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संभल जाइए! जरूरत से ज्यादा पानी पीना दे रहा है किडनी को धोखा

हाल ही में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ज्यादा पानी पीने से किडनी स्वस्थ रहने तथा नाभि में तेल लगाने से वजन घटने के दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बिना जरूरत के अत्यधिक पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और इससे शरीर में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो सकता है।

Vindhya Dubey19 जुल. 2026, 06:32 PM IST
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संभल जाइए! जरूरत से ज्यादा पानी पीना दे रहा है किडनी को धोखा

इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के इस दौर में लोग बिना किसी वैज्ञानिक आधार के स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक दावों पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं, जो उनके शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को स्पष्ट करना इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि सही जानकारी के अभाव में लोग अपनी जीवनशैली को खतरे में डाल रहे हैं और अंगों से जुड़े गंभीर रोगों को बुलावा दे रहे हैं।

अखबारों में छपी रिपोर्ट और मेडिकल जर्नल के अनुसार, आम तौर पर लोगों को लगता है कि जितना ज्यादा पानी पिया जाएगा, किडनी उतनी ही बेहतर तरीके से साफ होगी, लेकिन यह सोचना पूरी तरह से गलत है। एक सामान्य इंसान को सर्दियों में लगभग ढाई से तीन लीटर और गर्मियों में साढ़े तीन लीटर (करीब 10 से 12 गिलास) पानी ही पीना चाहिए। बिना प्यास के जबरदस्ती पानी पीने से किडनी को अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जो उसे नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार में एक या दो गिलास से ज्यादा पानी कभी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इंसानी किडनी प्रति घंटे केवल 800 मिलीलीटर से 1 लीटर पानी ही प्रोसेस कर सकती है। उससे ज्यादा पानी पीने पर शरीर में लिक्विड का ओवरलोड हो जाता है।


इसके अलावा, वायरल दावों में वजन घटाने और पथरी के दर्द को लेकर भी कई बड़े मिथकों का पर्दाफाश किया गया है। अक्सर लोग सोचते हैं कि भूखे रहने या केवल जूस पीने से वजन कम होता है, जबकि सच यह है कि भूखे रहने से पेट में गैस और एसिडिटी बढ़ती है और पैक्ड जूस में फाइबर न होने के कारण सिर्फ अतिरिक्त कैलोरी मिलती है। वहीं नाभि में खास तरह के तेल लगाने से मेटाबॉलिज्म तेज होने और चर्बी पिघलने का दावा भी पूरी तरह से वैज्ञानिक आधार से परे है। चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक, नाभि केवल जन्म के समय मां से जुड़ने का एक जरिया (अम्बिलिकल कॉर्ड का निशान) होती है, जन्म के बाद इसका आंतरिक अंगों या फैट बर्निंग प्रोसेस से कोई सक्रिय संबंध नहीं रहता। पथरी के मामले में भी यदि दर्द बंद हो जाए, तो इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी खत्म हो गई है, जब तक डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन से इसकी पुष्टि न कर दें।


नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजी कंसलटेंट डॉ. उदय सिंह बेनीवाल ने एक मेडिकल इंटरव्यू में बताया कि जब शरीर को किडनी की क्षमता से ज्यादा पानी मिलता है, तो रक्त में सोडियम का स्तर तेजी से गिर जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके कारण सिरदर्द, उल्टी, सूजन, थकान और गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नाभि में तेल लगाने के दावे पर कहा कि नाभि केवल एक हील स्कार यानी त्वचा का निशान है और इसके माध्यम से वजन घटाने या मेटाबॉलिज्म तेज करने का कोई भी वैज्ञानिक तंत्र या प्रमाण चिकित्सा जगत में उपलब्ध नहीं है। वजन घटाने का एकमात्र जरिया संतुलित आहार और शारीरिक व्यायाम ही है।