crime
कॉलेज ट्रस्टी पर यौन उत्पीड़न का मामला दोबारा खुलेगा, अदालत ने पुलिस को नई जांच के आदेश दिए।
मुंबई की 52वीं कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 7 जुलाई को पुलिस की 'बी समरी रिपोर्ट' खारिज करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोपों की पर्याप्त जांच नहीं की गई।
Sonali17 जुल. 2026, 04:18 PM IST

मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने शहर के एक स्कूल और जूनियर कॉलेज के ट्रस्टी पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट (बी समरी रिपोर्ट) को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि पुलिस ने शिकायत की समुचित जांच किए बिना मामले को बंद करने की कोशिश की थी। इसलिए जांच अधिकारी को नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया गया है।
52वीं कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डी. एस. शर्मा ने 7 जुलाई को यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने शिकायत को झूठा बताने से पहले पर्याप्त कारण दर्ज नहीं किए और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन भी नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता, जो शहर के एक स्कूल और जूनियर कॉलेज की प्राचार्य हैं, ने आरोप लगाया कि सितंबर 2017 में संस्थान से जुड़ने के कुछ महीनों बाद कॉलेज के ट्रस्टी ने उनका शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया।
महिला के अनुसार, ट्रस्टी ने अपने कार्यालय में कई बार अनुचित तरीके से उन्हें छुआ, आपत्तिजनक संदेश भेजे, यौन संबंध बनाने का दबाव डाला और एक बार घर छोड़ने के बजाय उन्हें अपने निवास पर ले जाकर अनुचित व्यवहार किया।
पुलिस ने क्या किया?
मामले की जांच के बाद आरसीएफ पुलिस ने 'बी समरी रिपोर्ट' दाखिल करते हुए शिकायत को "झूठी और मनगढ़ंत" बताया। शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि जांच अधूरी थी और जांच अधिकारी ने आरोपी के पक्ष पर अधिक भरोसा किया।
अदालत ने क्या कहा?
शिकायतकर्ता के वकील देवेंद्र शुक्ला ने अदालत को बताया कि स्कूल प्रशासन द्वारा शिकायतकर्ता के खिलाफ की गई विभागीय जांच भी अवैध थी, क्योंकि उसे शिक्षा विभाग की अनिवार्य मंजूरी प्राप्त नहीं थी।
अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए पाया कि शिक्षा विभाग ने न तो किसी विभागीय जांच की अनुमति दी थी और न ही शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई जांच समिति गठित की थी। ऐसे में विभागीय जांच के आधार पर शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि सेवा संबंधी विभागीय जांच का स्वरूप सिविल होता है और उसका आपराधिक जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
महिला की गवाही भी हो सकती है पर्याप्त
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में केवल पीड़िता की विश्वसनीय गवाही के आधार पर भी दोषसिद्धि संभव है। इसलिए किसी शिकायत को झूठा घोषित करने से पहले जांच अधिकारी के लिए ठोस और स्पष्ट कारण दर्ज करना आवश्यक है।
मामले का विवरण:
* न्यायालय: 52वीं कुर्ला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत, मुंबई
* न्यायाधीश: डी. एस. शर्मा
* आदेश की तारीख: 7 जुलाई
* मामला: स्कूल एवं जूनियर कॉलेज के ट्रस्टी पर यौन उत्पीड़न के आरोप
* आदेश: बी समरी रिपोर्ट खारिज, नए सिरे से जांच के निर्देश
