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चेंबूर हादसे से हिला प्रशासन: अब 29 लाख पेड़ों का होगा डिजिटल एक्स-रे

मुंबई महानगरपालिका ने शहर में लगातार हो रही पेड़ गिरने की दुखद घटनाओं और मासूमों की जान जाने के बाद एक बड़ा और सुधारात्मक कदम उठाया है। मुंबई में अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकने की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में महानगर के सभी 29 लाख पेड़ों का व्यापक हेल्थ चेकअप यानी स्वास्थ्य परीक्षण कराने का आधिकारिक निर्णय लिया गया है।

Vindhya Dubey18 जुल. 2026, 07:09 PM IST
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चेंबूर हादसे से हिला प्रशासन: अब 29 लाख पेड़ों का होगा डिजिटल एक्स-रे
यह ऐतिहासिक फैसला हाल ही में चेंबूर इलाके में एक स्कूल बस पर भारी-भरकम पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की दर्दनाक मौत और मानसून के शुरुआती दिनों में ही 830 से अधिक पेड़ों के धराशायी होने के बाद लिया गया है। शहर में बुनियादी ढांचे के विकास, विशेषकर सड़कों के कंक्रीटीकरण और विभिन्न उपयोगिताओं के लिए की जाने वाली अंधाधुंध खोदाई के कारण पेड़ों की जड़ों को पहुंच रहे नुकसान ने जनता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा रुख अपनाना पड़ा है।

इस व्यापक अभियान के तहत मुंबई के सभी 24 वार्डों में वृक्ष विशेषज्ञों (आर्बोरिस्ट) और वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) के कॉलेज छात्रों की विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। यह सर्वे पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी पद्धतियों पर आधारित होगा, जिसमें प्रत्येक पेड़ की आयु, उसकी प्रजाति, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और झुकाव का एक विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सर्वेक्षण के आधार पर पेड़ों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा: अत्यधिक खतरनाक, खतरनाक और पूरी तरह स्वस्थ पेड़। जो पेड़ अत्यधिक खतरनाक या अंदर से खोखले पाए जाएंगे, उन्हें सुरक्षा के लिहाज से तुरंत हटाया जाएगा अथवा उनकी वैज्ञानिक तरीके से छंटाई की जाएगी।


बीएमसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछली वृक्ष गणना के मुताबिक मुंबई में लगभग 29 लाख पेड़ हैं। हाल ही में 22 जून से 6 जुलाई के बीच शहर में 830 पेड़ या उनकी बड़ी शाखाएं गिरने की शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इनमें से 480 घटनाएं निजी परिसरों और सोसायटियों के भीतर हुईं, जिसने निजी संपत्ति मालिकों के बीच भी वृक्ष प्रबंधन के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर किया है।


बैठक के दौरान अतिरिक्त नगर आयुक्त अविनाश ढाकने ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि सड़क किनारे लगे कई पेड़ दशकों पुराने हैं। कंक्रीटीकरण के कारण उनकी जड़ों को हवा और पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि कई बार पेड़ों की आंतरिक सड़न को केवल बाहरी छंटाई से नहीं पकड़ा जा सकता, इसलिए अब उन्नत तकनीकों और स्वतंत्र विशेषज्ञों की मदद से वार्ड स्तर पर यह सघन जांच अभियान शुरू किया जा रहा है।


वहीं, मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। विशेष आम बैठक में उन्होंने कहा कि चेंबूर में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुई 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत का मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी जांच बीएमसी की आंतरिक कमेटी के बजाय आईआईटी बॉम्बे या वीजेटीआई जैसी प्रतिष्ठित स्वतंत्र तकनीकी संस्था से कराई जानी चाहिए। मेयर तावड़े ने घोषणा की कि वे इस संबंध में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही नगर आयुक्त को एक औपचारिक पत्र लिखने जा रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।