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प्रॉपर्टी बेचने पर अब बचेगा ज्यादा टैक्स, CBTD ने जारी किया नया इंडेक्स।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स जारी कर दिया है, जिससे देश में पुरानी प्रॉपर्टी बेचने वाले टैक्सपेयर्स को चालू वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स पर बड़ी बचत करने का मौका मिलेगा। आयकर विभाग की ओर से जारी यह नया इंडेक्स एक अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

Vindhya Dubey17 जुल. 2026, 05:38 PM IST
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प्रॉपर्टी बेचने पर अब बचेगा ज्यादा टैक्स, CBTD ने जारी किया नया इंडेक्स।

इस बदलाव से उन लोगों को सीधा फायदा होगा जो अपनी दशकों पुरानी जमीन या मकान को बेचने की योजना बना रहे हैं क्योंकि बढ़ा हुआ इंडेक्स महंगाई के अनुपात में खरीद लागत को बढ़ा देगा, जिससे कागजी मुनाफा कम दिखेगा और टैक्स की देनदारी घट जाएगी। बजट 2024 में इंडेक्सेशन के नियमों में हुए बड़े बदलावों के बाद इस साल की अधिसूचना उन टैक्सपेयर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है जो पुरानी संपत्तियों पर टैक्स छूट का लाभ उठाना चाहते हैं।


आयकर विभाग की आधिकारिक अधिसूचना संख्या 85/2026 के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स यानी सीआईआई को बढ़ाकर 384 तय किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 376 पर था। सीआईआई में करीब 2.13 प्रतिशत की यह बढ़ोतरी बीते एक साल में बाजार में आई महंगाई को दर्शाती है। नियम के मुताबिक, इसका उपयोग मुख्य रूप से जमीन-जायदाद, अनलिस्टेड शेयर या सोने जैसी संपत्तियों की बिक्री पर होने वाले मुनाफे की गणना के लिए किया जाता है।


टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट 2024 के नए प्रावधानों के तहत हालांकि नए एसेट्स पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है, लेकिन 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई पुरानी संपत्तियों को बेचने पर पुराने और नए नियमों में से किसी एक को चुनने की छूट दी गई है। इसके तहत निवासी नागरिक और हिंदू अविभाजित परिवार या तो बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की फ्लैट दर से टैक्स चुका सकते हैं या फिर नए सीआईआई 384 का लाभ उठाते हुए इंडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत की दर से टैक्स का भुगतान कर सकते हैं।


आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अधिसूचना उन करदाताओं को स्पष्टता प्रदान करती है जो चालू वित्त वर्ष में अपनी संपत्तियों का हस्तांतरण कर रहे हैं। वहीं इस मामले पर एएमआरजी ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि इस इंडेक्स के बढ़ने से यह साफ होता है कि सरकार नई टैक्स व्यवस्था के तहत भी महंगाई के हिसाब से टैक्स छूट का गंभीर लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे बताया कि इससे टैक्स भरने वालों, वैल्यू निकालने वालों और टैक्स प्रोफेशनल्स को मुनाफे का सही हिसाब लगाने में आसानी होगी और आपसी विवाद भी कम होंगे।