politics

राशन योजना की पात्रता पर उठे सवाल, आय सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख करने की मांग

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत महाराष्ट्र में मुफ्त राशन के लिए लागू 59 हजार रुपये की वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करने की मांग उठी है। जनता दल (सेक्युलर) के मुंबई अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार बजाजपी ने राज्य सरकार से इस संबंध में जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर नियम में संशोधन नहीं किया गया तो बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।

Priyanka Gaikwad17 जुल. 2026, 04:17 PM IST
खबर शेयर करें:
राशन योजना की पात्रता पर उठे सवाल, आय सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख करने की मांग
मुंबई : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत मुफ्त राशन का लाभ पाने के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा निर्धारित 59 हजार रुपये की वार्षिक आय सीमा को लेकर विवाद गहरा गया है। जनता दल (सेक्युलर) के मुंबई अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार बजाजपी ने इसे वर्तमान समय के हिसाब से बेहद कम और अव्यावहारिक बताते हुए इसे बढ़ाकर ढाई लाख रुपये करने की मांग की है।
इस संबंध में उन्होंने राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को पत्र भेजा है। उनका कहना है कि महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और शहरी क्षेत्रों में बढ़ते खर्च के कारण हजारों जरूरतमंद परिवार सिर्फ कम आय सीमा की वजह से सरकारी राशन योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

बजाजपी ने कहा कि यदि अगले 30 दिनों के भीतर सरकार ने आय सीमा में संशोधन नहीं किया तो संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों के भोजन और जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पात्रता के मानदंड अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि महाराष्ट्र जैसे बड़े और आर्थिक रूप से विकसित राज्य में अब भी पुरानी आय सीमा लागू है। ऐसे में पात्रता की सीमा बढ़ाकर अधिक से अधिक गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।

हालांकि, इस मांग पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। फिलहाल यह एक मांग है और इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, जबकि पात्रता के मानदंड तय करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है।