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भारत को अपनी पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन, यह हरियाणा में 89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी।
यह टेक्नोलॉजी बिजली बनाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल करेगी, जिससे यह डीज़ल ट्रेनों का एक साफ़-सुथरा विकल्प बन जाएगी। यह ट्रेन हरियाणा में 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी।
Kalpana Gautam17 जुल. 2026, 04:18 PM IST

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। यह ट्रेन हरियाणा में नॉर्दर्न रेलवे के तहत 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी। भारत में पहली बार हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस टेक्नोलॉजी में बिजली बनाने के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल का इस्तेमाल होगा, जिससे यह डीज़ल ट्रेनों के मुकाबले ज़्यादा साफ़-सुथरा विकल्प बन जाएगी। इस प्रोजेक्ट में हाइड्रोजन को स्टोर करने और रिफ़्यूलिंग की सुविधाएँ भी शामिल हैं।
एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार की गई यह ट्रेन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने और भारत में पर्यावरण के अनुकूल रेल यात्रा की भविष्य की योजनाओं को सपोर्ट करने में मदद करेगी।
हाइड्रोजन ट्रेन की मुख्य विशेषताएं:
- 1. 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन।
- 2. 1200 kW के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलने वाली।
- 3. 110 kmph की डिज़ाइन स्पीड के साथ, अधिकतम 75 kmph की रफ़्तार से चलने की मंज़ूरी।
- 4. लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता।
- 5. इसे डिज़ाइन स्टेज से लेकर प्रोटोटाइप बनाने तक विकसित किया गया है।
- 6. यह जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगा और बीच के स्टेशनों पर भी रुकेगा।
- प्रस्तावित स्टॉप: जींद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, ईसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंद्राई हॉल्ट, राबराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू।
किन अन्य देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हैं?
इस कदम के साथ, भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं। इन देशों में जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं। जर्मनी दुनिया की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन, 'एल्सटॉम कोराडिया आईलिंट' (Alstom Coradia iLint) को चलाने वाला पहला देश था। 2022 में, इस ट्रेन ने बिना दोबारा ईंधन भरे 1,175 किलोमीटर की रिकॉर्ड यात्रा पूरी की। लोअर सैक्सनी में ब्रेमरवोर्डे रूट पर चलने के लिए बनाई गई ये ट्रेनें, डीज़ल से चलने वाली ट्रेनों के विकल्प के तौर पर साफ़-सुथरी ज़ीरो-एमिशन टेक्नोलॉजी के साथ शुरू की गई थीं।
इसके अलावा, जर्मनी के इस साल 'सुडोस्टबायर्नबान' (Sudostbayernbahn) नेटवर्क पर हाइड्रोजन से चलने वाली तीन ट्रेनें शुरू करने की भी उम्मीद है। 'हाइड्रोजन यूरोप' वेबसाइट के अनुसार, ये ट्रेनें 32.2 किलोमीटर लंबे मुहलडॉर्फ-टुब्लिंग-बर्गहाउज़ेन रूट पर चलेंगी और ज़ीरो-एमिशन (बिना प्रदूषण वाली) यात्रा के लिए छत पर लगे फ्यूल सेल और लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल करेंगी।
खबरों के मुताबिक, जापान में 2027 फाइनेंशियल ईयर के आखिर तक पहली हाइड्रोजन हाइब्रिड ट्रेन आ जाएगी। यह ट्रेन टोक्यो के पास कानागावा प्रीफेक्चर में त्सुरुमी और नानबू लाइनों पर चलेगी और इसे "हाइबारी" (Hybari) ट्रेन के नाम से जाना जाएगा। 2024 में, कैलिफ़ोर्निया ने सैन बर्नार्डिनो में अमेरिका की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन शुरू की, जिसे ज़ेमु (Zemu) के नाम से जाना जाता है।
