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सावधान! सिर्फ मोटापा ही नहीं, कमजोर मांसपेशियां भी दे सकती हैं डायबिटीज को दावत
आमतौर पर टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) का मुख्य कारण बढ़ते वजन और मोटापे को माना जाता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में हुए एक नए और महत्वपूर्ण चिकित्सा अनुसंधान ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, शरीर में मोटापे के साथ-साथ यदि मांसपेशियां (मसल्स) भी कमजोर हों, तो डायबिटीज का खतरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को 'सार्कोपेनिक ओबेसिटी' (Sarcopenic Obesity) कहा जाता है।

क्या कहती है ऑस्ट्रेलिया की यह रिसर्च?
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों की तुलना में, जिन लोगों में मोटापा और कमजोर मांसपेशियां (सार्कोपेनिक ओबेसिटी) दोनों समस्याएं एक साथ थीं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 19 प्रतिशत (19%) अधिक था।
इसके अलावा, रिसर्च में एक और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। जिन लोगों को केवल 'सार्कोपेनिया' (यानी बिना मोटापे के सिर्फ कमजोर मांसपेशियां) थी, उनकी तुलना में सार्कोपेनिक ओबेसिटी (मोटापा + कमजोर मसल्स) वाले मरीजों में डायबिटीज का खतरा 91 प्रतिशत (91%) तक ज्यादा दर्ज किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किन्हीं दो व्यक्तियों की मांसपेशियां एक समान रूप से कमजोर हैं, लेकिन उनमें से एक व्यक्ति मोटापे का भी शिकार है, तो उसे डायबिटीज होने की संभावना 91% अधिक होगी।
मसल्स की मजबूती है जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर वजन कम करने के लिए केवल कार्डियो या डाइटिंग पर ध्यान देते हैं, जिससे फैट के साथ-साथ मसल्स मास भी कम हो जाता है। डायबिटीज से बचने के लिए शरीर में मांसपेशियों का मजबूत होना बेहद जरूरी है, क्योंकि मसल्स ग्लूकोज को सोखने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए संतुलित खान-पान के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम) को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
