health
रोज-रोज के इंजेक्शन से मुक्ति: भारत में आया हफ्ते में सिर्फ एक बार लगने वाला साप्ताहिक इंसुलिन
डेनवर्थ की मशहूर दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारतीय बाजारों में वयस्क डायबिटीज रोगियों के लिए दुनिया का पहला साप्ताहिक बेसल इंसुलिन एविकली (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च कर दिया है। यह आधुनिक दवा जुलाई 2026 से भारत भर में उपलब्ध हो चुकी है, जो मरीजों को रोज-रोज इंजेक्शन लगाने के झंझट से पूरी तरह मुक्ति दिलाएगी।

इस दवा के काम करने का तरीका बेहद अनूठा है। एक बार इंजेक्ट किए जाने के बाद यह शरीर में मौजूद एल्ब्यूमिन प्रोटीन से अस्थायी रूप से जुड़ जाता है और लगभग 196 घंटों (करीब 8 दिनों) तक बहुत धीरे-धीरे रक्त में रिलीज होता रहता है, जिससे पूरे सप्ताह ब्लड शुगर का स्तर स्थिर रहता है। किफायती दरों की बात करें तो कंपनी ने इसे भारतीय बाजार के अनुकूल काफी प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उतारा है। इसके 1 मिलीलीटर (700 इंसुलिन यूनिट) वाले फ्लेक्सटच पेन की कीमत 2,611 रुपये तय की गई है। यदि कोई मरीज डॉक्टर की सलाह पर प्रति सप्ताह 70 यूनिट की खुराक लेता है, तो इसका साप्ताहिक खर्च महज 261 रुपये के आसपास आएगा, जो वर्तमान में उपलब्ध दैनिक इंसुलिन एनलॉग्स से करीब 30 से 40 फीसदी तक सस्ता है।
भारत दुनिया का सातवां ऐसा देश बन गया है जहां इस क्रांतिकारी दवा को विनियामक मंजूरी मिली है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह एक बेसल (लॉन्ग-एक्टिंग) इंसुलिन है। इसका मतलब यह है कि टाइप-1 और गंभीर टाइप-2 डायबिटीज वाले जिन मरीजों को भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाले शुगर को नियंत्रित करने के लिए रैपिड-एक्टिंग (बोलस) इंसुलिन की आवश्यकता होती है, उन्हें वह पहले की तरह ही अलग से लेनी होगी। इसे सप्ताह में किसी भी एक निश्चित दिन और एक ही तय समय पर डॉक्टर की देखरेख में खुराक सेट करने के बाद त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है।
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय ने इस ऐतिहासिक लॉन्च पर मीडिया से कहा कि एविकली का आगमन भारत में डायबिटीज देखभाल के लिए एक टर्निंग पॉइंट है। लंबे समय से साप्ताहिक इंसुलिन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और अब यह भारत में एक वास्तविकता है। यह दवा इंसुलिन थेरेपी शुरू करने के शारीरिक और मानसिक अवरोधों को दूर करेगी। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. एस. के. वांग्नू ने दवा के क्लीनिकल फायदों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दैनिक इंजेक्शन को साप्ताहिक खुराक में समेकित करने से मरीजों की सुविधा तो बढ़ी ही है, साथ ही यह अत्यधिक सुरक्षित भी है। ओनवार्ड्स क्लीनिकल ट्रायल्स के डेटा से पता चलता है कि यह दवा पारंपरिक डेली इंसुलिन ग्लार्गिन यू100 के मुकाबले ब्लड शुगर (HbA1c) को नियंत्रित करने में ज्यादा असरदार है और इससे हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर का स्तर खतरनाक रूप से कम होना) का जोखिम भी काफी कम हो जाता है।
