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BBA, BCA और BMS की फीस कम होने से नाखुश कॉलेज; FRA के फैसले को देंगे चुनौती!
महाराष्ट्र में FRA ने BBA, BMS और BCA जैसे लोकप्रिय कोर्सेज की सालाना फीस को नियंत्रित करते हुए न्यूनतम ₹7,000 से अधिकतम ₹70,000 तक सीमित कर दिया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल है, इसलिए वे इस फैसले की समीक्षा (Review) की मांग कर रहे हैं, जबकि FRA का कहना है कि यह निर्णय कॉलेजों द्वारा दी गई खर्चों की जानकारी और भविष्य की महंगाई को ध्यान में रखकर लिया गया है।
Anshuman Mishra17 जुल. 2026, 04:18 PM IST

मुंबई: महाराष्ट्र में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Professional Courses) की फीस को लेकर कॉलेजों और फीस नियामक प्राधिकरण (Fees Regulating Authority - FRA) के बीच तनातनी शुरू हो गई है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के दायरे में आने के बाद, FRA ने पहली बार BBA, BMS और BCA जैसे अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस को नियंत्रित करने का फैसला किया है। हालांकि, प्राधिकरण का यह फैसला कॉलेजों को रास नहीं आ रहा है और कई संस्थानों का दावा है कि तय की गई फीस संरचना वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
इससे पहले इन पाठ्यक्रमों के लिए फीस निर्धारण का कोई वैज्ञानिक या एकसमान (Uniform) आधार नहीं था। कुछ कॉलेज विश्वविद्यालय द्वारा तय की गई फीस का पालन करते थे, तो कुछ अपनी मर्जी से मनमानी फीस वसूलते थे। FRA ने अब संस्थानों द्वारा किए गए वास्तविक खर्चों का आकलन करके एक नई फीस तय की है:
BBA प्रोग्राम: खर्च के आधार पर फीस ₹25,000 से लेकर ₹70,000 के बीच तय की गई है.
BMS और BCA प्रोग्राम: अधिकांश कॉलेजों के लिए यह फीस ₹7,000 से ₹25,000 के बीच निर्धारित की गई है.
कड़ा नियम:FRA के नियमों के अनुसार, कोई भी कॉलेज प्राधिकरण द्वारा तय की गई फीस से एक भी रुपया अधिक नहीं वसूल सकता है।
कॉलेजों का विरोध और FRA की दलील
एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "₹25,000 सालाना की फीस में कोर्स चलाना व्यावहारिक नहीं है। इतने कम पैसों में अच्छे शिक्षक रखना और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर देना नामुमकिन है। प्राधिकरण ने हमारे खर्चों को तीन साल के छात्रों के बैच में विभाजित कर दिया, जबकि हमने केवल एक वर्ष का विवरण दिया था।"
दूसरी ओर, FRA के सदस्य ने कॉलेजों के दावों को खारिज करते हुए कहा, "कई संस्थानों ने केवल प्रथम वर्ष के छात्रों के आधार पर खर्च की गणना की थी, जबकि फीस प्रस्तावों में तीनों वर्षों की लागत शामिल होनी चाहिए। चूंकि ये कोर्स पहली बार इस दायरे में आए हैं, इसलिए कॉलेजों ने प्रस्ताव जमा करने में गलतियां की हैं। हमने छह ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित किए थे। हमने फीस तय करते समय भविष्य की मुद्रास्फीति (Inflation) को भी ध्यान में रखा है।"
यदि कॉलेज इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे अधिसूचना के 15 दिनों के भीतर समीक्षा (Review) के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए प्रति कोर्स ₹50,000 की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी.
यह क्या है?
यह कदम BBA (Bachelor of Business Administration), BMS (Bachelor of Management Studies), और BCA (Bachelor of Computer Applications) पाठ्यक्रमों को AICTE (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) के तहत 'प्रोफेशनल कोर्सेज' के रूप में मान्यता देने के बाद उठाया गया नियामक कदम है। इसके तहत अब इन कोर्सेज की फीस का निर्धारण सरकार की नियामक संस्था (FRA) करेगी, न कि कॉलेज अपनी मर्जी से करेंगे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मनमानी फीस पर लगाम: अब तक इन कोर्सेज के लिए कॉलेज विद्यार्थियों से मनचाही रकम वसूलते थे। इस फैसले से उच्च शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगेगी।
समानता और पारदर्शिता: सभी कॉलेजों में फीस का एक वैज्ञानिक और पारदर्शी आधार तैयार होगा।
नियामक ढांचा: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मैनेजमेंट और कंप्यूटर पाठ्यक्रमों को इंजीनियरिंग या मेडिकल की तरह एक व्यवस्थित फ्रेमवर्क के तहत लाया जा रहा है।
इसके क्या फायदे हैं?
छात्रों और अभिभावकों के लिए फायदे:
1.सस्ती उच्च शिक्षा: BBA, BMS और BCA जैसे करियर-ओरिएंटेड कोर्स अब आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की पहुंच में होंगे।
2.आर्थिक शोषण से मुक्ति: कॉलेजों द्वारा लिए जाने वाले हिडन चार्ज या ओवर-चार्जिंग पर पूरी तरह रोक लगेगी।
शिक्षा व्यवस्था के लिए फायदे:
1.जवाबदेही: कॉलेजों को अपने खर्चों और इंफ्रास्ट्रक्चर का सही और पारदर्शी हिसाब देना होगा।
2.गुणवत्ता मानक: AICTE और FRA के नियमों के तहत आने से कोर्सेज की राष्ट्रीय स्तर पर साख और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
