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महाराष्ट्र में कैब-टैक्सी के लिए नए नियम लागू: मराठी भाषा का ज्ञान और डोमीसाइल प्रमाणपत्र हुआ अनिवार्य।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने राज्य में ऐप-आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं के लिए नई एग्रीगेटर नीति की घोषणा की है। इसके तहत व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए पब्लिक सर्विस व्हीकल ऑथराइजेशन (PSVA) बैज प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए 15 साल का राज्य में निवास (डोमीसाइल) और मराठी भाषा की परीक्षा पास करना आवश्यक है। नियमों का उल्लंघन करने या मराठी परीक्षा में फेल होने पर चालकों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। इसके साथ ही यात्रियों और चालकों के हितों की सुरक्षा के लिए किराए, वर्किंग आवर्स और सुरक्षा से जुड़े कड़े नियम तय किए गए हैं।

Anshuman Mishra17 जुल. 2026, 04:18 PM IST
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महाराष्ट्र में कैब-टैक्सी के लिए नए नियम लागू: मराठी भाषा का ज्ञान और डोमीसाइल प्रमाणपत्र हुआ अनिवार्य।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में यातायात व्यवस्था को सुधारने और यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए नई एग्रीगेटर कैब नीति को मंजूरी दे दी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य के भीतर ओला, उबर या रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं में वाहन चलाने के लिए चालकों के पास महाराष्ट्र का डोमीसाइल प्रमाणपत्र और पब्लिक सर्विस व्हीकल ऑथराइजेशन (PSVA) बैज होना अनिवार्य होगा। सरकार ने गैर-मराठी चालकों को व्यावहारिक मराठी सीखने के लिए समय दिया है, जिसके बाद एक व्यावहारिक भाषा परीक्षण आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा को पास न करने वाले चालकों के परमिट और लाइसेंस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा रद्द कर दिए जाएंगे। इस कड़े कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चालक स्थानीय यात्रियों से प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें।


इस नीति के लागू होने से जहां एक ओर यात्री संघों ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर चालक यूनियनों और विशेषकर प्रवासी चालकों में कुछ चिंताएं हैं। मुंबई, पुणे और नासिक जैसे बड़े शहरों में काम करने वाले प्रवासी चालकों के संगठनों का मानना है कि डोमीसाइल प्रमाणपत्र तुरंत हासिल करना एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है, जिससे शुरुआत में सड़कों पर कैब की कमी हो सकती है और यात्रियों का वेटिंग टाइम बढ़ सकता है। इस पर यूनियन नेताओं ने सरकार से मांग की है कि नियमों को अचानक थोपने के बजाय चालकों को आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए पर्याप्त और पारदर्शी समय दिया जाए। इसके अतिरिक्त, सरकार ने फ्लीट एकाधिकार को रोकने के लिए भी नियम बनाए हैं, जिसके तहत मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में कोई भी एक मालिक एक ऐप पर अधिकतम 50 वाहन ही पंजीकृत करा सकता है। सरकार एक केंद्रीय रीयल-टाइम पोर्टल भी विकसित कर रही है जिससे वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और चालकों के सत्यापन की लाइव निगरानी की जा सकेगी। परिवहन मंत्री के अनुसार, यह नीति महाराष्ट्र में एक सुरक्षित, जवाबदेह और पारदर्शी परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी।


यह नीति क्या है?

  • लाइसेंस और पंजीकरण: सभी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा और उन्हें एक विशिष्ट लाइसेंस आईडी नंबर दिया जाएगा।
  • चालकों के लिए नियम: प्रत्येक चालक को महाराष्ट्र का निवासी होना चाहिए और उसे मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए। कोई भी चालक लगातार 12 घंटे से अधिक ड्यूटी पर नहीं रह सकता।
  • किराए का निर्धारण: सर्ज प्राइसिंग (मांग बढ़ने पर किराया बढ़ाना) को सामान्य किराए के अधिकतम 1.5 गुना तक सीमित कर दिया गया है। कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले डिस्काउंट को भी बेस फेयर से अधिकतम 25% नीचे तक सीमित किया गया है।
  • कमाई का हिस्सा: एग्रीगेटर कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कुल किराए का कम से कम 80% हिस्सा सीधे चालकों को मिले।
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यह क्यों महत्वपूर्ण है?
लंबे समय से बिना किसी ठोस नियमन के चल रहे ऐप-आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेक्टर के कारण यात्रियों और स्थानीय चालकों दोनों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। यह नीति निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
  • अनधिकृत परिवहन पर रोक: राज्य में करीब 4 से 4.5 लाख अवैध बाइक-टैक्सी चल रही थीं, जिन्हें अब कानून के दायरे में लाया जाएगा।
  • सुरक्षा और जवाबदेही: पुलिस वेरिफिकेशन और बैज अनिवार्य होने से आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगेगी और चालकों की पहचान सुनिश्चित होगी।
  • यात्रियों का शोषण रोकना: कैब कंपनियों द्वारा मनमाना किराया वसूलने और ड्राइवरों द्वारा यात्रियों से जबरन बख्शीश (टिप) मांगने की शिकायतों के बाद इस नीति की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
यात्रियों के लिए लाभ:
  • सर्ज प्राइसिंग सीमित होने से जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
  • महिलाओं की सुरक्षा के लिए राइड-पूलिंग के दौरान महिला चालक या महिला सह-यात्री चुनने का विकल्प मिलेगा।
  • चौबीस घंटे चालू रहने वाला कस्टमर सपोर्ट और शिकायत निवारण तंत्र मिलेगा।
  • ऐप्स और वेबसाइट्स मराठी, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध होंगी।

चालकों के लिए लाभ:
  • कंपनियों की मनमानी कमीशन कटौती पर रोक लगेगी और 80% कमाई सुरक्षित रहेगी।
  • चालकों और सह-यात्रियों के लिए अनिवार्य बीमा कवरेज का लाभ मिलेगा।
  • चालकों के सामाजिक कल्याण के लिए बनाए जा रहे वेलफेयर फंड से उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।

राज्य और समाज के लिए लाभ:
  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए और सुरक्षित अवसर पैदा होंगे।
  • इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाहनों को बढ़ावा मिलने से प्रदूषण में कमी आएगी।
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