crime
महिला के गले से सोने का मंगलसूत्र निकालने वाली अस्पताल कर्मचारी दोषी करार, 12 साल बाद कोर्ट ने सुनाई सजा
सीसीटीवी फुटेज को माना सबसे अहम साक्ष्य, अदालत ने कहा— प्रत्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने पर चोरी का सामान बरामद होना जरूरी नहीं।
Sonali18 जुल. 2026, 07:10 PM IST

महाराष्ट्र के कल्याण में एक अस्पताल में भर्ती महिला की मौत के बाद उसके गले से सोने का मंगलसूत्र निकालने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) कोर्ट ने आरोपी अस्पताल कर्मचारी लता शंकर डोंगरे को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 404 के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज को विश्वसनीय साक्ष्य मानते हुए एक माह के कठोर कारावास और ₹5,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।
खबर विस्तार से
करीब 12 वर्ष पुराने इस मामले में कल्याण स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (प्रथम न्यायालय) की न्यायाधीश आरती एम. शिंदे ने 17 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया। यह मामला सारांश आपराधिक वाद संख्या 594/2014 से संबंधित है। एफआईआर संख्या 355/2014 महात्मा फुले चौक पुलिस स्टेशन, कल्याण में 29 जनवरी 2014 को दर्ज की गई थी।
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता संगीता वसंत माली की सास शकुंतला रामकृष्ण माली को 26 जनवरी 2014 को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 28 जनवरी 2014 को उनकी मृत्यु हो गई। जब परिजन शव को लेकर जाने लगे तो उन्होंने देखा कि मृतका के गले में मौजूद लगभग एक तोला सोने का मंगलसूत्र गायब था। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर कथित रूप से अस्पताल में कार्यरत मिडवाइफ (दाई) लता शंकर डोंगरे मृतका के गले से मंगलसूत्र निकालते हुए दिखाई दी। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 404 (मृत व्यक्ति के कब्जे वाली संपत्ति का बेईमानी से गबन) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने शिकायतकर्ता सहित पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए और सीसीटीवी फुटेज, फोटो, 65-बी प्रमाणपत्र तथा अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मंगलसूत्र की बरामदगी नहीं हुई और यह साबित करने वाला कोई दस्तावेज नहीं है कि मृतका की मृत्यु के समय मंगलसूत्र उसके पास था। साथ ही सीसीटीवी फुटेज की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए गए।
हालांकि, अदालत ने सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी मृतका के पास जाकर उसके गले से कोई वस्तु निकालते हुए स्पष्ट दिखाई दे रही है। न्यायालय ने माना कि शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयान सीसीटीवी फुटेज की पुष्टि करते हैं और केवल चोरी का सामान बरामद न होने से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं हो जाता।
अदालत ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विश्वसनीय सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से अपराध प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध हो जाता है और आरोपी की पहचान संदेह से परे स्थापित हो जाती है, तो अतिरिक्त मौखिक साक्ष्य या चोरी की संपत्ति की बरामदगी आवश्यक नहीं रह जाती। इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य माना गया।
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बताया कि आरोपी 70 वर्ष की महिला है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसे प्रोबेशन का लाभ दिया जाना चाहिए। लेकिन अदालत ने माना कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर मृत महिला के गले से आभूषण निकालना विश्वास का गंभीर उल्लंघन है और ऐसा अपराध समाज के विश्वास को ठेस पहुंचाता है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी लता शंकर डोंगरे को आईपीसी की धारा 404 के तहत दोषी ठहराते हुए एक माह के कठोर कारावास तथा ₹5,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि में से ₹3,000 शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में देने का भी आदेश दिया गया। जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को तीन माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट का आदेश
न्यायालय: न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), प्रथम न्यायालय, कल्याण
न्यायाधीश: आरती एम. शिंदे
निर्णय की तिथि: 17 जुलाई 2026
वाद संख्या: Summary Criminal Case No. 594/2014
एफआईआर संख्या: 355/2014
दोषसिद्धि: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 404
सजा:
एक माह का कठोर कारावास
₹5,000 का जुर्माना
₹3,000 शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश
जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का साधारण कारावास
विचारण अवधि के दौरान बिताए एक दिन की हिरासत का समायोजन (Set-off)
