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दवा या धीमा जहर? यूपी की राजधानी में दूसरे राज्यों से आ रही नकली दवाएं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में भारी मात्रा में नकली दवाओं की आपूर्ति के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जहां बाहरी राज्यों से कूरियर सेवाओं का उपयोग कर इन नकली दवाओं को स्थानीय मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस गुप्त सिंडिकेट को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर छानबीन और निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।

Anshuman Mishra19 जुल. 2026, 06:30 PM IST
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दवा या धीमा जहर? यूपी की राजधानी में दूसरे राज्यों से आ रही नकली दवाएं
यह मामला आम जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है क्योंकि ये नकली दवाएं सामान्य सर्दी-जुकाम, बुखार, दर्द निवारक और अत्यधिक बिकने वाली एंटीबायोटिक श्रेणियों की हैं, जिनकी मांग बाजार में हमेशा अधिक रहती है। उपभोक्ता अक्सर असली और नकली दवाओं में अंतर नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण इस अवैध कारोबार के माध्यम से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और यही कारण है कि प्रशासन इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।

 विभाग की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जिला स्तर पर और आसपास के क्षेत्रों में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए ही सामान्य परिवहन वाहनों का उपयोग किया जाता है, जबकि मुख्य खेप कूरियर के जरिए सीधे बाहरी राज्यों से मंगवाई जा रही है। एक बार यह स्टॉक स्थानीय दुकानों तक पहुंच जाता है, तो भौतिक जांच के बिना इसकी पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पूर्व में भी अगस्त 2023 में अमीनाबाद से दो करोड़ की नकली गोलियां, नवंबर-दिसंबर 2023 में नामी कंपनियों के नकली दर्द निवारक, जून 2025 में काकोरी में एक अवैध फैक्ट्री से सवा करोड़ की दवाएं और फरवरी 2026 में कोडीन कफ सिरप सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा चुका है। अधिकारियों का मानना है कि दवाओं के उत्पादन केंद्रों पर नकेल कसने से ही इस पूरे गोरखधंधे को पूरी तरह से रोका जा सकता है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक मंडल आयुक्त ब्रजेश ने मीडिया को बताया कि पकड़ी गई नकली दवाओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से की जा रही है और हमारी टीम एक-एक कड़ी जोड़कर उन सभी फर्मों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है जो इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी ने कहा कि नकली दवाओं के खिलाफ एफएसडीए की टीम सराहनीय कार्य कर रही है और हाल ही में लखनऊ के मेडिसिन मार्केट में 28 दुकानों का सर्वे किया गया जहां कोई संदिग्ध दवा नहीं मिली, लेकिन आगरा जैसे शहरों में गहराई से जांच करने की तत्काल आवश्यकता है जहां से इस नेटवर्क के तार जुड़े हो सकते हैं।