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KEM अस्पताल में आधी रात छापा, स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष ने पकड़ी बड़ी खामियां

मुंबई के प्रसिद्ध KEM अस्पताल में मरीजों के इलाज में हो रही भारी देरी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायत मिलने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे ने गुरुवार मध्यरात्रि को औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक दौरे के दौरान अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और मरीजों के परिजनों के साथ कर्मचारियों के दुर्व्यवहार की बात सामने आई है।

Vindhya Dubey18 जुल. 2026, 07:09 PM IST
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KEM अस्पताल में आधी रात छापा, स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष ने पकड़ी बड़ी खामियां

यह मामला मुंबई के सरकारी और नागरिक निकायों द्वारा संचालित अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। आम जनता जो बेहतर और मुफ्त इलाज की उम्मीद में इन बड़े अस्पतालों का रुख करती है, उन्हें घंटों इंतजार और प्रशासनिक उदासीनता का सामना करना पड़ता है। मॉनसून के इस मौसम में जब बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, तब ऐसी खामियां सीधे तौर पर मरीजों की जान जोखिम में डालती हैं। स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे ने बताया कि उन्होंने खुद एक मरीज को सुबह करीब साढ़े दस बजे अस्पताल भेजा था, लेकिन रात दस बजे तक भी उसे भर्ती नहीं किया गया। जब उन्होंने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की, तो ऑन-कॉल डॉक्टर ने फोन पर बात करने से मना कर दिया और लैंडलाइन नंबर पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह खुद रात बारह बजे अस्पताल के वार्ड नंबर चार में पहुंचे।


अस्पताल के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान ऑन-कॉल मेडिकल ऑफिसर और कई अन्य जिम्मेदार डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद मिले। अस्पताल के कर्मचारियों ने मरीज की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी देने से इनकार कर दिया और उनका व्यवहार भी बेहद असहयोगपूर्ण रहा। पूछने पर स्टाफ द्वारा बताया गया कि डॉक्टर भोजन के लिए गए हैं, जिस पर हरीश भांदिर्गे ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं में डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता अनिवार्य है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करने और दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।


दूसरी तरफ, KEM अस्पताल के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. हरीश पाठक ने अस्पताल प्रबंधन का बचाव करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। डॉ. हरीश पाठक ने कहा कि हमारे लिए सभी मरीज एकसमान हैं। अध्यक्ष द्वारा भेजे गए मरीज के खून की जांच, अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक टेस्ट समय पर किए जा रहे थे। इन जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने में समय लगता है और इसे इलाज में देरी या लापरवाही नहीं माना जा सकता। यदि बिना जांच के मरीज को सीधे वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता, तो अन्य आवश्यक रिपोर्ट आने में और देर हो जाती/ उन्होंने यह भी जोड़ा कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बहुत अधिक है और डॉक्टरों पर काम का भारी मानसिक दबाव रहता है, ऐसे में सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।