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साइकोलॉजिकल स्टडी का दावा: रिश्तों में बातचीत बंद होने से बढ़ रहा है इंटीमेसी गैप
आज के आधुनिक वैवाहिक और प्रेम संबंधों में आत्मीयता (इंटीमेसी) का अंतर तेजी से बढ़ता जा रहा है, जहां कपल्स के बीच आपसी संवाद और भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है। यह गंभीर समस्या मुख्य रूप से हमारे समाज की पारंपरिक सोच और जेंडर कंडीशनिंग के कारण पैदा हो रही है, जो महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक के कपल्स को प्रभावित कर रही है।
Vindhya Dubey19 जुल. 2026, 06:31 PM IST

इस सामाजिक बदलाव और शोधपरक रिपोर्ट पर ध्यान देना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह वर्तमान दौर में वैवाहिक जीवन में बढ़ते बिखराव और मानसिक तनाव की बुनियादी वजहों को उजागर करती है। जब किसी रिश्ते में खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की आजादी नहीं होती है, तो वह रिश्ता सिर्फ एक थकाऊ और मशीनी रूटीन बनकर रह जाता है, जिससे समाज में पारिवारिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं दोनों के भीतर अपनी-अपनी भावनाएं, कल्पनाएं और इच्छाएं होती हैं, लेकिन उनके प्रकटीकरण का तरीका बेहद अलग होता है। भारतीय समाज में महिलाओं को अक्सर अपनी इच्छाएं खुलकर जाहिर करने पर गलत या खराब औरत समझ लिए जाने का गहरा डर सताता है, जिसके कारण वे अक्सर चुप रहना ही बेहतर समझती हैं।
दूसरी तरफ, हमारी सामाजिक पितृसत्तात्मक व्यवस्था पुरुषों को इस तरह कंडीशन करती है कि वे सामने वाले पार्टनर को गहराई से सुनने या समझने की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त मान लेते हैं। जब रिश्ते के भीतर यह खामोश स्क्रिप्ट चलने लगती है, तो बाहरी तौर पर हंसता-खेलता और मुकम्मल दिखने वाला परिवार अंदर से पूरी तरह खोखला होने लगता है। इस कम्युनिकेशन गैप के कारण धीरे-धीरे पूरे रिश्ते की गर्माहट और नयापन खत्म हो जाता है। इस विषय पर विश्व प्रसिद्ध रिलेशनशिप एक्सपर्ट और मैरिज थेरेपिस्ट एस्तेर पेरेल का कहना है कि मानवीय इच्छाएं सिर्फ शारीरिक स्तर तक सीमित नहीं होती हैं, बल्कि वे मानसिक कल्पनाओं और भावनात्मक जुड़ाव से आकार लेती हैं।
महिलाओं के लिए अपनी स्वयं की इच्छाओं और पहचान से जुड़े रहना आधुनिक दौर में भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं आत्मीयता को परिभाषित करते हुए प्रसिद्ध दार्शनिक और लेखक एलेन डी बॉटन का एक महत्वपूर्ण बयान है कि इंटीमेसी वास्तव में किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बिना किसी झिझक के पूरी तरह से स्वाभाविक या थोड़े अजीब होने की क्षमता है, जहां आपको यह भरोसा हो कि सामने वाले पार्टनर को आपके इस रूप से कोई आपत्ति नहीं है। इस विषय के विश्लेषकों ने समस्या के समाधान पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि इस पूरी कहानी का हल कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके लिए बहुत ही छोटी और ईमानदार बातचीत की शुरुआत करने की जरूरत है, जहां दोनों पार्टनर बिना किसी पूर्वाग्रह के एक-दूसरे को सुनना शुरू करें।
