वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक संपर्क से हो सकता है डिमेंशिया, WHO की नई गाइडलाइंस में बड़ी चेतावनी।
नया जोखिम कारक: WHO ने वर्ष 2019 के बाद पहली बार डिमेंशिया रोकथाम गाइडलाइंस में बड़ा संशोधन करते हुए वायु प्रदूषण को मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खतरे के रूप में शामिल किया है।
रोकथाम की उम्मीद: रिपोर्ट के अनुसार, यदि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान और वायु प्रदूषण जैसे 14 दैनिक व पर्यावरणीय कारकों को समय रहते नियंत्रित किया जाए, तो डिमेंशिया के 45% मामलों को रोका या टाला जा सकता है।
सप्लीमेंट्स पर रोक: बिना किसी डॉक्टरी जांच या शरीर में कमी (Deficiency) के, डिमेंशिया से बचने के लिए ओमेगा-3 या विटामिन सप्लीमेंट्स के नियमित सेवन को WHO ने गैर-जरूरी बताया है।
नई दिल्ली:विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मस्तिष्क स्वास्थ्य को लेकर एक नई वैश्विक गाइडलाइन जारी की है, जिसने पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से इंसान में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। यह पहली बार है जब वैश्विक स्वास्थ्य संगठन ने खराब हवा को डिमेंशिया के आधिकारिक जोखिम कारकों में शामिल किया है।
14 कारकों को बदलकर टाले जा सकते हैं 45% मामले
WHO ने स्पष्ट किया है कि भले ही डिमेंशिया का कोई परमानेंट इलाज (Cure) नहीं है, लेकिन इसके 45% मामलों को जीवनशैली में बदलाव करके रोका या विलंबित (Delay) किया जा सकता है । हालिया 'लैंसेट कमीशन 2024' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए WHO ने 14 ऐसे फैक्टर्स बताए हैं जिन्हें बदला जा सकता है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, सामाजिक अलगाव और अब सबसे प्रमुख रूप से वायु प्रदूषण शामिल हैं।
विटामिन और ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स पर WHO की दोटूक:
बाजार में दिमाग तेज करने और भूलने की बीमारी से बचाने के नाम पर बिकने वाले विटामिन बी, विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड सप्लीमेंट्स को लेकर WHO ने कड़ा रुख अपनाया है। गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि यदि किसी मरीज में इन विटामिन्स की क्लीनिकल कमी (Diagnosed Deficiency) नहीं पाई जाती है, तो डिमेंशिया से बचने के लिए इनका अंधाधुंध सेवन न करें, क्योंकि इसके कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं कि ये सप्लीमेंट्स डिमेंशिया को रोक सकते हैं।
भारतीय आबादी के लिए खतरे की घंटी
यह रिपोर्ट भारत के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। 'BMJ पब्लिक हेल्थ' के एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय आबादी में आउटडोर के साथ-साथ इनडोर वायु प्रदूषण भी डिमेंशिया का ग्राफ तेजी से बढ़ा रहा है। वर्तमान में भारत के लगभग 7.4% बुजुर्ग (करीब 88 लाख लोग) इस गंभीर मानसिक विकार से जूझ रहे हैं और आबादी की उम्र बढ़ने के साथ यह संख्या और भयावह हो सकती है।
डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयिसस (महानिदेशक, WHO) का बयान: "हम आज पहले से कहीं अधिक जानते हैं कि डिमेंशिया के रिस्क को क्या चीजें बढ़ाती हैं। ये गाइडलाइंस उसी वैज्ञानिक ज्ञान को धरातल पर उतारने का प्रयास हैं ताकि दुनिया के देश तुरंत अपने नागरिकों के दिमागी स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नीतियां बना सकें।"*
बचाव के लिए WHO की सिफारिशें:
WHO ने देशों और नागरिकों को सलाह दी है कि वे नियमित शारीरिक व्यायाम करें, तंबाकू और शराब से दूरी बनाएं, पौष्टिक आहार लें, सामाजिक रूप से सक्रिय रहें और अपने ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल को हमेशा नियंत्रित रखें। साथ ही, सरकारों को वायु गुणवत्ता (Air Quality) में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।
यह क्या है?
यह वैश्विक स्वास्थ्य संस्था WHO की ओर से जारी एक नई स्वास्थ्य चेतावनी और दिशानिर्देश है।
डिमेंशिया (Dementia): यह मस्तिष्क से जुड़ी एक ऐसी प्रगतिशील बीमारी (Progressive Brain Disorder) है जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के सामान्य कार्यों को करने की क्षमता को खत्म कर देती है। अल्जाइमर (Alzheimer's) इसका सबसे आम रूप है, जो डिमेंशिया के कुल मामलों का 60% से 70% हिस्सा होता है।
शोध का आधार: यह रिपोर्ट 2024 लैंसेट कमीशन (Lancet Commission) के निष्कर्षों और 'BMJ पब्लिक हेल्थ' के अध्ययनों पर आधारित है, जो प्रमाणित करते हैं कि लंबे समय तक जहरीली हवा में सांस लेने से हमारी कॉग्निटिव क्षमता (मानसिक क्षमता) घटने लगती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत पर बड़ा संकट: भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण यहां डिमेंशिया का बोझ खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। एक नेशनल सर्वे (Alzheimer's & Dementia जर्नल) के अनुसार, भारत में 60 वर्ष से ऊपर के लगभग 88 लाख लोग (8.8 मिलियन) डिमेंशिया से पीड़ित हैं।
इंडोर और आउटडोर प्रदूषण: भारत में सिर्फ बाहर का स्मॉग ही नहीं, बल्कि घरों के अंदर का वायु प्रदूषण (जैसे रसोई का धुआं, अगरबत्ती, वेंटिलेशन की कमी) भी बुजुर्गों के दिमाग को नुकसान पहुंचा रहा है।
भारी आर्थिक बोझ: दुनिया भर में 5.7 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी के साथ जी रहे हैं। डिमेंशिया के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हर साल $1.3 ट्रिलियन (करीब 108 लाख करोड़ रुपये) का आर्थिक बोझ पड़ता है, जिसमें से आधा खर्च परिवारों द्वारा बिना किसी वेतन के की जाने वाली देखभाल (Unpaid Care) में चला जाता है।