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जज उत्तम आनंद की हत्या मामले में दोषियों को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा को सही ठहराया
धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की 2021 में मॉर्निंग वॉक के दौरान ऑटो से कुचलकर हत्या करने के मामले में हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। अदालत ने इसे केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि न्यायपालिका पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
Sonali18 जुल. 2026, 07:09 PM IST

झारखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित धनबाद के तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) उत्तम आनंद हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने 14 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए दोषियों लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा की आपराधिक अपील खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि न्यायपालिका पर सीधा हमला थी। अदालत ने टिप्पणी की कि इस अपराध का दुस्साहस न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष और वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध होने पर अपराध के पीछे के मकसद (मोटिव) का महत्व कम हो जाता है।
क्या था पूरा मामला?
28 जुलाई 2021 की सुबह धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद रोज की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के पास एक ऑटो-रिक्शा ने उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मारी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सदर अस्पताल, धनबाद ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया क्योंकि फुटेज में ऑटो न्यायाधीश की ओर जानबूझकर मुड़ता दिखाई दिया।
जांच कैसे आगे बढ़ी?
शुरुआत में धनबाद पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) और फिर 3 अगस्त 2021 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई। सीबीआई की जांच के बाद लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया गया। वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
ट्रायल कोर्ट ने 6 अगस्त 2022 को दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 (सामूहिक हत्या) और 201/34 (सबूत मिटाने) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, जब्त ऑटो-रिक्शा और फोरेंसिक रिपोर्ट एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। घटनास्थल से मिले टूटे हुए फाइबर ऑटो के इंडिकेटर से मेल खाते हैं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे अपराध सिद्ध किया है और ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
यह मामला पूरे देश में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़ी बहस का कारण बना था। घटना के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इस फैसले के बाद एक बार फिर न्यायपालिका की सुरक्षा और न्यायिक अधिकारियों के संरक्षण का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
