवश्यकता होगी।सीएसआईआर-सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देबब्रत चंदा ने अपने शोध पत्र में उल्लेख किया है कि हल्दी में मौजूद कर्क्युमिनॉइड्स में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। हमारे अनुसंधान में यह पाया गया है कि हल्दी का मानकीकृत अर्क उन जैविक तंत्रों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है जो सीधे तौर पर रक्तचाप के बढ़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के अनूठे संगम का परिणाम है, जो भविष्य में सुरक्षित हर्बल दवाओं के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
