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बारिश और धूप के बीच बढ़ा संक्रमण का खतरा, इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

कल्याण-डोंबिवली समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून के दौरान मौसम का लगातार बदलता मिजाज लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश और बढ़ती उमस के कारण वायरल बुखार, सर्दी-खांसी, डेंगू, मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से लक्षणों को नजरअंदाज न करने, समय पर जांच कराने और साफ-सफाई के साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।

Priyanka Gaikwad19 जुल. 2026, 07:55 PM IST
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बारिश और धूप के बीच बढ़ा संक्रमण का खतरा, इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
मानसून के मौसम में तापमान और नमी में लगातार बदलाव होने से वायरस, बैक्टीरिया और मच्छरों के तेजी से पनपने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस दौरान वायरल फीवर, सर्दी-खांसी, गले में संक्रमण, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में हो रहे इस बदलाव का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, शरीर में तेज दर्द, उल्टी, दस्त या सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत हो तो इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर संक्रमण से बचा जा सकता है। स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर की सलाह लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं, बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें और ताजा एवं पौष्टिक भोजन का सेवन करें। बारिश के मौसम में हाथों की नियमित सफाई, घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना और जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद घरों, छतों, कूलर, गमलों, टंकियों और आसपास के स्थानों पर पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही स्थान डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन का मुख्य कारण बनते हैं। यदि तीन दिन से अधिक बुखार बना रहे या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सरकारी अस्पताल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश और उमस भरे मौसम की संभावना जताई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खान-पान में बदलाव करने तथा किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। सावधानी, स्वच्छता और समय पर उपचार ही मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।