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डेड एंड पर सुरक्षित होगी ट्रेन यात्रा, दादर और बांद्रा टर्मिनस समेत कई स्टेशनों पर बदलेंगे पुराने बफर।

पश्चिम रेलवे मुंबई के व्यस्त डेड-एंड प्लेटफॉर्मों पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए 12.27 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुराने बफर्स की जगह नए, आधुनिक और उच्च क्षमता वाले हाइड्रोलिक बफर्स लगा रहा है। नए आरडीएसओ (RDSO) मानकों पर आधारित ये बफर 15 किमी/घंटे की रफ्तार से आती ट्रेन के झटके को आसानी से सोख सकते हैं और किसी भी बड़े हादसे में नुकसान को कम करने में सक्षम हैं।

Anshuman Mishra18 जुल. 2026, 07:10 PM IST
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डेड एंड पर सुरक्षित होगी ट्रेन यात्रा, दादर और बांद्रा टर्मिनस समेत कई स्टेशनों पर बदलेंगे पुराने बफर।

मुंबई: पश्चिम रेलवे, मुंबई सेंट्रल डिवीजन के तहत आने वाले दादर, बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, बोरीवली, वसई और विरार जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर नए और हाई-कैपेसिटी वाले हाइड्रोलिक बफर लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। हाल ही में चर्चगेट और मुंबई सेंट्रल के कुछ प्लेटफॉर्मों पर पुराने बफर्स को बदलकर नए हाइड्रोलिक बफर्स लगाने का काम किया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 12.2728 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, लंबी दूरी और लोकल ट्रेनों की सुरक्षा के लिए दादर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3, बांद्रा टर्मिनस पर 5, मुंबई सेंट्रल में 4 सहित बोरीवली में 2, वसई में 1 और विरार में 4 प्लेटफॉर्मों पर ये हाइड्रोलिक बफर इंस्टॉल किए जाएंगे।

यह क्या है?
रेलवे स्टेशनों के अंत में जहां पटरियां समाप्त हो जाती हैं (डेड-एंड), वहां ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुराने बफर्स को बदलकर नए हाइड्रोलिक बफर्स लगाए जा रहे हैं। यदि किसी कारणवश ट्रेन प्लेटफॉर्म के अंत तक पहुंच जाए, तो ये बफर उसके झटके को कम करते हैं और दुर्घटना की स्थिति में नुकसान को घटाने में मदद करते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेनों और स्टेशन की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए पश्चिम रेलवे ने पुराने बफर्स को प्राथमिकता के आधार पर नए हाइड्रोलिक बफर्स से बदलने का फैसला किया है। यह यात्रियों की सुरक्षा में एक बड़ा कदम होगा जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में जान-माल के बड़े नुकसान से बचा जा सकेगा।

इसके मुख्य लाभ और विशेषताएं
  •  ये बफर भारतीय रेलवे के नए मानकों (RDSO) के अनुसार बनाए गए हैं।
  •  यदि ट्रेन 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी बफर तक पहुंचती है, तो यह उसकी गति को सुरक्षित तरीके से रोक सकता है, जिससे ट्रेन के डिब्बों और बफर को बड़ा नुकसान नहीं होगा।
  •  ये लगभग 25 डिब्बों वाली, 1,300 टन से अधिक वजन की पूरी यात्री ट्रेन को भी सुरक्षित रूप से रोकने में सक्षम हैं।
  •  भारतीय रेलवे में चलने वाली लगभग सभी तरह की ट्रेनें और कोच (जैसे एलएचबी, आईसीएफ, ईएमयू, मेमू, डीएमयू और इंजन) इन बफर्स के साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
  •  इन्हें तेज गर्मी, ठंड, नमी और समुद्र किनारे की खारी हवा जैसी कठिन परिस्थितियों में भी काम करने के लिए तैयार किया गया है।
  •  इन नए हाइड्रोलिक बफर्स की उम्र कम से कम 20 साल होगी और किसी बड़ी दुर्घटना के अलावा शुरुआती 3 साल तक इसमें बड़े रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ेगी।
  •  इन्हें लाल और सफेद रिफ्लेक्टिव रंग से रंगा जाएगा, ताकि लोको पायलट को दूर से ही यह आसानी से दिखाई दे सकें।