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NEET-UG रिजल्ट: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मुश्किल होगी दाखिले की दौड़, कट-ऑफ में रिकॉर्ड उछाल।

NEET-UG 2026 परीक्षा में कुल 19.99 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक परीक्षा क्वालिफाई की है। इस बार सामान्य (General) कैटेगरी के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग कट-ऑफ 144 से बढ़कर 213 अंक हो गई है, जो अब तक की सबसे अधिक न्यूनतम कट-ऑफ है। कट-ऑफ में 69 अंकों की भारी बढ़ोतरी के कारण 600 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों के लिए भी सरकारी कॉलेजों में दाखिला पाना एक कड़ी चुनौती बन गया है।

Anshuman Mishra18 जुल. 2026, 07:10 PM IST
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NEET-UG रिजल्ट: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मुश्किल होगी दाखिले की दौड़, कट-ऑफ में रिकॉर्ड उछाल।

विशेष ब्यूरो, नई दिल्ली:- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा NEET-UG 2026 के परिणाम घोषित किए जाने के बाद देश भर के मेडिकल उम्मीदवारों के बीच हलचल तेज हो गई है। इस वर्ष मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के शेड्यूल का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है। इसका मुख्य कारण इस साल की क्वालिफाइंग कट-ऑफ में आया ऐतिहासिक उछाल है।

यह क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है? 
NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) भारत भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, और अन्य अलाइड कोर्सेज में प्रवेश के लिए एकमात्र केंद्रीय परीक्षा है।
  • प्रतिस्पर्धा का नया स्तर: कट-ऑफ बढ़ना यह दर्शाता है कि इस साल छात्रों ने अत्यधिक उच्च स्कोर हासिल किए हैं। 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे ज्यादा अंक और 90,780 से अधिक उम्मीदवारों ने 500 से अधिक अंक पाए हैं।
  • दाखिले का गणित बदला: जहाँ पिछले वर्षों में 580-600 के बीच सरकारी कॉलेज मिलने की उम्मीद रहती थी, वहीं इस बार उच्च स्कोरर की संख्या अधिक होने के कारण ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा की सीटों के लिए मारामारी होना तय है।

आंकड़े जो बयां कर रहे हैं
क्वालिफाई करने वालों का प्रतिशत तुलनात्मक विश्लेषण:
वर्ष     | कुल शामिल छात्र | क्वालिफाई हुए छात्र | सफलता का प्रतिशत
2025  | 22.09 लाख        | 12.36 लाख           | 55.96%
2026  | 19.99 लाख        | 11.21 लाख           | 56.06%

श्रेणी-वार क्वालिफाइंग मार्क्स (2026 बनाम 2025):
  •  General/EWS: 2025 में कट-ऑफ 144 थी, जो 2026 में 213 हो गई है (69 अंकों की वृद्धि)।
  •  OBC/SC/ST: इस वर्ष आरक्षित श्रेणियों के लिए कट-ऑफ का दायरा 212–177 अंक रहा है, जबकि पिछले साल न्यूनतम सीमा 113 अंक थी।

टॉप 50 में राज्यों का दबदबा:
देश के शीर्ष 50 रैंकर्स में राजस्थान के सबसे ज्यादा 9 छात्र शामिल हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से 7, पंजाब, तेलंगाना और हरियाणा से 5-5, गुजरात से 4, तमिलनाडु से 3 और उत्तर प्रदेश, बिहार व अन्य राज्यों से 1-1 छात्र शामिल हैं।,एक बड़ी राहत: डिजिलॉकर से मिलेगा पुराना रिजल्ट।अब छात्रों को अपने पुराने नीट स्कोरकार्ड खोने का डर नहीं रहेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को सूचित किया है कि वे डिजिलॉकर के साथ एक नया सिस्टम तैयार कर रहे हैं।
 
इसका फायदा: छात्र किसी भी समय अपनी पहचान की पुष्टि करके अपना पुराना स्कोरकार्ड पुनः डाउनलोड कर सकेंगे। यह प्रक्रिया जल्द ही लाइव होने की उम्मीद है।
संघर्ष और सफलता: टॉपर्स की जुबानी
 1. आर्यन गुप्ता (AIR 1, मार्क्स: 715/720) - कैंसर से दादी को खोया, अब ऑन्कोलॉजिस्ट बनने का लक्ष्य
   लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान हासिल किया है। उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं। आर्यन ने बताया, "जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब कैंसर के कारण मेरी दादी का निधन हो गया था। मैंने उसी दिन कसम खाई थी कि मैं इसी क्षेत्र में काम करूँगा और कैंसर रोग विशेषज्ञ (Oncologist) बनूँगा।" उन्होंने अपनी सफलता के लिए दिन में 16-17 घंटे कड़ी पढ़ाई की।
 2. उपलक्ष्य गोयल (AIR 3, मार्क्स: 711/720) - सामाजिक आयोजनों से दूरी और कड़ा अनुशासन
   जयपुर के उपलक्ष्य गोयल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और कड़े अनुशासन को दिया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान 10 से 12 घंटे लगातार पढ़ाई की। पेपर लीक की खबरों से शुरुआती निराशा के बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी गलतियों को सुधारते हुए बेहतरीन रैंक हासिल की। तैयारी के दौरान उन्होंने हर तरह के पारिवारिक कार्यक्रमों और घूमने-फिरने से पूरी तरह परहेज किया।
 3. अभिलाष (AIR 11, मार्क्स: 705/720) - हिंदी मीडियम और सीमित संसाधनों के बीच बड़ी सफलता
   हनुमानगढ़, राजस्थान के एक किसान के बेटे अभिलाष ने साबित कर दिया कि भाषा और सीमित संसाधन सफलता के आड़े नहीं आ सकते। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद, उन्होंने सीकर में रहकर कोचिंग की और देश के शीर्ष छात्रों में अपनी जगह बनाई। उनकी यह कहानी ग्रामीण भारत के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है।

इस बदलाव के क्या लाभ और भविष्य के परिणाम होंगे? 
  •  पारदर्शिता और बेहतर मूल्यांकन: उच्च कट-ऑफ यह दर्शाता है कि परीक्षा प्रणाली में प्रतिस्पर्धा पारदर्शी रही है और छात्रों के बीच तैयारी का स्तर काफी मजबूत था।
  •  डिजिटल सुरक्षा का लाभ: डिजिलॉकर के साथ एनटीए का एकीकरण छात्रों के दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखने और भविष्य में काउंसलिंग के समय होने वाली असुविधाओं को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
  •  निजी व डीम्ड यूनिवर्सिटीज के लिए अवसर: सरकारी सीटों की उच्च कट-ऑफ के चलते जिन छात्रों के स्कोर 450-550 के बीच हैं, वे समझदारी से चॉइस फिलिंग करके राज्यों के शीर्ष प्राइवेट और डीम्ड मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पा सकते हैं।