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क्या प्रोबायोटिक गमीज़ बचा सकती हैं मसूड़ों की बीमारी से? नई स्टडी में बड़ा दावा
जापान में किए गए एक क्लिनिकल ट्रायल में सामने आया है कि लाभकारी बैक्टीरिया (पोस्टबायोटिक्स) वाली प्रोबायोटिक गमीज़ का नियमित सेवन मसूड़ों से खून आने (गम ब्लीडिंग) की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती मसूड़ों की बीमारी (जिंजिवाइटिस) से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक आसान और सहायक उपाय हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह ब्रशिंग, फ्लॉसिंग और नियमित डेंटल जांच का विकल्प नहीं है।
Vindhya Dubey20 जुल. 2026, 02:16 PM IST

जर्नल ऑफ पीरियोडॉन्टोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टोक्यो के शोधकर्ताओं ने हल्के जिंजिवाइटिस से पीड़ित 116 लोगों को शामिल किया। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को प्रतिदिन Lactiplantibacillus pentosus युक्त दो गमीज़ दी गईं, जबकि दूसरे समूह को प्लेसीबो (दवा जैसी लेकिन निष्क्रिय) गमीज़ दी गईं। यह अध्ययन छह सप्ताह तक चला।
क्या मिला अध्ययन में?
अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रोबायोटिक गमीज़ लेने वाले समूह में मसूड़ों की सूजन का प्रमुख संकेत माने जाने वाले Bleeding on Probing (BOP) स्कोर में उल्लेखनीय कमी आई। इस समूह का औसत BOP स्कोर 17.6 प्रतिशत से घटकर 12.3 प्रतिशत रह गया, जबकि प्लेसीबो समूह में यह 18.9 प्रतिशत से घटकर 16.6 प्रतिशत हुआ। शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों को मौखिक स्वच्छता (ओरल हाइजीन) से संबंधित कोई अतिरिक्त सलाह नहीं दी गई थी। इससे संकेत मिलता है कि सामान्य जीवनशैली में भी इन गमीज़ का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
क्या हैं पोस्टबायोटिक गमीज़?
इस अध्ययन में पारंपरिक जीवित प्रोबायोटिक्स की बजाय पोस्टबायोटिक्स का उपयोग किया गया। पोस्टबायोटिक्स ऐसे लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं जिन्हें गर्मी से निष्क्रिय (Heat-killed) कर दिया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन्हें तैयार करना, पैक करना और लंबे समय तक सुरक्षित रखना अपेक्षाकृत आसान होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पीरियोडॉन्टल बीमारी के उपचार का आधुनिक तरीका केवल हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने पर नहीं, बल्कि मुंह में लाभकारी और हानिकारक बैक्टीरिया के संतुलन (Eubiosis) को बहाल करने पर केंद्रित है। चबाकर खाई जाने वाली गमीज़ लार के स्राव को भी बढ़ा सकती हैं, जिससे लाभकारी तत्व लंबे समय तक मसूड़ों के संपर्क में रहते हैं और उनका प्रभाव बेहतर हो सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है मसूड़ों का स्वास्थ्य?
हाल के वर्षों में कई अध्ययनों ने खराब मौखिक स्वास्थ्य को हृदय रोग, मधुमेह और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों से जोड़ा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में लगभग 1.5 अरब लोग गंभीर मसूड़ों की बीमारी के जोखिम में हो सकते हैं। ऐसे में आसान और सुलभ उपाय बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन का उद्देश्य वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में इन गमीज़ की उपयोगिता का आकलन करना था। उनके अनुसार, पोस्टबायोटिक्स उन लोगों में जिंजिवाइटिस को नियंत्रित करने का एक सहायक विकल्प बन सकते हैं, जिनमें भविष्य में पीरियोडॉन्टल बीमारी विकसित होने का जोखिम अधिक है।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोबायोटिक या पोस्टबायोटिक गमीज़ को केवल सहायक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। स्वस्थ मसूड़ों और दांतों के लिए नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना, फ्लॉस का उपयोग करना और समय-समय पर दंत चिकित्सक से जांच कराना अब भी सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही, इन गमीज़ के दीर्घकालिक प्रभाव और इनके कार्य करने की सटीक प्रक्रिया को समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।
NOTE: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। अपने ओरल केयर रूटीन में कोई भी बदलाव करने से पहले योग्य दंत चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
